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कुतर्क से भ्रमित कर देता है कुटिल व्यक्ति

एक अच्छा चित्रकार रंगों का सहारा लेकर दृश्य का भाव बदल देता है। ऐसे ही एक कुटिल व्यक्ति तथ्यों का हेर-फेर कर किसी भी...

Danik Bhaskar | Apr 17, 2018, 05:50 AM IST
एक अच्छा चित्रकार रंगों का सहारा लेकर दृश्य का भाव बदल देता है। ऐसे ही एक कुटिल व्यक्ति तथ्यों का हेर-फेर कर किसी भी दृश्य का उल्टा मूल्यांकन कर देता हैै और दुनिया उसे मान लेती है। रावण इस मामले में बहुत दक्ष था। घटना क्या हुई, उसके पीछे के तथ्य क्या थे और वह उनको बदलकर ऐसे प्रस्तुत करता कि संसार उसे ही सही मान लेता था। हम लोग भी रावण की तरह कभी-कभी यह जानते हुए भी कि घटना कुछ और है, उसके पीछे के कारण अलग हैं लेकिन, अपनी सोच उस पर आरोपित करके नया दृश्य बना देते हैं। जब अंगद ने रावण को समझाया तो श्रीराम के साथ जो घटनाएं हुई उसका रावण ने कैसा मूल्यांकन किया, इस पर तुलसीदासजी ने लिखा- ‘अगुन अमान जानि तेहि दीन्ह पिता बनबास। सो दुख अरु जुबती बिरह पुनि निसि दिन मम त्रास।। रावण श्रीराम के लिए कहता है- उसे गुणहीन, मानहीन समझकर ही तो पिता ने वनवास दिया है। एक यह दुख, स्त्री का विरह और उस पर रात-दिन मेरा भय उसे बना रहता है। यदि गहराई से देखें तो ये तीनों ही बातें राम पर लागू नहीं होतीं लेकिन, रावण ऐसा ही विश्लेषण कर खुद को भी भ्रम में डाल रहा था और अपनी प्रजा को भी। ध्यान रखिएगा, रावण वृत्ति हमसे भी सही दृश्य को ऐसे ही तर्कों के आधार पर गलत बताकर उसकी प्रस्तुति इस तरह करवा देती है कि लोगों को सही लगने लगता है। भ्रम में आप अपना तो नुकसान करते ही हैं, अपने से जुड़े लोगों को भी मुसीबत में डाल देते हैं। रावण यही कर रहा था।

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पं. िवजयशंकर मेहता

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