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खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड 27.74 करोड़ टन होने का अनुमान

नई दिल्ली| मौसम विभाग के इस साल सामान्य मानसून रहने के पूर्वानुमान से उत्साहित कृषि सचिव एस. के पटनायक ने कहा है कि...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 17, 2018, 04:20 AM IST

नई दिल्ली| मौसम विभाग के इस साल सामान्य मानसून रहने के पूर्वानुमान से उत्साहित कृषि सचिव एस. के पटनायक ने कहा है कि देश का खाद्यान्न उत्पादन सरप्लस होने के साथ रिकॉर्ड 27.74 करोड़ टन तक पहुंच सकता है। दक्षिण-पश्चिमी मानसून भारतीय कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए जीवनदायी है। देश की पचास फीसदी आबादी कृषि पर निर्भर है और जीडीपी में कृषि व संबद्ध क्षेत्र का करीब 15 फीसदी योगदान है।

मानसून सीजन के दौरान खेती के लिए बारिश महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि 50 फीसदी खेती योग्य जमीन असिंचित है। सामान्य मानसून से खरीफ फसलों की बुआई को बढ़ावा मिलेगा, जो कि जून से शुरु होती है। उन्होंने कहा कि इस साल देश में खाद्यान्न उत्पादन मांग से अधिक रहने की संभावना है। दक्षिण व उत्तर-पूर्व के कुछ हिस्सों में एक महीने बारिश कम होगी, लेकिन बाद में इसकी रिकवरी हो जाएगी। सामान्य मानसून का पूर्वानुमान कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए उत्साहजनक है। मौसम विभाग ने इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून दीर्घावधि औसत का 97 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है, जो कि सीजन के लिए सामान्य है। मौजूदा फसल वर्ष 2017-18 जून में समाप्त होगा। इस फसल वर्ष के दौरान कृषि मंत्रालय ने 27.74 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन का अनुमान लगाया है, जबकि पिछले साल 27.51 करोड़ खाद्यान्न का उत्पादन हुआ था।

खाद्य तेल आयात 2017-18 में 10% बढ़ा

नई दिल्ली। देश में 2017-18 में खाद्य तेल का आयात 10 फीसदी बढ़कर एक करोड़ 55 लाख 70 हजार टन पर पहुंच गया। इस दौरान पाम तेल का आयात पहले के मुकाबले अधिक होने से कुल आयात में वृद्धि हुई। खाद्य तेल उद्योग के संगठन साल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (एसईए) ने यह जानकारी दी। भारत दुनिया में वनस्पति तेलों का सबसे बड़ा आयातक है। इससे पिछले साल देश में एक करोड़ 42 लाख दस हजार टन खाद्य तेलों का आयात किया गया था। एसईए के आंकड़ों के मुताबिक समाप्त वित्त वर्ष 2017-18 में खाद्य तेलों का आयात जहां एक करोड़ 51 लाख टन रहा, वहीं अखाद्य तेलों का आयात इस दौरान तीन लाख 92 हजार 115 टन रहा। खाद्य तेलों के आयात में 60 फीसदी से अधिक हिस्सा पामोलीन तेल का रहा। मलेशिया द्वारा इसके निर्यात पर शुल्क वापस लिए जाने के बाद से पामोलीन तेल का आयात तेजी से बढ़ा है। हालांकि सरकार ने पाम तेल के आयात पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से मार्च में कच्चे पाम तेल के आयात पर सीमा शुल्क को 30 फीसदी से बढ़ाकर 44 फीसदी कर दिया। वहीं आरबीडी पाम तेल पर इसे 40 से बढ़ाकर 54 फीसदी कर दिया गया।







यह कदम घरेलू उत्पादकों के हितों को ध्यान में रखते हुए लिया गया। एसईए ने कहा कि शुल्क में यह वृद्धि सरकार का स्वागत योग्य कदम है। फिर भी सरकार ने कच्चे तेल और रिफाइंड तेल के बीच शुल्क में 20 फीसदी का अंतर रखने का मौका गंवा दिया। एसोसिएशन काफी समय से इसकी मांग करती रही है। इससे घरेलू रिफाइनिंग उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।

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