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शिक्षा विभाग की रैंकिंग में 14वें स्थान पर पहुंचा हमारा जिला

शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली से लेकर योजनाओं को लागू करने में हमारे जिले को इस बार संतोषजनक स्थान जरूर मिला है,...

Dainik Bhaskar

May 02, 2018, 05:50 AM IST
शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली से लेकर योजनाओं को लागू करने में हमारे जिले को इस बार संतोषजनक स्थान जरूर मिला है, लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारियों के दावे पूरे नहीं हो सके। इस बार शिक्षा विभाग की ओर से जारी रैंकिंग में पाली जिले को प्रदेश में 14वां स्थान प्राप्त हुआ है। गौरतलब है कि इससे पहले जारी रैंकिंग में पाली जिले की रैंकिंग 26 स्थान पर थी, लेकिन इस बार इसमें सुधार हुआ है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने टॉप-5 में आने के दावे तक किए, मगर अधिकारियों की लापरवाही ने इस बार तो रैंकिंग में जिले को ज्यादा फायदा नहीं हुआ। गौरतलब है कि नवंबर को जारी रैंकिंग में 26वें स्थान पर रहा।

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1. स्टाफिंग पैटर्न : शिक्षा विभाग में सबसे बड़ा बदलाव स्टाफिंग पैटर्न के रुप में हुआ। लेकिन हकीकत में यह शिक्षकों के लिए व अधिकारियों के आफत बन गया।

2. पदस्थापन व नियुक्ति : अधिकारियों व कर्मचारियों ने मनमर्जी के नियम बनाकर चहेतों को खुलकर पदस्थापन व नियुक्ति दी। इसके चलते कई स्कूलों में विद्यार्थी होने के बाद भी शिक्षक नहीं मिले। इसके चलते परिणाम गिरा।

3. शाला दर्पण: सभी सूचनाएं ऑनलाइन करने के लिए बहुत अच्छा प्रयोग, लेकिन सही मॉनिटरिंग नहीं होने के चलते कहीं पर शिक्षक लगे होने के बाद पद खाली तो कई पर एक ही विषय के दो से तीन शिक्षक कार्यरत।

4. संसाधन : आईसीटी लैब, फर्नीचर, स्मार्ट कालांश से लेकर पूरे संसाधन भी उपलब्ध कराने के लिए बजट जारी किया। लेकिन जिला स्तर के अधिकारियों से लेकर ब्लॉक स्तर पर प्रभावी मॉनिटरिंग नहीं हुई।

5. आदर्श स्कूल : सभी ग्राम पंचायतों पर 12वीं स्कूल खोले, आदर्श नाम भी दिया। लेकिन सुविधाओं के नाम पर स्कूलों में कोई भी काम आदर्श नहीं हो रहा है। जो पुराना सिस्टम है उसकी के अनुसार काम हो रहा है।

दावे की पोल खोलती शिक्षा विभाग की खुद की रैंकिंग

जिले में शिक्षा के स्तर को सुधारने के साथ विद्यार्थियों के लिए चलाई जा रही योजनाओं की सही मॉनिटरिंग करने में शिक्षा विभाग कुछ हद तक सही रहा। अधिकारी दावे तो टॉप-5 में आने के कर रहे थे, मगर विभागीय रैंकिंग ने ही पोल खोल दी है।


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