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ई-वे बिल लागू होने के पहले ही दिन ठप रही वेबसाइट, व्यापारियों को दिनभर होना परेशान

जीएसटी लागू होने के बाद 1 फरवरी से सरकार ने ई-वे बिल का सिस्टम शुरू करने के पहले दिन वेबसाइट ठप रहने से ट्रांसपोर्टर...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 06:25 AM IST

जीएसटी लागू होने के बाद 1 फरवरी से सरकार ने ई-वे बिल का सिस्टम शुरू करने के पहले दिन वेबसाइट ठप रहने से ट्रांसपोर्टर समेत सभी व्यापारियों को दिनभर काफी होना पड़ा। अब व्यवसायी ई-वे बिल लागू करने की तिथि बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं, हालांकि इसे लेकर गुरुवार रात तक पसोपेश की स्थिति बनी रही। इधर, पहले ही दिन ऑनलाइन बिल सबमिट नहीं होने और बिल नहीं निकलने से व्यापारी पूरे दिन परेशान रहे। कई व्यापारियों के पास कंप्यूटर व इंटरनेट की सुविधा भी नहीं होने और रजिस्ट्रेशन नहीं करवाने पर भी उन्हें नुकसान भी उठाना पड़ा। ई-वे बिल लागू होने से शहर के व्यापार पर भी काफी असर पड़ा है। बड़े व्यापारी से लेकर ट्रांसपोर्ट कंपनियों को भी काफी नुकसान उठाना पड़ा।

प्रतिदिन 18 गाड़ियों में भरकर जाता है माल, पहले दिन गई मात्र 3-4 गाड़ियां

औद्योगिक नगरी पाली में सबसे ज्यादा ग्रे कपड़ा व तैयार माल शहर से कई बड़े शहरों में ट्रांसपोर्ट कंपनियों के माध्यम से भेजा जाता है। प्रतिदिन 17 से 18 गाड़ियां (प्रत्येक गाड़ी में 16 टन) माल भरकर बड़े शहरों में भेजी जाती है। वेबसाइट नहीं चलने से गुरुवार को मात्र 3 से 4 गाड़ियां ही गई हैं। इसके अलावा शहर में प्रतिदिन करोड़ों का लेन-देन करने वाले छोटे से बड़े व्यापारियों काम भी ठप रहा।

क्या है ई-वे बिल

ई वे बिल प्रणाली में 50 हजार रुपए से ज्यादा ज्यादा कीमत के सामान को राज्य में ही या राज्य के बाहर ले जाने के लिए पहले ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है। वहां से व्यवसायियों को ई-वे बिल मिलेगा। अधिकारी माल के परिवहन के दौरान रास्ते में कहीं भी इसकी जांच कर सकेंगे। इस तरह के सामान की ढुलाई के लिए अधिकतम 15 दिन का समय दिया जाएगा। यह समय इस आधार पर दिया जाएगा कि माल को कितनी दूरी तक ले जाना है। सौ किलोमीटर तक की दूरी के लिए एक दिन का समय मिलेगा। अगर सामान को 1000 किलोमीटर से ज्यादा दूर ले जाना है तो 15 दिन का समय दिया जाएगा। नियमों के मुताबिक कॉमन पोर्टल पर ई-वे बिल जनरेट होने के बाद सप्लायर माल पाने वाले और ट्रांसपोर्टर को एक अनूठा ई-वे बिल नंबर उपलब्ध कराया जाएगा। प्रारूप नियमों के अनुसार ट्रांसपोर्टर या माल ढुलाई करने वाले व्यक्ति को रसीद या सप्लाई बिल अथवा डिलीवरी चालान के साथ ही ई-वे बिल की कॉपी या इसका नंबर साथ में रखना होगा। इसे या तो बिल के रूप में रखा जाएगा या वाहन में रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन डिवाइस (आरएफआईडी) लगा होने पर इलेक्ट्रानिक मोड में रखना होगा।

ट्रांसपोर्ट कंपनियों को 4 से 5 लाख नुकसान हुआ

ई-वे बिल की वेबसाइट नहीं चलने और इसकी प्रणाली में असमंजस की स्थित होने से पूरा ट्रांसपोर्ट व्यवसाय ठप रहा। पाली में करीब 100 ट्रांसपोर्ट कंपनियां हैं। प्रतिदिन प्रत्येक ट्रांसपोर्ट कंपनी 5 से 7 हजार का व्यापार करते हैं। ई-वे बिल लागू होने के पहले दिन जहां 17 से 18 गाड़ियां भरकर माल जाता था, वहां सिर्फ 3 से 4 गाड़ियां ही भेजी गई हैं। कंपनियों को इससे 4 से 5 लाख का नुकसान हुआ है। - नंदकिशोर पारीक, ट्रांसपोर्ट व्यवसायी

सीबीईसी ने ट्विट कर ई-वे बिल प्रणाली की नई तिथि घोषित करने के जारी किए किए निर्देश

सीबीईसी ने सोशल वेबसाइट पर शाम को ट्विट कर वेबसाइट नहीं चलने की जानकारी दी। साथ ही ई-वे बिल की प्रणाली को भी लागू करने से रोका है। वैसे भी ई-वे बिल में अभी भी कई खामियां हैं। इस कारण कई व्यापारी भी असमंजस की स्थिति में है। सीबीईसी ने अभी तक नई तिथि घोषित नहीं की है। - सीए कौस्तुभ दवेरा, पाली

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