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राज्यों के बीच सामान ले जाने के लिए ई-वे बिल आज से

गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) के तहत एक अप्रैल से देशभर में ई-वे बिल व्यवस्था लागू होने जा रही है। इसके तहत...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 04:25 AM IST

राज्यों के बीच सामान ले जाने के लिए ई-वे बिल आज से
गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) के तहत एक अप्रैल से देशभर में ई-वे बिल व्यवस्था लागू होने जा रही है। इसके तहत कारोबारियों को एक राज्य से दूसरे राज्य में 50,000 रुपए से अधिक कीमत का सामान ले जाने के दौरान ई-वे बिल रखना अनिवार्य होगा। सरकार इसे टैक्स चोरी रोकने और टैक्स कलेक्शन बढ़ाने के उपाय के तौर पर पेश कर रही है। अभी ज्यादातर कारोबार नकद में होता है। ई-वे बिल से ऐसा कारोबार हिसाब में आएगा और इस पर जीएसटी लगने से टैक्स कलेक्शन बढ़ने की उम्मीद है।

पहले यह व्यवस्था एक फरवरी को लागू की गई थी, लेकिन पहले ही दिन परमिट जारी करने में तकनीकी दिक्कतें पेश आने के बाद इसे स्थगित करना पड़ा था। अब यह एक अप्रैल से लागू होने जा रही है। जीएसटीएन ने तकनीकी खामियों से निपटने की व्यवस्था की है और अब ई-वे बिल तभी जनरेट होगा जब सड़क, रेल, विमान या पानी के जहाज से माल किसी एक राज्य से दूसरे राज्य में ले जाया जा रहा हो। ई-वे बिल से संबंधित सिस्टम का विकास नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) ने किया है। इस पर रोज 75 लाख अंतरराज्यीय ई-वे बिल बनाए जा सकेंगे। जीएसटी काउंसिल ने इस माह के शुरू में चरणबद्ध तरीके से ई-वे बिल लागू करने का फैसला किया था। इसके तहत इंटर स्टेट (राज्यों के बीच) ई-वे बिल व्यवस्था एक अप्रैल से लागू की जा रही है। जबकि इंट्रा स्टेट (राज्य के भीतर) 15 अप्रैल से ई-वे बिल व्यवस्था लागू की जाएगी। इस सप्ताह के शुरू तक ई-वे बिल पोर्टल पर 11 लाख रजिस्ट्रेशन हुए हैं। जबकि जीएसटी के तहत 1.05 करोड़ कारोबारी पंजीकृत हैं। करीब 70 लाख कारोबारी मासिक जीएसटी रिटर्न दाखिल करते हैं।

ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस कोर कमेटी के चेयरमैन बाल मलकीत सिंह के अनुसार पिछली बार की तरह हमारी चिंता यही है कि क्या यह प्रणाली इंडस्ट्री की सभी जरूरतों पर पूरी तरह खरी उतर पाएगी। इंडियन फाउंडेशन ऑफ ट्रांसपोर्ट रिसर्च एंड ट्रेनिंग के सीनियर फैलो एसपी सिंह के अनुसार इस सिस्टम में इंटर- स्टेट हिस्सेदारी केवल 40 फीसदी ही है।

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