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एससी-एसटी एक्ट में कोई बदलाव नहीं, राजनीतिक विरोधी गुमराह कर रहे : गर्ग

जालोर | भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री जोगेश्वर गर्ग ने कहा कि केन्द्र सरकार ने किसी भी रूप से एससीएसटी एक्ट...

Danik Bhaskar | Apr 02, 2018, 03:10 AM IST
जालोर | भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री जोगेश्वर गर्ग ने कहा कि केन्द्र सरकार ने किसी भी रूप से एससीएसटी एक्ट में बदलाव नहीं किया है, ये तो सुप्रीम कोर्ट का निर्णय है जो केवल एक प्रकरण को लेकर किया गया है। वे रविवार शाम को डाक बंगले में पत्रकारों से रूबरू होते हुए भारतीय जनता पार्टी के प्रतिनिधि के रूप में अपना पक्ष रख रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकारी नौकर के विरुद्ध एससीएसटी एक्ट में एक मुकदमा था, जो बाद में सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि उसकी गिरफ्तारी तुरंत नहीं कर जांच करने के बाद गिरफ्तार किया जाए। इस निर्णय को लेकर अनुसूचित जाति व जनजाति समूह में राजनीतिक विरोधियों ने गुमराह करना शुरू कर दिया। जिसमें केन्द्र सरकार को दोषी के रूप में प्रसारित करना शुरू कर दिया, जबकि ये निर्णय केवल एक प्रकरण के लिए सुप्रीम कोर्ट का है। गर्ग ने कहा कि न तो एक्ट में बदलाव किया और न ही समाप्त किया गया है। ये गलत प्रचार कर एससीएसटी वर्ग के लोगों को गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मोदी सरकार ने तो एससीएसटी एक्ट को वर्ष 2015 में मजबूत किया है। पीडि़त व्यक्ति को पहले देरी से राशि मिलती थी, अब तत्काल मिलने का प्रावधान किया हुआ है। अब सुप्रीम कोर्ट के एक प्रकरण में इस निर्णय को लेकर भारत बंद करने की साजिश विरोधी राजनीतिक लोगों की ओर से की जा रही है, जो अनुसूचित जाति जनजाति के लोगों को गुमराह करते हुए इसका दुष्प्रचार कर रहे हैं। गर्ग ने बताया कि वे समाजबंधुओं से इस बारे में संपर्क भी कर रहे हैं और सूचित भी कर रहे हैं कि किसी भी रूप में इस अधिनियम में कोई संशोधन नहीं किया गया, जिस कारण भारत बंद करने जैसी कोई नौबत भी नहीं है।





उन्होंने बताया कि सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत से उनकी भी बात हुई है, उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार इस निर्णय के विरुद्ध भी रिव्यू पिटिशन दाखिल करने जा रही है।

जालोर. जोगेश्वर गर्ग।

जालोर | भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री जोगेश्वर गर्ग ने कहा कि केन्द्र सरकार ने किसी भी रूप से एससीएसटी एक्ट में बदलाव नहीं किया है, ये तो सुप्रीम कोर्ट का निर्णय है जो केवल एक प्रकरण को लेकर किया गया है। वे रविवार शाम को डाक बंगले में पत्रकारों से रूबरू होते हुए भारतीय जनता पार्टी के प्रतिनिधि के रूप में अपना पक्ष रख रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकारी नौकर के विरुद्ध एससीएसटी एक्ट में एक मुकदमा था, जो बाद में सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि उसकी गिरफ्तारी तुरंत नहीं कर जांच करने के बाद गिरफ्तार किया जाए। इस निर्णय को लेकर अनुसूचित जाति व जनजाति समूह में राजनीतिक विरोधियों ने गुमराह करना शुरू कर दिया। जिसमें केन्द्र सरकार को दोषी के रूप में प्रसारित करना शुरू कर दिया, जबकि ये निर्णय केवल एक प्रकरण के लिए सुप्रीम कोर्ट का है। गर्ग ने कहा कि न तो एक्ट में बदलाव किया और न ही समाप्त किया गया है। ये गलत प्रचार कर एससीएसटी वर्ग के लोगों को गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मोदी सरकार ने तो एससीएसटी एक्ट को वर्ष 2015 में मजबूत किया है। पीडि़त व्यक्ति को पहले देरी से राशि मिलती थी, अब तत्काल मिलने का प्रावधान किया हुआ है। अब सुप्रीम कोर्ट के एक प्रकरण में इस निर्णय को लेकर भारत बंद करने की साजिश विरोधी राजनीतिक लोगों की ओर से की जा रही है, जो अनुसूचित जाति जनजाति के लोगों को गुमराह करते हुए इसका दुष्प्रचार कर रहे हैं। गर्ग ने बताया कि वे समाजबंधुओं से इस बारे में संपर्क भी कर रहे हैं और सूचित भी कर रहे हैं कि किसी भी रूप में इस अधिनियम में कोई संशोधन नहीं किया गया, जिस कारण भारत बंद करने जैसी कोई नौबत भी नहीं है।





उन्होंने बताया कि सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत से उनकी भी बात हुई है, उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार इस निर्णय के विरुद्ध भी रिव्यू पिटिशन दाखिल करने जा रही है।