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टी-बैग की स्टैपल पिन सेहत के लिए घातक, पर एक साल नहीं होगी कार्रवाई

एफएसएसएआई ने जारी किया नोटिफिकेशन, अप्रैल 2019 से लागू होगा संदीप शर्मा | जयपुर फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड ऑफ इंडिया...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 03:15 AM IST

एफएसएसएआई ने जारी किया नोटिफिकेशन, अप्रैल 2019 से लागू होगा

संदीप शर्मा | जयपुर

फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) की ओर से जारी नोटिफिकेशन में माना गया है कि टी-बैग की स्टैपल पिन सेहत के लिए नुकसानदायक है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह नोटिफिकेशन अप्रैल 2019 से लागू होगा। ऐसे में किसी भी प्रदेश का फूड डिपार्टमेंट स्टैपल पिन लगे टी-बैग बनाने वाली कंपनी पर एक साल तक कार्रवाई नहीं कर पाएगा। एफएसएसएआई ने एक जनवरी 2018 में यह नोटिफिकेशन जारी किया। सभी फूड अथॉरिटी को यह नोटिफिकेशन भेजा गया। लेकिन यह वर्ष 2019 के अप्रैल माह से लागू होगा। एफएसएसएआई ने माना है कि टी-बैग में जो पिन स्टेपल किया जाता है, उसमें लोहा होता है और जंग लगने या गर्म पानी में जाने से वह मानव शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे में

गेस्ट्रो डिजीज होंगी

मेडिकल एक्सपर्ट के अनुसार स्टैपल पिन गर्म पानी में देर तक डूबी रहती है। ऐसे में कोई लगातार ऐसे टी-बैग का यूज करता है तो पेट में इंफेक्शन, गले में दर्द व गेस्ट्रो की गंभीर बीमारियों से पीड़ित हो सकता है।

कुकिंग ऑयल मामले में भी कार्रवाई नहीं

फूड एक्ट में प्रावधान है कि खाने के काम अाने वाले ऑयल को दो से तीन बार से अधिक गर्म कर यूज्ड नहीं कर सकते। एफएसएसएआई ने 2017 में एडवाइजरी जारी कर कहा कि इसके लिए टोटल पोलर कंपाउंड का निर्धारण करेंगे। लेकिन अब तक ऐसा नहीं होने से कार्रवाई भी नहीं हो पा रही।

संदीप शर्मा | जयपुर

फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) की ओर से जारी नोटिफिकेशन में माना गया है कि टी-बैग की स्टैपल पिन सेहत के लिए नुकसानदायक है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह नोटिफिकेशन अप्रैल 2019 से लागू होगा। ऐसे में किसी भी प्रदेश का फूड डिपार्टमेंट स्टैपल पिन लगे टी-बैग बनाने वाली कंपनी पर एक साल तक कार्रवाई नहीं कर पाएगा। एफएसएसएआई ने एक जनवरी 2018 में यह नोटिफिकेशन जारी किया। सभी फूड अथॉरिटी को यह नोटिफिकेशन भेजा गया। लेकिन यह वर्ष 2019 के अप्रैल माह से लागू होगा। एफएसएसएआई ने माना है कि टी-बैग में जो पिन स्टेपल किया जाता है, उसमें लोहा होता है और जंग लगने या गर्म पानी में जाने से वह मानव शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे में

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