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ऑपरेशन विजय में गूंजे परमाणु युद्ध के गोले, पहली बार परमाणु छतरी के नीचे युद्धाभ्यास

जयपुर। जयपुर बेस्ड सेना की दक्षिणी पश्चिमी कमान की विभिन्न फॉर्मेशन से जुड़े 20 हजार सैनिकों का भारी गर्मी में इन...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 02, 2018, 06:10 AM IST

जयपुर। जयपुर बेस्ड सेना की दक्षिणी पश्चिमी कमान की विभिन्न फॉर्मेशन से जुड़े 20 हजार सैनिकों का भारी गर्मी में इन दिनों ऑपरेशन विजय चल रहा है। पश्चिमी सीमा स्थित सूरतगढ़ के महाजन फील्ड फायरिंग रेज में चल रहे इस ऑपरेशन में किसी बाहरी देश की सेना को इस बार शामिल नहीं किया गया है। इसमें ऐसे हथियारों और युद्ध कला का अभ्यास किया जा रहा है, जो भारत की आंतरिक सामरिक ताकत है। इसमें कुछ ऐसे हथियारों का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिनको लेकर वीटो पावर वाले देश कई देशों पर प्रतिबंध तक लगा चुके हैं। सैनिक सीधे परमाणु युद्ध लड़ने की सामरिक कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके अलावा हेलिकॉप्टर व टैंक के एक साथ दुश्मन के ठिकानों को नष्ट करने के वज्र पाती हमले देखने को मिल रहे हैं। इसका समापन 9 मई को होगा। यह जानकारी ब्रिगेडियर अनिल गौतम और ब्रिगेडियर सुरेंद्रसिंह ने 61 कैवेलरी मैदान में आयोजित दक्षिण-पश्चिमी कमान की ओर से आयोजित प्रेसवार्ता में दी। एक माह के युद्धाभ्यास विजय प्रहार के समापन पर 9 मई को थल सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत, साउथ वेस्टर्न कमांड के चीफ लेफ्टिनेंट जनरल चेरिस मेथसन सहित सेना के कई बड़े अधिकारी शामिल हो सकते हैं।

इस बार यह है युद्धाभ्यास की खास ताकत : एक परमाणु छतरी के नीचे महीने भर युद्धाभ्यास सेना के जवान कर रहे हैं। ऐसे हथियारों से युद्ध में पारंगत होने से गुर आजमा रहे हैं, जिसका प्रयोग पहले नहीं हुआ। दुश्मन को राजस्थान के छोटे से हिस्से से पूरे युद्ध का नेतृत्व करने की कला का प्रदर्शन किया जा रहा है। कैसे पूरी सीमा का उपयोग किए बिना एक छोटे से इलाके से पूरे दुश्मन देश से युद्ध लड़ा जाए।

एयर कैवेलरी और जमीन पर टैंकों का साथ साथ युद्ध करने का अचूक प्रदर्शन, जिसमें एक सैकंड के 100 वें हिस्से से भी कम समय में दुश्मन के ठिकाने को तबाह किया जा सकता है।

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