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विमान में मोबाइल फोन और इंटरनेट के इस्तेमाल को मंजूरी

नई दिल्ली | दूरसंचार आयोग ने विमान में मोबाइल फोन और इंटरनेट के इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है। आयोग की अध्यक्ष और...

Dainik Bhaskar

May 02, 2018, 06:10 AM IST
नई दिल्ली | दूरसंचार आयोग ने विमान में मोबाइल फोन और इंटरनेट के इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है। आयोग की अध्यक्ष और टेलीकॉम सचिव अरुणा सुंदरराजन ने बताया कि तीन से चार महीने में यह सुविधा शुरू हो जाएगी। सर्विस प्रोवाइडर को दूरसंचार विभाग से अलग लाइसेंस लेना पड़ेगा। हालांकि लाइसेंस फीस एक रुपया सालाना होगी। मंगलवार को हुई बैठक में इंटरनेट के जरिए कॉलिंग और कंज्यूमर की शिकायतें दूर करने के लिए लोकपाल की नियुक्ति करने को भी मंजूरी दी गई। टेलीकॉम सचिव ने बताया कि इन-फ्लाइट कनेक्टिविटी पर ट्राई की सिर्फ एक सिफारिश नहीं मानी गई है। ट्राई ने विदेशी सैटेलाइट फर्मों और विदेशी गेटवे को भी इजाजत देने की बात कही थी। लेकिन आयोग ने तय किया कि इन-फ्लाइट सर्विस के लिए अंतरिक्ष विभाग से स्वीकृत सैटेलाइट का ही इस्तेमाल होगा।





गेटवे भी भारत में होना चाहिए। ट्राई की सिफारिश के मुताबिक कम से कम 3,000 मीटर की ऊंचाई पर ही यह सेवा दी जा सकती है। इससे नीचे सामान्य फोन नेटवर्क काम करते हैं। दूरसंचार आयोग में टेलीकॉम, रेवेन्यू, इलेक्ट्रॉनिक्स, डीआईपीपी विभागों के सचिव के अलावा नीति आयोग के सीईओ भी हैं। दूरसंचार विभाग ने 10 अगस्त 2017 को टेलीकॉम रेगुलेटर ट्राई से इन-फ्लाइट कनेक्टिविटी के बारे में सुझाव मांगे थे। ट्राई ने इस साल जनवरी में इस संबंध में अपनी सिफारिशें दी थीं। नागरिक उड्डयन मंत्री सुरेश प्रभु ने ट्वीट में कहा कि इन-फ्लाइट सेवाएं जल्दी लागू करने की कोशिश की जाएगी।

लाइसेंस और टावर लगाने जैसे परमिट के लिए तय समय में मंजूरी मिलेगी। इसके लिए ट्राई की सिफारिशें मान ली गई हैं। मध्य प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, असम, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भारतनेट प्रोजेक्ट शुरू करने को भी मंजूरी दी गई। बीएसएनएल और पावर ग्रिड इस प्रोजेक्ट पर काम करेंगी।

अभी भारत के एयरस्पेस में मोबाइल फोन और इंटरनेट के इस्तेमाल की इजाजत नहीं

विदेशी एयरलाइंस को भारत में बंद करना पड़ता है वाई-फाई : अभी भारत के एयरस्पेस में मोबाइल फोन और इंटरनेट के इस्तेमाल की इजाजत नहीं है। दूसरे देशों की कई एयरलाइंस वाई-फाई के जरिए यह सुविधा देती हैं, लेकिन भारत के एयरस्पेस में आते ही इसे बंद करना पड़ता है।

कॉलिंग और इंटरनेट चार्जेज कंपनियां खुद तय करेंगी : इन-फ्लाइट सेवाएं किस कीमत पर मिलेंगी, इस सवाल पर टेलीकॉम सचिव ने कहा कि यह सैटेलाइट सर्विस प्रोवाइडर और एयरलाइंस पर निर्भर करेगा। हर एयरलाइन अपना सैटेलाइट प्रोवाइडर चुन सकती है।

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