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हर दिन 2 लाख मीटर कपड़े की छपाई से 20 हजार परिवारों के जीवन में भरता है सतरंगी उल्लास

20 हजार से ज्यादा परिवारों के जीवन में उल्लास के रंग कपड़े से फैक्ट्रियों में कुल 20 हजार से अधिक लोग कार्यरत...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 05:50 AM IST
20 हजार से ज्यादा परिवारों के जीवन में उल्लास के रंग कपड़े से

फैक्ट्रियों में कुल 20 हजार से अधिक लोग कार्यरत हैं। यानी हर 5 वें घर से एक आदमी इस इस उद्योग से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ा है। यही रुपया शहर के बाजार में घूमता है। इससे पूरे बाजार में खुशियों के रंग निखरते हैं।

कपड़ों पर बिखरे इन चटख रंगों से देशभर में खिलता है पाली

मारवाड़ी आन-बान व शान के प्रतीक साफे से लेकर सलवार सूट और साड़ियों की देश में मांग

पाली का पॉपलीन हो या अन्य कपड़ा। देशभर में ख्यात है। यहां मारवाड़ी-मेवाड़ी साफा हो या पंजाबी पगड़ी। अपने चटख रंगों के लिए ख्यात है। मार्केट में बनने वाली लूंगी की भारत सहित दुनियाभर में डिमांड है। उत्तर व दक्षिण भारत में तो यहां की साड़ियों से ही महिलाएं हर मांगलिक व धार्मिक कार्यक्रमों में सजती है। पंजाब, हरियाणा व उत्तरप्रदेश में यहां बनने वाले सूती सलवार सूट की मांग 12 महीने ही रहती है। बैडशीट, स्कार्फ व सूती टॉवेल भी देशभर में पाली का ब्रांड अपनी विशेष छवि रखता है।