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रेलवे बोर्ड का फरमान- सच बोलें, नहीं छुपाएं सिस्टम से जुड़ी बातें

रेलवे में छोटी-बड़ी घटनाओं को छिपाना आदत बन गई है। इसे देखते हुए रेलवे बोर्ड ने निर्देश दिए हैं कि भविष्य में रेल...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 04:10 AM IST

रेलवे बोर्ड का फरमान- सच बोलें, नहीं छुपाएं सिस्टम से जुड़ी बातें
रेलवे में छोटी-बड़ी घटनाओं को छिपाना आदत बन गई है। इसे देखते हुए रेलवे बोर्ड ने निर्देश दिए हैं कि भविष्य में रेल अधिकारी और कर्मचारी सिस्टम से जुड़ी छोटी-बड़ी बातें छिपाएं नहीं बल्कि सच बताएं। बोर्ड ने सभी जोनल रेलवेज के महाप्रबंधक से कहा है कि ट्रेन के समय और ट्रैक के क्षतिग्रस्त होने जैसी घटनाओं को छिपाने की जगह समय पर बताएं ताकि उन्हें दुरुस्त किया जा सके। इसके लिए बोर्ड ने जोन व डिवीजन की परफॉर्मेंस रिव्यू में इस तरह के आंकड़ों व घटनाओं को आधार नहीं मानने की भी छूट प्रदान की है।

इसलिए जारी किए निर्देश

रेलवे में कहां, किस स्तर पर क्या गड़बड़ी हुई है, इसे कई बार अफसर और कर्मचारी कार्रवाई के भय से छुपा लेते हैं। दुर्घटनाएं और ट्रेनों के समय संचालन को पिछले वर्ष से सही दिखाने के लिए इस तरह की घटनाओं को छिपा लिया जाता है। इसी के मद्देनजर बोर्ड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर विकास आर्य ने सभी जोनल रेलवे के जीएम से कहा है कि वे छोटी-छोटी घटनाओं को सामने लाएं। इसके लिए वर्ष 2018-19 को जीरो ईयर घोषित किया गया है। अब ऐसी घटनाओं की बीते वर्ष से तुलना को परफॉर्मेंस में शामिल नहीं किया जाएगा। बोर्ड का मानना है कि जब तक सिस्टम में खामी, मानव जनित लापरवाही को लेकर सच्चाई सामने नहीं आएगी, तब तक सिस्टम में सुधार के सारे प्रयास किसी काम के नहीं रहेंगे।

प्लेटफार्म पर हादसे मीडिया से मिली खबर

1. 30 मार्च को शहर के गांधीनगर स्टेशन पर एक बुजुर्ग ट्रेन और प्लेटफार्म के बीच आ गया। सुबह हुए इस दर्दनाक हादसे की खबर रेल प्रशासन को शाम तक नहीं लगी। कारण, स्टेशन से सूचना नहीं दी गई। हालांकि, सोशल मीडिया पर यह खबर पूरे देश में वायरल हो गई।

2. पिछले दिनों जोधपुर मंडल के ओढानियां चाचा एवं आशापुरा गोमट स्टेशन के बीच ढलान पर मालगाड़ी का इंजन फेल हो गया। ड्राइवर अौर सहायक नीचे उतरे तभी ट्रेन पीछे की लुढ़कने लगी। करीब चार किलोमीटर तक ट्रेन बिना ड्राइवर के दौड़ी। स्थानीय प्रशासन ने उच्च अधिकारियों की इसकी जानकारी ही नहीं दी। मामला मीडिया में उजागर हुआ तब जांच शुरू हुई।

शिवांग चतुर्वेदी| जयपुर

रेलवे में छोटी-बड़ी घटनाओं को छिपाना आदत बन गई है। इसे देखते हुए रेलवे बोर्ड ने निर्देश दिए हैं कि भविष्य में रेल अधिकारी और कर्मचारी सिस्टम से जुड़ी छोटी-बड़ी बातें छिपाएं नहीं बल्कि सच बताएं। बोर्ड ने सभी जोनल रेलवेज के महाप्रबंधक से कहा है कि ट्रेन के समय और ट्रैक के क्षतिग्रस्त होने जैसी घटनाओं को छिपाने की जगह समय पर बताएं ताकि उन्हें दुरुस्त किया जा सके। इसके लिए बोर्ड ने जोन व डिवीजन की परफॉर्मेंस रिव्यू में इस तरह के आंकड़ों व घटनाओं को आधार नहीं मानने की भी छूट प्रदान की है।

इसलिए जारी किए निर्देश

रेलवे में कहां, किस स्तर पर क्या गड़बड़ी हुई है, इसे कई बार अफसर और कर्मचारी कार्रवाई के भय से छुपा लेते हैं। दुर्घटनाएं और ट्रेनों के समय संचालन को पिछले वर्ष से सही दिखाने के लिए इस तरह की घटनाओं को छिपा लिया जाता है। इसी के मद्देनजर बोर्ड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर विकास आर्य ने सभी जोनल रेलवे के जीएम से कहा है कि वे छोटी-छोटी घटनाओं को सामने लाएं। इसके लिए वर्ष 2018-19 को जीरो ईयर घोषित किया गया है। अब ऐसी घटनाओं की बीते वर्ष से तुलना को परफॉर्मेंस में शामिल नहीं किया जाएगा। बोर्ड का मानना है कि जब तक सिस्टम में खामी, मानव जनित लापरवाही को लेकर सच्चाई सामने नहीं आएगी, तब तक सिस्टम में सुधार के सारे प्रयास किसी काम के नहीं रहेंगे।

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