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पिता के स्वास्थ्य लाभ के लिए मांगी मनौती, इच्छा पूरी हुई तो 600 किमी की दंडवत यात्रा

आप इसे आस्था माने या अंधविश्वास यह आपके विवेक पर निर्भर करता हैं। परन्तु आज भी लोगों अपनी मनौती पूर्ण होने पर एक...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 05:40 AM IST
आप इसे आस्था माने या अंधविश्वास यह आपके विवेक पर निर्भर करता हैं। परन्तु आज भी लोगों अपनी मनौती पूर्ण होने पर एक युवक दंड़वत अपनी आस्था का प्रमाण देता रहा है। ऐसा ही नजरा मंगलवार को क्षेत्र में दृष्टिगत हुआ। जब एक युवक अपने पिता के स्वास्थ होने की मांगी गई कामना के पूर्ण होने पर लगभग 600 किमी तक बाबा रामदेव के नाम का स्मरण करते हुए कनक दंड़वत करते हुए रामदेवरा जा रहा है। टोड़ारायसिंह तहसील के निमेड़ा गांव निवासी रामधन ने बताया कि 2011 में पिता लादूराम लकवे रोग की चपेट में आ गए। कई जगह उनका इलाज कराया। मगर पिता के स्वास्थ्य में सुधार नही हुआ। उनकी दयनीय स्थिती देखी नहीं जा रही थी। एक दिन रूणिचाधाम के धणी बाबा रामदेव का ध्यान करते हुए प्रार्थना की। रामधन ने बताया कि उसने संकल्प लिया कि यदि उसके पिता लकवा रोग से मुक्त हो जाएंगें तो वह दंड़वत कर गांव से रूणिचा तक की पांच यात्राएं करेगा। रामधन की आस्था रंग लाई उसके पिता के सवस्थ्य में सुधार होने लगा। अपने संकल्प पर अमल करने के लिए अब वह दंड़वत यात्रा पर निकल गया है। रिक्शा में अखण्ड़ ज्योत जलाकर सुबह सात बजे से 11 बजे तक के चार घंटे में एक किमी की यात्रा प्रतिदिन कर रहा है।

यह चौथी दंडवत यात्रा, लोगों ने रखा लोटन बाबा नाम

रामधन बाबा रामदेव पहुंचकर प्रार्थना करने के बाद वापस गांव निमेड़ा आ जाता है। लगभग दो-तीन माह गांव में रहने के फिर इस यात्रा पर निकल पड़ता। यह क्रम गत तीन यात्रा से जारी है। यह उसकी अब चौथी यात्रा है। इस दौरान कई परिजन व रिश्तेदार तथा स्वयं सेवक भी साथ रहते हैं। लगातार दंड़वत यात्राएं करने पर लोगों ने उसे लौटन बाबा नाम दिया है। इस दौरान उसके साथ कालूराम, हंसराज, दौलतराम, रामदेव, गणेशराम, शिवलाल व विश्राम आदि सहयोगी मौजूद रहे रहते हैं। रात्रि विश्राम के दौरान के ग्रामीण रामधन व उनके सहयोगियों के लिए भोजन-पानी की व्यवस्था करते हैं। रात में भजन संध्या के बाद अगले दिन दंड़वत यात्रा शुरू हो जाती है।