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एक जिले से दूसरे जिले में भी ई-वे बिल 20 मई से होगा लागू, 50 किमी से अधिक दूरी पर माल ले जाने पर जरूरी

देश में 15 अप्रैल से इंटर स्टेट ई-वे बिल लागू होने के बाद अब राज्य सरकार ने 20 मई से प्रदेश में एक जिले से दूसरे जिले में...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 06:15 AM IST

देश में 15 अप्रैल से इंटर स्टेट ई-वे बिल लागू होने के बाद अब राज्य सरकार ने 20 मई से प्रदेश में एक जिले से दूसरे जिले में भी इंट्रा स्टेट ई-वे बिल लागू करने का निर्णय लिया है। वाणिज्यिक कर विभाग के आयुक्त ने इस संबंध में सभी संयुक्त आयुक्त व उपायुक्तों को निर्देश जारी किए हैं। आदेश पत्र में लिखा है कि कर चोरी रोकने में यह बिल काफी मददगार साबित होगा। यह नियम 20 मई से लागू होगा। इसको लेकर स्थानीय स्तर पर अधिकारियों ने तैयारियां शुरू कर दी है। साथ ही व्यापारियों को भी निर्देशित किया जा रहा है। विभाग का मानना है कि नया नियम लागू होने के बाद व्यापारी जैसे ही माल परिवहन करने के दौरान कर चोरी करेगा, पकड़ा जाएगा। ऐसे में संबंधित से जुर्माना वसूल किया जाएगा।

जीएसटी काउंसिल की तरफ से लागू किए जा रहे इस नियम से जिले के 70 हजार से ज्यादा व्यापारियों को ई-वे बिल की प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा। ई-वे बिल काटने के बाद ही माल को प्रदेश के अंदर किसी भी स्थान पर भेजा जा सकेगा। नए नियम के तहत 50 किलोमीटर से अधिक दूरी के लिए माल ले जाने पर यह बिल लेना जरूरी होगा। अब यह बिल सभी आइटम पर लागू कर दिया गया है।

जीएसटी रजिस्टर्ड नहीं है तो ऐसा कर सकते हैं व्यापारी : जीएसटी में जो व्यापारी रजिस्टर्ड नहीं हैं और वे अपने या किराए के वाहन में माल का परिवहन करते हैं तो वह ट्रांसपोर्टर पोर्टल से ई-वे बिल जेनरेट कर सकेंगे। यदि इन व्यापारियों की ओर से रजिस्टर्ड व्यापारी को माल भेजा जाता है तो माल का परिवहन रजिस्टर्ड माना जाएगा। ई-वे बिल की वैधता दूरी के हिसाब से तय होगी।



सौ किमी तक माल परिवहन के लिए एक दिन मिलेगा। इसी तरह हर सौ किमी के लिए एक-एक दिन बढ़ेगा। इसकी समय सीमा बढ़ाने का अधिकार वाणिज्यिक कर कमिश्नर को ही है।

सरकार ने प्रदेश में एक जिले से दूसरे जिले में भी इंट्रा स्टेट ई-वे बिल लागू करने का लिया निर्णय

100 किमी प्रतिदिन के अनुसार लगेगा ई-वे बिल

सीए कौस्तुभ दवेरा व दिव्या दवेरा के अनुसार अब प्रदेश में कहीं से भी माल लाने व ले जाने पर ई-वे बिल देना होगा। इसके लिए व्यापारी को ऑनलाइन ई-वे बिल जेनरेट करना जरूरी है। यदि किसी सप्लायर या स्टॉकिस्ट के पास ई-वे बिल नहीं मिला तो उन पर नियमानुसार पेनल्टी भी लगाई जाएगी। 100 किमी प्रतिदिन के हिसाब से ई-वे बिल लगेगा। दिन की गणना 24 घंटे की बजाए जिस दिन बिल बनेगा इस दिन की रात 12 बजे से शुरू होकर अगले दिन रात 12 बजे तक के लिए वैध माना जाएगा।

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