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दृष्टिहीन बच्चों से कराई शादी के मांगलिक कार्यक्रमों की शुरुआत, मेहमानों से पहले उनको जिमाया

3 वर्ष पहले
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नेत्रहीन विकास समिति के तत्वावधान में चल रहे स्कूल में अध्ययनरत हैं 38 दृष्टिहीन बच्चे। हर बार शहरवासी उनके लिए खाना या अन्य चीजें पंचायत समिति के पास स्थित भवन में पहुंचाते हैं, लेकिन यह पहली बार था कि इन बच्चों को न केवल शादी समारोह में आमंत्रित किया, बल्कि हल्दी व मेहंदी की रस्म की शुरुआत भी उनके हाथों से ही कराई गई। ऐसी अनूठी पहल की शहर के प्रमुख व्यवसायी राजेंद्र तातेड़ ने। उनकी बच्ची सुरभि नमन बोहरा की हल्दी की रस्म 22 नवंबर को ट्रांसपोर्ट नगर के सामने स्थित रूपरजत विहार में हुई थी। वहां इन सभी दृष्टिहीन बच्चों को लाने-ले जाने की व्यवस्था भी तातेड़ परिवार के द्वारा ही कराई गई।

दिव्य दृष्टि के मेहमान : व्यवसायी राजेंद्र तातेड़ ने अपनी बेटी की शादी में नेत्रहीन विद्यालय के बच्चों को बनाया मेहमान, ऐसा पहली बार हुआ जब किसी ने शादी समारोह में बुलाकर उनकी आवभगत की
चांदी जैसा रंग है तेरा गाना गाया तो मेहमानों ने न्यौछावर किए ‌Rs. 50 हजार
मेहंदी तथा हल्दी की रस्म की शुरुआत दृष्टिहीन बच्चों से ही कराई गई। समारोह में बनाए मंच पर पहले इन्हीं बच्चों ने चांदी जैसा रंग है तेरा, सोने जैसे बाल गीत की प्रस्तुति दी तो वहां मौजूद लोगों ने 50 हजार रुपए इन बच्चों पर उवार लिए। समिति के निदेशक छगन सांलेचा ने बताया कि ये राशि इन बच्चों के लिए संचालित स्कूल के विकास में खर्च की जाएगी।

मेहंदी की रस्म में, मेहमानों से पहले बच्चों की मनुहार, खुद परोसा खाना
मेहमानों से पहले तातेड़ परिवार ने दृष्टिहीन बच्चों की आवभगत की। उनको जिमाने के बाद ही संगीत कार्यक्रम शुरू कराया गया। बच्चों को सुबह 10.30 से दोपहर 3.30 बजे तक कार्यक्रम में ही राेका, ताकि वे भी कार्यक्रम का आनंद ले सके। सांलेचा तथा प्रशिक्षक के अलावा राजेंद्र तातेड़ ने अपने परिवार के चार लोगों की ड्यूटी भी बच्चों के साथ लगा दी, ताकि उनको किसी प्रकार की परेशानी ना हो। तातेड़ दंपती ने खुद हाथों से उन्हें खाना परोसा।

परिजनों की इच्छा औरों के लिए मिसाल बन गई
तातेड़ ने बताया कि बच्ची की शादी की शुरुआत अच्छे तरीके से करने की इच्छा सभी के मन में थी। पिता तेजराज तातेड़, मां चुकी कंवर, प|ी ज्योति तातेड़ तथा खुद सुरभि ने दृष्टिहीन बच्चों को शादी समारोह में बुलाने तथा उनसे ही कार्यक्रमों की शुरुआत करने का निर्णय लिया। तातेड़ परिवार द्वारा की गई ये अनूठी पहल अब औरों के लिए मिसाल बन गई है।

पोती की शादी की शुरुआत बहुत अच्छे तरीके से हुई है। सब शुभ होगा। दृष्टिहीन बच्चों को सभी याद करते हैं, लेकिन समारोह व आयोजन के बाद में। हमारे मन में था कि पहले इनको याद करें और बाद में दूसरों को। सभी ऐसा करें तो ये बच्चे भी समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकेंगे। - तेजराज तातेड़ व चुकीदेवी तातेड़

तातेड़ परिवार की ये बहुत अच्छी सोच थी। वहां मौजूद लोगों ने लगभग 50 हजार तथा तातेड़ परिवार ने 11 हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी जो दृष्टिहीन बच्चों के लिए संचालित स्कूल पर खर्च की जाएगी। इन बच्चों के लिए और लोगों को भी ऐसी पहल करनी चाहिए। - छगन सांलेचा, निदेशक नेत्रहीन विकास समिति

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