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हाईकोर्ट के 21 कर्मियों काे स्थाई करने वाले आदेश रद्द

जयपुर | हाईकोर्ट ने बिना भर्ती प्रक्रिया 2009 में हाईकोर्ट में कार्यरत अफसरों व कर्मचारियों के रिश्तेदारों व करीबी...

Dainik Bhaskar

May 02, 2018, 06:10 AM IST
जयपुर | हाईकोर्ट ने बिना भर्ती प्रक्रिया 2009 में हाईकोर्ट में कार्यरत अफसरों व कर्मचारियों के रिश्तेदारों व करीबी लोगों को बैकडाेर एंट्री के जरिए कनिष्ठ न्यायिक सहायक पद पर तदर्थ आधार पर नियुक्त किए 21 कर्मचारियों को नियमित करने के 2009 व 2013 में इन्हें स्थाई करने के आदेशों को अवैध मानते हुए रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट प्रशासन कर्मचारियों को तदर्थ व अस्थाई आधार पर नियुक्ति तो दे सकता है लेकिन हाईकोर्ट नियम 16(3) के तहत तदर्थ आधार पर नियुक्त लोगों को नियमित करने का अधिकार नहीं देते। वो तब तक ही पद पर रह सकते हैं जब तक नियमित भर्ती नहीं हो जाए। न्यायाधीश एमएन भंडारी व डीसी सोमानी की खंडपीठ ने यह आदेश त्रिलोक चंद सैनी की याचिका को मंजूर करते हुए दिया। शेष | पेज 4



हाईकोर्ट नियमों के अनुसार तदर्थ आधार पर नियुक्ति वाले प्रोबेशन पीरियड व नियमितिकरण के लिए क्लेम नहीं कर सकते। इन कर्मचारियों को नियम 3 के विपरीत जाकर नियमित किया है ऐसे में उनकी जो पदोन्नति हुई है वो भी खत्म हो गई है।

अदालत ने कहा कि ये नियुक्तियां पारदर्शिता से नहीं हुई है, इसलिए इन्हें नियमित करना सही नहीं मान सकते और ऐसे में ये कर्मचारी काम करते हुए नहीं रह सकते। अदालत ने कहा कि तदर्थ नियुक्तियां, नियमित नियुक्तियां होने तक हो सकती हैं। ऐसे में इन कर्मचारियों को नियमित करने व स्थाई करने का आदेश अवैध हैं और यह कहने में अदालत को कोई हिचक नहीं है। कर्मचारियों ने अदालत से अपील करने के लिए एक महीने का समय मांगा, लेकिन अदालत ने मना कर दिया।

हाईकोर्ट प्रशासन ने कहा कि उन्हें नियुक्ति का अधिकार: हाईकोर्ट प्रशासन ने कर्मचारियों के पक्ष में दलील दी कि हाईकोर्ट के नियमों के अनुसार मुख्य न्यायाधीश को नियुक्ति का अधिकार है। इसलिए हाईकोर्ट में इसमें दखल नहीं दे सकता। कर्मचारियों को काम करते हुए नौ साल हो गए हैं।

याचिका में ये कहा था: अधिवक्ता ललित शर्मा ने बताया कि याचिका में हाईकोर्ट प्रशासन द्वारा बैक डाेर एंट्री के जरिए 21 जनों की नियुक्ति को चुनौती देते हुए कहा था कि राजस्थान हाईकोर्ट में 2009 में बिना विज्ञापन ही कई लोगों को कनिष्ठ न्यायिक सहायक के पद पर पहले तदर्थ नियुक्ति देकर बाद में उन्हें नियमित कर दिया। जिन लोगों को नियुक्ति दी वे हाईकोर्ट में कार्यरत व रिटायर अफसरों व कर्मचारियों के रिश्तेदार हैं। जबकि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार यह नियुक्तियां अवैध हैं इसलिए इन्हें निरस्त किया जाए। इनकी नियुक्ति में पारदर्शिता भी नहीं रखी गई। इसलिए जिस तरह इन्हें नियुक्ति दी है प्रार्थी को भी नियुक्ति दी जाए।

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