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एक माह में स्वाइन से चौथी मौत, रेड अलर्ट के बाद पहुंची सेंट्रल टीम, स्कूलों व बस स्टैंड पर भी मरीजों की होगी स्क्रीनिंग

बर क्षेत्र के खानपुर में स्वाइन फ्लू के मरीज की मौत के बाद सर्वे के लिए पहुंची मेडीकल टीम ने भी काफी सतर्कता बरती।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 03:10 AM IST

बर क्षेत्र के खानपुर में स्वाइन फ्लू के मरीज की मौत के बाद सर्वे के लिए पहुंची मेडीकल टीम ने भी काफी सतर्कता बरती। टीम में शािमल नर्सेज ने मास्क के साथ स्कार्फ भी पहन रखा था तो ग्रामीण महिलाओं को भी नर्सेज ने पर्दा करवा दिया।

अजमेर के अस्पताल में हुई बर निवासी श्रमिक की मौत, ब्यावर अस्पताल में भर्ती उसकी प|ी भी संदिग्ध, शव को घर नहीं लाकर सीधे ले गए कब्रिस्तान

भास्कर संवाददाता | पाली

जिले में पिछले एक महीने में 14 स्वाइन फ्लू के मरीज सामने आ चुके हैं। वहीं बुधवार को अजमेर अस्पताल में पिछले तीन दिन से भर्ती बर निवासी मरीज की मौत हो गई। उसका शव बर में उसके निवास स्थान पर लाने के बजाय सीधे कब्रिस्तान ले जाया गया। इस दौरान स्क्रीनिंग करने पहुंची चिकित्सकों की टीम ने मृतक की प|ी को भी संदिग्ध माना है। जिले में एक महीने में स्वाइन से यह चौथी मौत है। मौतों के मामले में पाली तीसरे प्रदेश में तीसरे स्थान पर है।

इधर, जिले में स्वाइन फ्लू के हालात का जायजा लेने पहुंची अधिकारियों की टीम ने सैंपलिंग बढ़ाने और बी कैटेगरी के मरीजों की भी जांच कराने के निर्देश दिए हैं। जानकारी के अनुसार बर क्षेत्र के खानपुर मियामगरी में रहने वाले श्रमिक को तेज बुखार व सर्दी-जुकाम की शिकायत होने पर अजमेर जेएलएन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मरीज का तीन दिन से इलाज चल रहा था। उसे जांच में स्वाइन पॉजीटिव माना गया था। बुधवार को उसकी तबीयत बिगड़ गई और उसने दम तोड़ दिया। इसके बाद परिजनों की ओर से शव को बर उसके निवास स्थान न ले जाकर सीधे कब्रिस्तान ले जाया गया, जहां शव को दफना दिया गया। मौत की सूचना मिलते ही चिकित्सा विभाग भी हरकत में आ गया और रायपुर बीसीएमओ डॉ. सुरेश कुमार यादव के निर्देश पर बर चिकित्सा प्रभारी डॉ. राम अवतार साहू के नेतृत्व में टीम का गठन कर क्षेत्र में सर्वे करवाया गया। चिकित्सकों ने बताया कि सर्वे करने गई टीम के अनुसार मृतका की प|ी को भी स्वाइन फ्लू का संदिग्ध माना है। वह दो दिन से ब्यावर अस्‍पताल में भर्ती थी। परिजनों से पूछताछ करने पर जानकारी मिली की उसे भी तेज बुखार व सर्दी-जुकाम की शिकायत थी। टीम ने संदिग्ध महिला के सैंपल लेकर जांच के लिए भिजवा दिए हैं।

बी कैटेगरी यानी सामान्य से तेज बुखार-जुकाम के मरीजों के सैंपल लेंगे : अब तक केवल सी-कैटेगरी यानि तेज बुखार, सर्दी-जुकाम और तेज गले दर्द के मरीज को ही स्वाइन फ्लू का संदिग्ध मान उसकी जांच की जाती थी। लेकिन अब बी-कैटेगरी यानि जिसे सामान्य से थोड़ा ज्यादा भी बुखार व सर्दी जुकाम है उसकी सैंपलिंग होगी।

राज्य सरकार के निर्देश पर जयपुर से आई सेंट्रल टीम ने स्वाइन की जांच के लिए स्क्रीनिंग का दायरा बढ़ाने के आदेश दिए, स्कूलों, बस स्टैंड व सार्वजनिक स्थानों पर भी होगी जांच, सामान्य से तेज बुखार व जुकाम के मरीजों की भी होगी सैंपलिंग

स्वाइन की ऐसी दहशत... चिकित्साकर्मियों ने मास्क के ऊपर भी लपेटा स्कार्फ

हालात का पता लगाने सेंट्रल टीम पहुंची उन स्थानों पर जहां से स्वाइन के पॉजीटिव व संदिग्ध मरीज मिले

जिले में स्वाइन फ्लू के बढ़ रहे संक्रमण को रोकने, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों की समीक्षा के लिए बुधवार को अतिरिक्त निदेशक एवं स्वाइन फ्लू नियंत्रण के प्रदेश नोडल अधिकारी डॉ. एस एन धौलपुरिया व विशेषज्ञ डॉ. ज्योति गुप्ता पाली पहुंचे। उन्होंने सीएमएचओ डॉ. एसएस शेखावत व अन्य चिकित्सा अधिकारियों की बैठक ली। शहर के जिन इलाकों से स्वाइन फ्लू के मरीज सामने आए थे उन क्षेत्रों का भी निरीक्षण किया और लोगों से बातचीत भी की।

अजमेर के अस्पताल में हुई बर निवासी श्रमिक की मौत, ब्यावर अस्पताल में भर्ती उसकी प|ी भी संदिग्ध, शव को घर नहीं लाकर सीधे ले गए कब्रिस्तान

भास्कर संवाददाता | पाली

जिले में पिछले एक महीने में 14 स्वाइन फ्लू के मरीज सामने आ चुके हैं। वहीं बुधवार को अजमेर अस्पताल में पिछले तीन दिन से भर्ती बर निवासी मरीज की मौत हो गई। उसका शव बर में उसके निवास स्थान पर लाने के बजाय सीधे कब्रिस्तान ले जाया गया। इस दौरान स्क्रीनिंग करने पहुंची चिकित्सकों की टीम ने मृतक की प|ी को भी संदिग्ध माना है। जिले में एक महीने में स्वाइन से यह चौथी मौत है। मौतों के मामले में पाली तीसरे प्रदेश में तीसरे स्थान पर है।

इधर, जिले में स्वाइन फ्लू के हालात का जायजा लेने पहुंची अधिकारियों की टीम ने सैंपलिंग बढ़ाने और बी कैटेगरी के मरीजों की भी जांच कराने के निर्देश दिए हैं। जानकारी के अनुसार बर क्षेत्र के खानपुर मियामगरी में रहने वाले श्रमिक को तेज बुखार व सर्दी-जुकाम की शिकायत होने पर अजमेर जेएलएन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मरीज का तीन दिन से इलाज चल रहा था। उसे जांच में स्वाइन पॉजीटिव माना गया था। बुधवार को उसकी तबीयत बिगड़ गई और उसने दम तोड़ दिया। इसके बाद परिजनों की ओर से शव को बर उसके निवास स्थान न ले जाकर सीधे कब्रिस्तान ले जाया गया, जहां शव को दफना दिया गया। मौत की सूचना मिलते ही चिकित्सा विभाग भी हरकत में आ गया और रायपुर बीसीएमओ डॉ. सुरेश कुमार यादव के निर्देश पर बर चिकित्सा प्रभारी डॉ. राम अवतार साहू के नेतृत्व में टीम का गठन कर क्षेत्र में सर्वे करवाया गया। चिकित्सकों ने बताया कि सर्वे करने गई टीम के अनुसार मृतका की प|ी को भी स्वाइन फ्लू का संदिग्ध माना है। वह दो दिन से ब्यावर अस्‍पताल में भर्ती थी। परिजनों से पूछताछ करने पर जानकारी मिली की उसे भी तेज बुखार व सर्दी-जुकाम की शिकायत थी। टीम ने संदिग्ध महिला के सैंपल लेकर जांच के लिए भिजवा दिए हैं।

बी कैटेगरी यानी सामान्य से तेज बुखार-जुकाम के मरीजों के सैंपल लेंगे : अब तक केवल सी-कैटेगरी यानि तेज बुखार, सर्दी-जुकाम और तेज गले दर्द के मरीज को ही स्वाइन फ्लू का संदिग्ध मान उसकी जांच की जाती थी। लेकिन अब बी-कैटेगरी यानि जिसे सामान्य से थोड़ा ज्यादा भी बुखार व सर्दी जुकाम है उसकी सैंपलिंग होगी।

अजमेर के अस्पताल में हुई बर निवासी श्रमिक की मौत, ब्यावर अस्पताल में भर्ती उसकी प|ी भी संदिग्ध, शव को घर नहीं लाकर सीधे ले गए कब्रिस्तान

भास्कर संवाददाता | पाली

जिले में पिछले एक महीने में 14 स्वाइन फ्लू के मरीज सामने आ चुके हैं। वहीं बुधवार को अजमेर अस्पताल में पिछले तीन दिन से भर्ती बर निवासी मरीज की मौत हो गई। उसका शव बर में उसके निवास स्थान पर लाने के बजाय सीधे कब्रिस्तान ले जाया गया। इस दौरान स्क्रीनिंग करने पहुंची चिकित्सकों की टीम ने मृतक की प|ी को भी संदिग्ध माना है। जिले में एक महीने में स्वाइन से यह चौथी मौत है। मौतों के मामले में पाली तीसरे प्रदेश में तीसरे स्थान पर है।

इधर, जिले में स्वाइन फ्लू के हालात का जायजा लेने पहुंची अधिकारियों की टीम ने सैंपलिंग बढ़ाने और बी कैटेगरी के मरीजों की भी जांच कराने के निर्देश दिए हैं। जानकारी के अनुसार बर क्षेत्र के खानपुर मियामगरी में रहने वाले श्रमिक को तेज बुखार व सर्दी-जुकाम की शिकायत होने पर अजमेर जेएलएन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मरीज का तीन दिन से इलाज चल रहा था। उसे जांच में स्वाइन पॉजीटिव माना गया था। बुधवार को उसकी तबीयत बिगड़ गई और उसने दम तोड़ दिया। इसके बाद परिजनों की ओर से शव को बर उसके निवास स्थान न ले जाकर सीधे कब्रिस्तान ले जाया गया, जहां शव को दफना दिया गया। मौत की सूचना मिलते ही चिकित्सा विभाग भी हरकत में आ गया और रायपुर बीसीएमओ डॉ. सुरेश कुमार यादव के निर्देश पर बर चिकित्सा प्रभारी डॉ. राम अवतार साहू के नेतृत्व में टीम का गठन कर क्षेत्र में सर्वे करवाया गया। चिकित्सकों ने बताया कि सर्वे करने गई टीम के अनुसार मृतका की प|ी को भी स्वाइन फ्लू का संदिग्ध माना है। वह दो दिन से ब्यावर अस्‍पताल में भर्ती थी। परिजनों से पूछताछ करने पर जानकारी मिली की उसे भी तेज बुखार व सर्दी-जुकाम की शिकायत थी। टीम ने संदिग्ध महिला के सैंपल लेकर जांच के लिए भिजवा दिए हैं।

बी कैटेगरी यानी सामान्य से तेज बुखार-जुकाम के मरीजों के सैंपल लेंगे : अब तक केवल सी-कैटेगरी यानि तेज बुखार, सर्दी-जुकाम और तेज गले दर्द के मरीज को ही स्वाइन फ्लू का संदिग्ध मान उसकी जांच की जाती थी। लेकिन अब बी-कैटेगरी यानि जिसे सामान्य से थोड़ा ज्यादा भी बुखार व सर्दी जुकाम है उसकी सैंपलिंग होगी।

जनवरी में 60 सैंपल ही लिए जिनमें 14 पॉजीटिव

सैंपल की जांच 60

पॉजिटीव 14

मौतें 4

इधर, प्रदेश में

कुल सैंपल जांच 5,945

पॉजीटिव 675

मौतें 46

पीपीपी मोड पर चलने वाली लैब में जांचें बंद

जिले या फिर दूसरे शहरों में जहां भी स्वाइन फ्लू की जांच निजी लैब की ओर से की जा रही है उनकी मॉनिटरिंग करने और रिपोर्ट सीएमएचओ व बांगड़ अस्पताल में भिजवाने के लिए निर्देशित किया है। इसके साथ ही पाली और सोजत अस्पताल में पीपीपी मोड पर संचालित हो रही लैब के कर्मचारियों को उपकरण व सुविधा पूरी नहीं होने पर स्वाइन फ्लू की जांच नहीं करने के लिए पाबंद किया है।

जिले के बिगड़ते हालात

जिले में एक महीने से स्वाइन फ्लू को लेकर हालात बिगड़ते जा रहे हैं। हालात यह है कि हर दिन 2 स्वाइन फ्लू के मरीज की जांच हो रही है। वहीं अब तक 4 मौतें हो चुकी हैं जो प्रदेश में इस महीने होने वाली मौतों में तीसरे नंबर पर है। सबसे अधिक इस महीने मौतें जयपुर में 13 और जोधपुर में 12 हुई हैं।

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