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अब प्रदूषण बोर्ड की रिपोर्ट पर ही शुरू होंगी फैक्ट्रियां बैक्टीरिया जिंदा रखने के लिए ट्रीटमेंट प्लांट चालू रहेंगे

Pali News - शहर की फैक्ट्रियों में सोमवार से 5 दिन के लिए कामकाज बंद हो गया। सीईटीपी ने ट्रीटमेंट प्लांटों में कुछ कमियों,...

Dainik Bhaskar

Apr 17, 2018, 05:40 AM IST
अब प्रदूषण बोर्ड की रिपोर्ट पर ही शुरू होंगी फैक्ट्रियां बैक्टीरिया जिंदा रखने के लिए ट्रीटमेंट प्लांट चालू रहेंगे
शहर की फैक्ट्रियों में सोमवार से 5 दिन के लिए कामकाज बंद हो गया। सीईटीपी ने ट्रीटमेंट प्लांटों में कुछ कमियों, नालों की मरम्मत तथा पाइपलाइन बिछाने समेत कई गंभीर खामियों को दूर करने के लिए 5 दिन के लिए प्रोडक्शन पर रोक लगाई है। रविवार रात 12 बजे से ही ट्रीटमेंट प्लांटों में रंगीन पानी लेना बंद कर दिया गया। हालांकि ट्रीटमेंट प्लांट बैक्टीरिया जिंदा रखने के लिए चालू ही रहेंगे। सीईटीपी ने 5 दिन के लिए क्लोजर लिया है, मगर उद्यमियों को 20 अप्रैल तक फैक्ट्रियों के शुरू होने को लेकर संशय है। प्रभारी मंत्री राजेंद्रसिंह राठौड़ की अध्यक्षता में जयपुर में हुई बैठक में राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल स्पष्ट कर चुका है कि फैक्ट्रियां आपकी मर्जी पर बंद हो रही हैं, मगर शुरू करने का अधिकार बोर्ड के हाथ में है। जयपुर की टीम तमाम कमियों का विश्लेषण करने के बाद ही कोई निर्णय लेगी। इधर, 23 अप्रैल को एनजीटी में सुनवाई भी होनी है। इस दौरान एक्सपर्ट कमेटी तथा बोर्ड अपनी तरफ से रिपोर्ट भी पेश करेगी। इसके बाद ही तय होगा कि प्रोडक्शन कब शुरू हो सकता है। इधर, सीईटीपी के बंद के बाद भी पुनायता औद्योगिक क्षेत्र में कई फैक्ट्रियों में कामकाज सुचारू रूप से चालू रहा। दोपहर में एसडीएम महावीरसिंह व बोर्ड के आरओ राजीव पारीक ने पुलिस जाब्ता के साथ पुनायता की कई फैक्ट्रियों का निरीक्षण किया। इसमें 3-4 फैक्ट्रियों में कामकाज होता मिला। पुनायता में ही एक फैक्ट्री श्री केसरियाजी इंडस्ट्रीज में कामकाज होता देख एसडीएम के आदेश पर बोर्ड ने पूरी रिपोर्ट तैयार की है। यह रिपोर्ट जयपुर मुख्यालय भेजी जाएगी।

जयपुर की टीम तमाम कमियों का विश्लेषण के बाद ही लेगी फैक्ट्रियां शुरू करने का निर्णय

शहर में 600 से अधिक कपड़ा फैक्ट्रियां हैं

20 हजार मजदूरों को मिलता है रोजगार

40 करोड़ रुपए का प्रतिदिन होता है प्रोडक्शन

35 लाख रुपए की हर रोज सेसकर से होती है आय

50 लाख रुपए प्रतिदिन ट्रांसपोर्टरों को किराया चुकाया जाता है

इसलिए कपड़ा फैक्ट्रियां हैं बंद
पुनायता में प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने किया निरीक्षण

300 हमाल भी प्रत्यक्ष रूप से से जुड़े हैं उद्योग जगत से

500 लोडिंग टेम्पो के भी पहिए थमे, रोज 2000 कमाता है एक टेम्पो चालक

300 पानी के टैंकर-ट्रैक्टर भी बंद

250 चाय व अल्पाहार के औद्योगिक क्षेत्र में ढाबों-होटलों पर भी असर


सोमवार को एक फैक्ट्री का निरीक्षण करते एसडीएम व आरओ।

इधर, पुनायता क्षेत्र में कई फैक्ट्रियों में कामकाज चालू मिला, एसडीएम-आरओ ने किया निरीक्षण
23 तक फैक्ट्रियां शुरू होने के आसार नहीं, एनजीटी की सुनवाई में पेश होनी है प्रदूषण बोर्ड व एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट

सीईटीपी ने अपनी कमियों को सुधारने के लिए सोमवार से 20 अप्रैल तक फैक्ट्रियां बंद रखने का निर्णय लिया है। हालांकि गत दिनों जयपुर में प्रभारी मंत्री राजेंद्रसिंह राठौड़ की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रदूषण नियंत्रण मंडल स्पष्ट कर चुका है कि सीईटीपी के हाथ में फैक्ट्रियां बंद करना है, मगर शुरू करने की अनुमति प्रदूषण बोर्ड से ही लेनी होगी। प्रदूषण बोर्ड व सीईटीपी की कमियों को पूरा करने के बाद बोर्ड की तकनीकी अधिकारियों की टीम पाली पहुंचकर निरीक्षण करेगी। इसके बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा। इधर, 23 अप्रैल को एनजीटी में सुनवाई होनी है। बोर्ड के सदस्य सचिव केसीए अरूण प्रसाद व एक्सपर्ट कमेटी के प्रमुख पर्यावरणविद् डॉ. बृजमोहन पाली में प्रदूषण के हालात का बारीकी से निरीक्षण कर चुके हैं। दोनों अपनी रिपोर्ट 23 को एनजीटी में रखेंगे।


जानिए-क्यों जरूरी है ट्रीटमेंट प्लांटों को चालू रखना

सीईटीपी की मजबूरी, बैक्टीरिया वापस पनपाने में लग जाता है 1 महीना

फैक्ट्रियों से आने वाले केमिकलयुक्त पानी को न्यूटल तथा उनमें मौजूद हैवी मेटल, घातक रसायन तथा अन्य जैविक नुकसानदायक तत्वों को खत्म करने के लिए ट्रीटमेंट प्लांटों में कई रसायनों का मिश्रण करने बैक्टीरिया तैयार किए जाते हैं। इसके लिए करीब 1 महीने का प्रोसेस होता है। प्लांट बंद करने से बैक्टिरिया मर जाते हैं। वैसे भी इन दिनों गर्मी तेज है। इसलिए एक दिन भी अगर प्लांट बंद रहता है तो बैक्टिरिया खत्म हो जाते हैं। इसके लिए प्लांटों को शुरू रखना सीईटीपी की मजबूरी है। प्लांटों में पहुंचने वाले पानी का पहले पीएच निर्धारित मापदंड पर करने के बाद अंदर छोड़ा जाता है। इसके बाद यह बैक्टीरिया पानी में आने वाले रसायनों को ही भोजन के रूप में ग्रहण करते हुए रंगीन पानी में मौजूद सीओडी तथा बीओडी को कम करते हैं। इसके बाद टर्सरी स्टेज पर पानी ले जाने में मेमरन के साथ बैक्टीरिया की प्रमुख भूमिका है। बैक्टिरिया को निरंतर सक्रिय रखने के लिए केमिकल डोजिंग भी देना पड़ता है। साथ ही इसके लिए गुड़, चना व आटा भी डाला जाता है। सीईटीपी कोषाध्यक्ष प्रमोद लसोड़ का कहना है कि बैक्टीरिया को जिंदा रखने के लिए प्लांटों को बंद नहीं किया गया है।

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