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‘ओरिजनल्स’ बनना है? ये गुण अपनाएं

मौलिक चिंतन करने वालों को कौन-सा गुण दूसरों से अलग करता है? कुछ कहते हैं आईक्यू तो कुछ आत्मविश्वास पर असलियत कुछ और...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 03:40 AM IST

मौलिक चिंतन करने वालों को कौन-सा गुण दूसरों से अलग करता है? कुछ कहते हैं आईक्यू तो कुछ आत्मविश्वास पर असलियत कुछ और ही है। जानिए :

मनोवैज्ञानिक एडम ग्रांट के अनुसार उन्हें जो खास बनाती है वह हैं उनकी आदतें। हम भी ये आदतें अपनाकर अधिक रचनात्मक, तार्किक और आत्म-विश्वास से परिपूर्ण बन सकते हैं। पहली आदत है टालमटोल की। जी हां, लियोनार्दो दा विंची में यह गुण बहुत अधिक था इसीलिए मोना लिसा बनाने में उन्हें 16 साल लग गए। लेकिन इस दौरान ऑप्टिक्स की स्टडी से पेंटिंग में वे प्रकाश जिस तरह डालते थे वह बदल गया व वे बेहतर पेंटर हो गए। ग्रांट के मुताबिक ‘ओरिजिनल्स’ तेजी से शुरुआत करते हैं पर खत्म करने में धीमे होते हैं। बाहर से उनमें आत्मविश्वास दिखता है पर भीतर से उन्हें भी हमारी तरह डर व संदेह होता है। खुद पर संदेह पंगु बनाता है पर आइडिया पर संदेह ऊर्जा देता है। जैसे कोई लेखक खुद को खराब कहने की बजाय कहे कि पहले कुछ अध्याय तो खराब ही होते हैं। रिसर्च में पता चला है कि फायरफॉक्स व क्रोम यूज़र इंटरनेट एक्प्लोरर से बेहतर काम करते हैं, क्योंकि वे डिफॉल्ट पर संदेह करके बेहतर विकल्प चुनते हैं। जो मौजूद है उस पर संदेह करना। हजार बार देखी चीज को नई दृष्टि से देखने से वे चीजें दिखती हैं, जो पहले नहीं दिखी थीं। ‘ओरिजनल्स’ भी नाकामी से डरते हैं लेकिन, दूसरों से उन्हें जो चीज अलग बनाती है वह है- प्रयास न करने का भय। ओरिजनल्स ही ज्यादा नाकाम होते हैं, क्योंकि वे ही सबसे ज्यादा प्रयास करते हैं। ग्रांट कहते हैं, ‘ओरिजनल्स’ होना आसान नहीं है पर दुनिया को बेहतर बनाने का इससे अच्छा और कोई तरीका भी नहीं है।



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