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सरिस्का के बिदरका से जरख के तीन शावक पकड़कर जयपुर भेजे

अलवर | किशनगढ़बास के बिदरका गांव के जंगल में लावारिस घूमते हाइना (जरख) के तीन शावकों को सरिस्का की टीम ने रेस्क्यू...

Danik Bhaskar | Mar 04, 2018, 02:00 AM IST
अलवर | किशनगढ़बास के बिदरका गांव के जंगल में लावारिस घूमते हाइना (जरख) के तीन शावकों को सरिस्का की टीम ने रेस्क्यू कर पकड़ लिया। हाइना को दो दिन पहले कुत्तों ने मार दिया था। तभी से ये शावक हाइना की गुफा के पास घूम रहे थे। विश्व वन्यजीव दिवस पर जंगल से पकड़े इन शावकों को सुरक्षा की दृष्टि से जयपुर चिड़ियाघर भेजा गया है। बिदरका गांव के महमूद पुत्र रहमान ने धुलंडी के दिन जंगल में हाइना के शावकों को घूमने की सूचना सरिस्का के उप वन संरक्षक बालाजी करी को दी। उप वन संरक्षक के निर्देश पर अलवर बफर जोन के रेंजर जितेन्द्र सिंह चौधरी के नेतृत्व में टीम बिदरका गांव के जंगल में पहुंची। पहाड़ी क्षेत्र के इस घने जंगल में धौंक के काफी पेड़ हैं। जंगल में रेस्क्यू कर टीम ने दो शावकों को पकड़ लिया, जबकि एक शावक गुफा में घुस गया। चौथा शावक मृत मिला, जिसके शव का किशनगढ़बास के पशु चिकित्सालय में पोस्टमार्टम कराया गया। नाले के पास हाइना की बीस फीट गहरी गुफा से शावक को पकड़ने के लिए टीम लगाई गई। करीब चार घंटे बाद भूख लगने पर शावक गुफा से बाहर आया तो सरिस्का की टीम ने उसे पकड़ लिया। जयपुर चिड़ियाघर के डॉक्टर अरविंद माथुर की सलाह पर रेंजर चौधरी तीनों शावकों को गाड़ी से जयपुर चिड़ियाघर ले गए। रेंजर चौधरी ने बताया कि शावकों का रेस्क्यू करने के बाद बिदरका के जंगल में शुक्रवार और शनिवार को दो किलोमीटर के दायरे में हाइना की तलाश की गई, लेकिन उसके जंगल में आसपास होने के कोई प्रमाण नहीं मिले। इस संबंध में ग्रामीणों ने बताया कि हाइना को दो दिन पहले कुत्तों ने मार दिया था। धुलंडी के दिन बिदरका के जंगल से पकड़े दो शावकों को भूरासिद्ध रेंज कार्यालय में रखा गया।



दूसरे दिन शनिवार को तीसरे शावक को पकड़ने के बाद जयपुर भेजा गया। पकड़े गए जिंदा शावकों में दो मादा हैं।