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पुराने नियमों के आधार पर आवेदन की छूट

Pali News - नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट-2018 (नीट) के आवेदन को लेकर असमंजस में चल रहे हजारों स्टूडेंट्स के लिए राहत भरी...

Dainik Bhaskar

Mar 04, 2018, 04:00 AM IST
पुराने नियमों के आधार पर आवेदन की छूट
नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट-2018 (नीट) के आवेदन को लेकर असमंजस में चल रहे हजारों स्टूडेंट्स के लिए राहत भरी खबर है। दिल्ली हाईकोर्ट ने सीबीएसई द्वारा जारी किए गए नीट-2018 के नोटिफिकेशन पर स्टे लगाते हुए पुराने नियमों के आधार पर ही विद्यार्थियों को परीक्षा के लिए आवेदन करने की छूट दे दी है। 6 मई को होने वाली परीक्षा के लिए बोर्ड ने इस बार स्टूडेंट्स की योग्यता और एज लिमिट में बदलाव किए थे। आवेदन करने की अंतिम तिथि 9 मार्च है। मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल को होगी। सीबीएसई द्वारा अपात्र घोषित किए गए स्टूडेंट्स को दिल्ली हाईकोर्ट ने परीक्षा आवेदन करवाने के लिए सीबीएसई एवं एमसीआई को आदेशित किया है। दिल्ली हाईकोर्ट के कोर्ट नंबर 6 में जस्टिस संजीव खन्ना एवं जस्टिस चंद्रशेखर की बेंच ने रिट पिटिशन नंबर 1970/2018 सौरभ सिंह एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य पर यह आदेश दिया। याचिकाकर्ता द्वारा नीट-2018 में परीक्षा आवेदन के लिए अयोग्य घोषित किए गए स्टूडेंट्स के विभिन्न बिंदुओं को लेकर 27 फरवरी को याचिका दाखिल की गई थी। इस पर न्यायालय ने 28 फरवरी को सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं की याचिका को स्वीकार करते हुए तथा विद्यार्थियों के शैक्षणिक सत्र एवं उनके भविष्य को दृष्टिगत रखते हुए स्टूडेंट्स के पक्ष में आदेश दिया। याचिकाकर्ता के वकील अर्चना पाठक दवे, मनीष शर्मा व प्रकाश झा ने बताया कि आदेश के तहत न्यायालय ने अंतरिम आदेश पास करते हुए प्रतिपक्षीगणों को यह आदेश दिया कि उपरोक्त आधार पर किसी भी स्टूडेंट को उसके नीट के परीक्षा आवेदन पत्र भरने से नहीं रोका जाए।

नीट नोटिफिकेशन पर दिल्ली हाईकोर्ट का स्टे, हजारों छात्रों को राहत

यह है मामला

सीबीएसई ने नीट का नोटिफिकेशन जारी करते हुए एमसीआई की अनुशंसा के तहत इस साल 25 साल से अधिक उम्र के स्टूडेंट्स, ओपन स्कूलिंग के छात्रों, एडिशनल बॉयोलाजी लेकर 12वीं करने वालों, लगातार 11वीं व 12वीं पास नहीं करने वाले प्राइवेट स्टूडेंट्स को एग्जाम से बाहर कर दिया था। इससे पहले चिकित्सा एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से ओपन स्कूलिंग के छात्रों को बाहर नहीं करने की सलाह को दरकिनार कर दिया। इसके बाद छात्रों ने पहले सुप्रीम कोर्ट और इसके बाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

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