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खेतावास में ठोस कचरा निस्तारण प्लांट लगाने को लेकर हुई जनसुनवाई

खेतावास के निकट ठोस अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्र की पर्यावरणीय स्वीकृति को लेकर बुधवार को एडीएम भागीरथ विश्नोई, नगर...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 01, 2018, 05:45 AM IST

खेतावास के निकट ठोस अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्र की पर्यावरणीय स्वीकृति को लेकर बुधवार को एडीएम भागीरथ विश्नोई, नगर परिषद चेयरमैन महेंद्र बोहरा व पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के आरओ राजीव पारीक की मौजूदगी में जनसुनवाई हुई। जनसुनवाई में संयंत्र स्थापित करने वाली दिल्ली की रोल्ज मेटेरियल हैंडलिंग सिस्टम के अधिकारियों ने संयंत्र से मिलने वाले फायदों और पर्यावरण अन्य सुरक्षा के बारे में जानकारी दी। सुनवाई के दौरान कई जनप्रतिनिधियों ने सुझाव भी दिए। बैठक में किसान पर्यावरण संघर्ष समिति के सचिव महावीरसिंह सुकरलाई ने जनसुनवाई को लेकर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि संयंत्र लगाने के लिए 10 किमी की परिधि के कुल 21 गांवों को भी शामिल किया गया है, लेकिन इन गांवों से कोई भी ग्रामीण मौजूद नहीं है। जनसुनवाई में केवल पाली शहर के चुनिंदा लोग ही हैं। इसके अलावा उन्होंने संयंत्र लगाने से पहले संबंधित कंपनी से पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर कई सवाल भी किए। जनसुनवाई में नगर परिषद वित्त समिति अध्यक्ष तिलोकराम चौधरी व भाजपा शिवाजी मंडल अध्यक्ष रामकिशोर साबु समेत कई जनों ने प्रश्न पूछे, जिनका कंपनी के अधिकारियों ने उत्तर दिए। जनसुनवाई में नगर परिषद आयुक्त इंद्रसिंह राठौड़,एक्सईएन केपी व्यास, जेईएन योगेश प्रजापत, कंपनी के एचओडी रूपेश शर्मा, डिप्टी मैनेजर प्रेमपाल सिंह, सीनियर इंजीनियर योगेश, इंजीनियर सुनील लांबा समेत कई जने मौजूद थे।

12.62 करोड़ की लागत से बनेगा कचरा निस्तारण प्लांट, जैविक खाद मिलने के साथ बॉयलर चलाने के लिए मिलेगा कच्चा ईंधन

जनसुनवाई में संयंत्र स्थापित करने वाली दिल्ली की रोल्ज मेटेरियल हैंडलिंग सिस्टम के अधिकारियों ने फायदों की दी जानकारी

प्रतिव्यक्ति के हिसाब से उठाएंगे कचरा

कंपनी अपशिष्ठ उत्पादन छोटे कस्बों में 200 से 300 ग्राम व बड़े शहरों में 600 ग्राम प्रति व्यक्ति प्रतिदिन के हिसाब से लिया जाएगा। नगर परिषद के प्रत्येक वार्ड के घर-घर एवं कच्ची बस्ती से कचरा लेंगे। नगर परिषद द्वारा संग्रहित कचरा पेटी, अपशिष्ट संग्रहण डिपो से प्लांट तक पहुंचाया जाएगा।

10 किमी के दायरे के 21 गांवों से होगा कचरा संग्रहण

खेतावास के निकट बनने वाले संयंत्र में कंपनी के एचओडी शर्मा ने बताया कि सामाजिक व आर्थिक पर्यावरण के लिए 10 किमी के दायरे में 21 गांवों को शामिल किया गया है। इन 21 गांवों में कुल 47 हजार 506 मकान हैं और कुल 2 लाख 48 हजार 96 लोग हैं।

संयंत्र लगाने के बाद आने वाली समस्याएं और उनके समाधान

वायु प्रदूषण : निर्माण के दौरान हवा की गुणवत्ता पर प्रभाव कम से कम होगा। यूनिट में अभियांत्रिकी लैण्डफील के निकलने वाले धूल के कण व गैसें, वाहनों के आवागमन से निकलने वाले गैसें व धूल के कण और चिमनियों से गैस निकलेगी।

-उपाय : नियमित वाहनों और मशीनों का रखरखाव किया जाएगा। प्लांट के चारों पौधरोपण किया जाएगा। चिमनी की ऊंचाई वैधानिक मानकों के अनुसार रखी जाएगी। अभियांत्रिकी लैण्डफील्ड से निकलने वाले धूल के कणों काे नियंत्रित करने के लिए नियमित नमी रखी जाएगी। गैसों के प्रभाव को खत्म करने के लि गैस उत्सर्जन सिस्टम लगाया जाएगा।

ध्वनि प्रदूषण : वाहनों के आने-जाने और मशीनों की वजह से ध्वनि प्रदूषण का स्तर बढ़ेगा।

- उपाय : नियमित मशीनों का रखरखाव, श्रमिकों को ध्वनि रोधक यंत्र दिया जाएगा। प्लांट एरिया की सीमा पर पौधरोपण किया जाएगा। डीजी सेट को ध्वनि रोधक कवर से ढंका जाएगा।

जल प्रदूषण : प्लांट लगने के बाद बारिश के दिनों में भूमिगत एवं सतही जल की गुणवत्ता, अभियांत्रिकी लैण्डफीड एवं ठोस कचरा भण्डारण से दूषित होने की संभावना रहेगी।

- उपाय : भूमिगत व सतही जल की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए उचित उपाय किए जाएंगे। जल निकासी संग्रहण की व्यवस्था की जाएगी। अभियांत्रिकी लैण्डफील से दूषित जल को संग्रहित कर लिचैट ट्रीटमेंट प्लांट में उपचारित किया जाएगा। दूषित जल सैप्टिक टैंक में भी संग्रहित करेंगे।

प्लांट चालू होने से होंगे यह दो बड़े फायदे

पहला : शहर में जगह-जगह बने डंपिंग यार्ड नहीं बनेंगे। शहर से उठाए जाने वाला कचरा सीधा प्लांट तक पहुंचेगा। खुले में कचरा भी नहीं पड़ा रहेगा।

दूसरा : प्लांट पर पहुंचने वाले ठोस कचरे से जैविक खाद व रिफ्यूज्ड ड्राइड फ्यूल का उत्पादन होगा। इससे क्षेत्र की खाद की आपूर्ति होगा। साथ ही बॉयलर प्लांट या समान कारखानों को कच्चा ईंधन मिलेगा

ऐसे बनेगा प्लांट

12.62 करोड़ की होगी लागत

52,500 वर्गमीटर (5.25 हैक्टेयर) में बनेगा

27 श्रमिक करेंगे काम

200 किलोवॉट की बिजली खपत

जैविक खाद व रिफ्यूज्ड ड्राइव्ड फ्यूल बनाएंगे।

जनसुनवाई में प्लांट की जमीन को लेकर भी जताई आपत्ति

जनसुनवाई में सुकरलाई ने खेतावास के निकट पूर्व में बने प्लांट और वर्तमान में बनने वाले प्लांट की जमीन को लेकर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि जिस जगह पर संयंत्र स्थापित हो रहा है वह गोचर भूमि है जो कि नियमानुसार बिना किस्म परिवर्तन के आवंटित नहीं की जा सकती हैं।

इसके साथ ही आवंटन से पहले विधि सम्मत गोचर भूमि चारागाह विकसित कर छोड़ी जानी चाहिए।



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Web Title: खेतावास में ठोस कचरा निस्तारण प्लांट लगाने को लेकर हुई जनसुनवाई
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