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किसी अपने का हाथ पकड़ने से दोनों की ब्रेन वेव

किसी अपने का हाथ पकड़ने से दोनों की ब्रेन वेव मिलती हैं, इसीलिए मिलता है सुकून एजेंसी | वाशिंगटन पहली बार...

Danik Bhaskar | Mar 04, 2018, 07:30 AM IST
किसी अपने का हाथ पकड़ने से दोनों की ब्रेन वेव मिलती हैं, इसीलिए मिलता है सुकून

एजेंसी | वाशिंगटन

पहली बार वैज्ञानिक तौर पर साबित हुआ है कि किसी अपने का हाथ पकड़ने पर दर्द या दुख का अहसास कम क्यों हो जाता है। अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कोलाराडो ने एक शोध से नतीजा निकला है कि जब कोई व्यक्ति किसी अपने करीबी का हाथ पकड़ता है, तो दोनों लोगों की ब्रेन वेव (दिमागी तरंग) और दिल की धड़कन एक-दूसरे से मिलती है और एक लय में आती है। इस कारण हाथ थामने से दोनों लोगों को शारीरिक या मानसिक दर्द से राहत का अनुभव होता है। दोनों की ब्रेन वेव और दिल की धड़कन जितनी तेजी से एक लय में आती है, दर्द का अनुभव उतनी ही तेजी से कम होने लगता है।

अध्ययन के लिए वैज्ञानिकों ने 23 से 32 साल की उम्र के ऐसे 22 लोगों का चुनाव किया, जो किसी ना किसी मानसिक या शारीरिक पीड़ा से गुजर रहे हों। इन लोगों को 2-2 के ग्रुप में बांटा गया। फिर हर ग्रुप के सदस्य की मानसिक स्थिति को 3 अलग-अलग परिस्थितियों में जांचा गया। पहले चरण में लोगों को अलग-अलग कमरे में बैठना था। दूसरे चरण में एक ही कमरे में बैठना था, लेकिन एक-दूसरे से दूर। तीसरे चरण में लोगों को एक साथ बैठना था और एक-दूसरे का हाथ थामने की भी अनुमति थी। इस दौरान लोगों के ब्रेन वेव के आदान-प्रदान की प्रक्रिया को वैज्ञानिकों ने इलेक्ट्रोइन्सेफेलोग्रापी (ईईजी) का नाम दिया। इस टेस्ट के बाद पाया गया कि हाथ थामकर बैठने से लोगों की मानसिक स्थिति बेहतर होती है और दर्द का अहसास कम होता है।





दर्द का अहसास कम होने की इस प्रक्रिया को ब्रेन-टू-ब्रेन कपलिंग का नाम दिया गया।

शोधकर्ताओं ने बताया कि- ‘दर्द में दिमाग से अल्फा म्यू बैंड तरंगें निकलती हैं। जब दो लोगों की ये तरंगें आपस में टकराती हैं, तो दोनों की ऊर्जा का ट्रांसफर होता है। जब उनमें से एक व्यक्ति दर्द में हो, तो उसके दिमाग का नेगेटिव अल्फा म्यू बैंड, दूसरे व्यक्ति के दिमाग के पॉजीटिव अल्फा म्यू बैंड से संतुलित होता है। इसी वजह से पहले व्यक्ति को दर्द का अनुभव कम होता है। ये भाव महिला-पुरुष में सबसे ज्यादा देखा जाता है।’

वैज्ञानिकों का शोध- हाथ पकड़ने से दुख का अहसास कम क्यों होता है

रिसर्चर ने कहा- हम मॉडर्न कम्युनिकेशन के दौर में फिजिकल कम्युनिकेशन को भूलते जा रहे हैं

रिसर्च टीम को लीड करने वाले प्रोफेसर पैवेल गोल्डस्टीन कहते हैं कि- "हम मॉडर्न कम्युनिकेशन के दौर में रह रहे हैं। हमसे दूर बैठे लोगों से भी जुड़ने के हमारे पास तमाम माध्यम हैं। जैसे कि फोन, सोशल मीडिया वगैरह। लेकिन इस मॉडर्न कम्युनिकेशन के दौर में हम फिजिकल कम्युनिकेशन को भूल रहे हैं। ऐसे में हमारा ये शोध इस बात को साबित करता है कि हमें इंटरपर्सनल कम्युनिकेशन (दो लोगों के बीच का संवाद) बढ़ाने की काफी जरूरत है।' इस अध्ययन को पीएनएएस नाम के साइंस जर्नल में प्रकाशित किया गया है।