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विभाग ने जंगल से हड्डियां और मांस हटाए, 4 दिन भूखा रहा तो भोजन की तलाश में पिंजरे में आ गया लकड़बग्घा

कहते हैं भूख इंसान तो क्या जानवर को भी बेबस कर देती है। करीब पंद्रह दिन पूर्व माचिया सफारी पार्क से भागा लकड़बग्घा...

Danik Bhaskar | Apr 02, 2018, 03:40 AM IST
कहते हैं भूख इंसान तो क्या जानवर को भी बेबस कर देती है। करीब पंद्रह दिन पूर्व माचिया सफारी पार्क से भागा लकड़बग्घा रविवार सुबह सात बजे खुद ही भोजन की तलाश में पिंजरे में चला आया। कई दिनों से भूखा लकड़बग्घा दो किलो मांस और हड्डियां खा गया। पिंजरे में आने के बाद मेडिकल ट्रीटमेंट कर रेस्क्यू सेंटर की टीम ने रोग प्रतिरोधात्मक शक्ति बढ़ाने के लिए उसे दवाइयां दी, फिर नहलाया। दरअसल, गत 17 मार्च की सुबह माचिया सफारी पार्क में सफाई का काम चल रहा था। इस दौरान नर और मादा लकड़बग्घा ने एनक्लोजर की जाली को मुंह से खोला और पीछे दो फीट की दीवार को फांदकर माचिया वन खंड की पहाड़ियों में भाग गए। घटना के बारह घंटे में मादा लकड़बग्घा काे रेस्क्यू कर वापस पिंजरे में डाल दिया गया, जबकि नर लकड़बग्घा नहीं मिला। वन विभाग वन्यजीव की टीम ने पहले तो माचिया के जंगल में उसके लिए हड्डियां डालीं और दो पिंजरों में मांस रखा फिर एक पिंजरे में उसे रिझाने के लिए मादा को भी डाला, लेकिन पकड़ में नहीं आया और हड्डियां खाकर काम चलाने लगा। इस पर विभाग की टीम ने जहां वह छुपा था, उस जगह से पिंजरे और उसमें रखा भोजन हटा दिया। करीब चार दिन भूखा रहा तो 1 अप्रैल की सुबह रोने की आवाज निकालता हुआ माचिया के पास एक पिंजरे के पास आया और उसमें पड़ा मांस खाने लगा, पास ही चौकसी कर रही वन विभाग की टीम ने उसे पकड़ लिया। बाद में उसे माचिया परिसर में लाकर जाल में पकड़ एनक्लोजर में डाल दिया।

आधा कान कट गया

भागने के दौरान संभवतया कंटीली झाड़ियों में छुपने के दौरान लकड़बग्घे का बाएं कान का आधा हिस्सा कट गया। इस पर मेडिकल टीम ने दवा लगा ठीक करने की कोशिश की है।

जिस समय भागा, उसी समय लौटा

17 मार्च को नर लकड़बग्घा सुबह सात बजे माचिया से भागा था और रविवार को सुबह सात बजे ही पिंजरे में लौटा। उसके आने-जाने का समय एक सा रहा, लेकिन जब वापस आया तो वह काफी कमजोर हो गया था और चलने-फिरने में भी दिक्कत महसूस कर रहा था।

माचिया सफारी से कुछ दिन पहले लापता हुआ लकड़बग्गा रविवार को पकड़ा गया।