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क्या हो अगर मोदी अमेरिका में ट्रम्प होते और सलमान होते अंबानी

मोदी डोनाल्ड ट्रंप होते तो जाने कब अमेरिका जाते हुए प्लेन मोड़कर उ. कोरिया शादी में उतर जाते। ट्रम्प की रूस से...

Danik Bhaskar

Mar 01, 2018, 05:20 AM IST
मोदी डोनाल्ड ट्रंप होते तो जाने कब अमेरिका जाते हुए प्लेन मोड़कर उ. कोरिया शादी में उतर जाते। ट्रम्प की रूस से दोस्ती जगजाहिर है, ट्रम्प बने मोदी नोटबंदी करते तो डॉलर की जगह रूबल चलवा देते। उन पर मेक्सिको की दीवार बनवाने का दबाव होता। रिपब्लिकन पार्टी के उनके साथी ‘दीवार वहीं बनाएंगे’,‘दीवार नई बनाएंगे’ कहते। व्हाइट हाउस ‘उज्जवल लोक कल्याण राष्ट्रपति भवन’ हो जाता। ‘डेमोक्रेट मुक्त’ अमेरिका का नारा देते। मैन्यूफैक्चरिंग महंगी होने के कारण मेक इन अमेरिका का विरोध करते।

यदि सलमान होते मुकेश अंबानी

सल्लू भाई अंबानी होते तो मशहूर नेटवर्क का नाम ‘जीने दो’ हो जाता। डर इस बात का होता कि भाई के फैन फ़िल्में थिएटर की बजाय मुफ्त के इंटरनेट पर देखने लगते। सलमान तब भी भाई कहे जाते लेकिन उन्हें भाई कहकर सिर्फ अनिल बुलातेे। खुद सलमान तब अंबानी के नाम से पुकारा जाना ज्यादा पसंद करते क्योंकि मुकेश में भी तो ‘केस’ आता है। रिलायंस के नाम से भी ‘लायंस’ हट जाता, क्योंकि भाई तो टाइगर हैं ना, और टाइगर ज़िंदा है। फिलहाल सलमान खान अपनी बेल्ट हिलाकर फ़िल्में चला लेते हैं, तब वो वॉलेट हिलाकर देश चला लेते। सलमान को बिजनेस के लिए पैसों की जरूरत भी नहीं होती, जब वो बिना कहानी के फिल्म बना सकते हैं तो बिना पैसों के बिजनेस क्यों नहीं चाल पाते।

यदि रामदेव होते आरबीआई गवर्नर

उर्जित पटेल बनने के बाद बाबा का नाम अर्जित पटेल होता। क्योंकि बाबा के स्वभाव में अर्जित करना रहा है। वे आरबीआई का नाम पीएनबी कर देते। यानी पतंजलि नेशनल बैंक। वे नोटबंदी नहीं करते, बल्कि खाताधारकों को सुबह जल्दी जगाकर अनुलोम-विलोम करवाते। बाबा आरबीआई की गाइडलाइनों में भी रोज़-रोज़ बदलाव नहीं करते। बस जरूरत पड़ने पर वो पतंजलि के हर्बल नोट लॉन्च कर देते। लोग एटीएम से एक पैर पर खड़े होकर पैसा निकालते और स्वस्थ रहते।

यदि राहुल होते नरेंद्र मोदी

राहुल गांधी मोदी होते तो वे भले ही अपना फटा कुर्ता पहनते लेकिन उस कुर्ते पर उनके नाम का होलोग्राम होता। देश को तब अचानक से विकास का अमेठी मॉडल पता चल पाता। देशभर के लोगों को महसूस होता कि अमेठी से विकसित तो कोई जगह ही नहीं है। वे अपने भाषण की शुरुआत में कहते- भइय्या मित्रों से बचो। देश भर में ‘मोदी लहर’ की तरह ‘गांधी की आंधी’ जैसे शब्द सुनाई पड़ते। भाजपा के लिए चुनौतियां बढ़ जातीं क्योंकि शिवभक्त राहुल के चक्कर में उन्हें अपना ध्यान राम मंदिर से हटाकर भगवान शिव पर लगाना होता। वे जब भी कोई चुनाव हारते तो कहते कि सत्ता जहर है और वोटर इस बात को मानते हैं इसलिए उन्होंने मुझे जहर से बचाया है। हॉफ स्लीव्स का कुर्ता पहनते इसलिए बार-बार बांह नहीं चढ़ा पाते।

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