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राजस्थान में ही तीन साल में गॉल ब्लेडर कैंसर के 1395 केस

राजस्थान सहित पड़ोसी पांच राज्यों के लिए यह खबर चौंकाने वाली है। विश्व में चिली के बाद उत्तर भारत में गॉल ब्लेडर...

Dainik Bhaskar

Apr 02, 2018, 05:05 AM IST
राजस्थान सहित पड़ोसी पांच राज्यों के लिए यह खबर चौंकाने वाली है। विश्व में चिली के बाद उत्तर भारत में गॉल ब्लेडर कैंसर के मरीज सबसे अधिक बढ़ रहे हैं। राजस्थान के दो बड़े कैंसर अस्पतालों के आंकड़े भी इसकी पुष्टि कर रहे हैं। इन अस्पतालों में पिछले तीन साल में गॉल ब्लेडर कैंसर पीड़ित 1714 मरीज सामने आ चुके हैं।

इनमें राजस्थान के ही 1395 मरीज हैं। जबकि अन्य मरीज दिल्ली, उत्तरप्रदेश, पंजाब, हरियाणा और मध्यप्रदेश राज्यों से इलाज के लिए यहां आ रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह भी है कि इन गॉल ब्लेडर कैंसर केस में 73 फीसदी महिलाएं हैं। डॉक्टर्स के मुताबिक ब्रेस्ट कैंसर के बाद महिलाओं में यह तेजी से बढ़ने वाला कैंसर है। हालांकि रिसर्च में इसकी कोई बड़ी वजह सामने नहीं आई है, लेकिन डॉक्टर्स का मानना है कि इसकी दो बड़ी वजह में पेस्टिसाइड और जेनेटिक ही हैं। एसएमएस अस्पताल में पिछले तीन सालों में 577 केस गॉल ब्लेडर कैंसर के आ चुके हैं। राजधानी जयपुर में भी इस बीमारी के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। आंकड़ों पर जाएं तो जयपुर जिले के ही 497 पीड़ित इन दो अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं।

इन जिलों से हैं सबसे ज्यादा मरीज

अलवर 44

अजमेर 69

भरतपुर 102

दौसा 77

धौलपुर 39

झुंझुनूं 63

करौली 47

सीकर 70


3 सालों में कहां के कितने मरीज

राजस्थान में देशभर से मरीज आए हैं। एसएमएस अस्पताल और भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल में वर्ष 2015, 2016 और 2017 में गॉल ब्लेडर कैंसर के 1714 मरीज सामने आ चुके हैं। इनमें राजस्थान के ही 1395 केस हैं। इसके अलावा उत्तरप्रदेश के 147, हरियाणा के 98, मध्यप्रदेश के 36 केस का राजस्थान के दो अस्पतालों में इलाज चल रहा है। इन राज्यों के अलावा बिहार, वेस्ट बंगाल, दिल्ली, महाराष्ट्र, पंजाब और उत्तराखंड के गॉल ब्लेडर कैंसर पीड़ितों ने भी राजस्थान में इलाज कराया है। इन दो अस्पतालों के अलावा अन्य अस्पतालों के पास कैंसर मरीजों का डेटा उपलब्ध नहीं है। जानकारी के अनुसार यदि अन्य अस्पतालों का डेटा उपलब्ध हो तो संख्या काफी अधिक होना तय है।

चिली के बाद उत्तर भारत में गॉल ब्लेडर कैंसर के सर्वाधिक कैंसर मरीज सामने अा रहे हैं। उनमें भी इंडियन काफी हैं। बीमारी की वजह जेनेटिक के साथ ही पेस्टीसाइड व खराब वातावरण भी हैं। अब रिसर्च जरूरी है कि आखिर नार्थ इंडियन में यह बीमारी क्यों बढ़ रही है। काफी कम मरीज हैं।

-डॉ. संदीप जसूजा, हैड ऑफ डिपार्टमेंट, मेडिकल ओंकोलॉजी, एसएमएस

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