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ऑफ द रिकॉर्ड -श्याम आचार्य

‘आप किसी से भी प्रेम करें, पर देखें इधर’ 14वीं विधानसभा में 11 मार्च 2015 को राज्य के 2015-16 के वार्षिक बजट पर वाद-विवाद...

Dainik Bhaskar

May 18, 2018, 06:30 AM IST
ऑफ द रिकॉर्ड -श्याम आचार्य
‘आप किसी से भी प्रेम करें, पर देखें इधर’

14वीं विधानसभा में 11 मार्च 2015 को राज्य के 2015-16 के वार्षिक बजट पर वाद-विवाद चल रहा था। आसन पर सभापति के रूप में घनश्याम तिवाड़ी विराजमान थे। बोल रहे थे किशनपाल के मोहनलाल गुप्ता (भाजपा)। वे बार-बार विद्याधर नगर नरपत सिंह राजवी (भाजपा) के तरफ देख कर बोल रहे थे, तो सभापति घनश्याम तिवाड़ी ने उन्हें टोका और कहा कि आप इधर देखें। आसनकी तरफ मुखातिब हों। इस पर मोहन लाल गुप्ता ने कहा सर मैं उधर देख रहा हूं। इस पर तिवाड़ी ने कहा नहीं- नहीं परम्पराओं का पालन करें। तो गुप्ता ने फिर कहा कि सर मैं विद्याधर नगर से आने वाले माननीय सदस्य की तरफ देख रहा हूं ।(हंसी) तो सभापति ने कहा आप किसी से भी प्रेम करें लेकिन इधर देखें। इस पर राजवी ने टिप्पणी की कि जब वे (गुप्ता)आपकी तरफ इंगित करते तो ईशारे राजेन्द्र राठौड़ को भी करते हैं। नाम इनका लेते हैं लेकिन वह उधर करते हैं थोड़ा ध्यान रखना। तो गुप्ता ने जोरों से हंसते हुए कहा-क्या बात है? सदस्य भी हंसे।

दरिया बनते तो बहुत दूर निकल भी सकते थे

राजस्थान विधानसभा में वित्तमंत्री के रूप में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे शेरो शायरी न करें यह कभी नहीं होता था। और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बजट पेश करते समय महात्मा गांधी (बापू) की आदर्श वाणी न सुनाएं ऐसा भी कभी नहीं होता था। राजस्थान की 14वीं विधानसभा के चौथे सत्र में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने वर्ष 2015-16 वार्षिंक बजट पेश किया और एक तीखी टिप्पणी के साथ कहा कि हमें किस प्रकार की जर्जर अर्थ व्यवस्था मिली थी उसे वे दोहराना नहीं चाहती। लेकिन चार लाइनों में उन्होंने इस जर्जर अवस्था को पेश कर ही दिया। कहा आप चाहते तो हालात बदल सकते थे, ये हालात आवाम की आंखों से देख भी सकते थे।

मगर आप तो ठहरे झील के पानी की तरह, दरिया बनते तो बहुत दूर निकल भी सकते थे। सत्ता पक्ष के सदस्यों ने मेजें थपथपाकर दाद भी दी। यही नहीं उनके बजट भाषण की तारीफ अध्यक्ष कैलाश चंद्र मेघवाल ने भी की और कहा “मैं आपको आपके भाषण की रफ्तार, मैचलेस के लिए बधाई देता हूं। शानदार तरीका था। मुख्यमंत्री ने हल्का मुस्कुराकर बजट का सदन में उपस्थापन किया। ”

‘कश्ती के रुख को बदलें, किनारे बदल जाएंगे’

राजस्थान विधानसभा में जब सदन की नेता मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे राज्यपाल के अभिभाषण पर पेश धन्यवाद प्रस्ताव के उत्तर या वार्षिक बजट पेश करते समय शेरो-शायरी या फिर चार लाइनों के मुक्तक पेश करती तो सदन के बाकी सदस्यों में भी शेरो-शायरी या फिर चार लाइनों में बात कहने की होड़ मच जाती थी। सिवाना के हमीर सिंह भायल (भाजपा) बालोतरा को जिला बनाने की मांग भी शायराना अंदाज में पेश की। उनका कहना था कि बाड़मेर जिलें में सिवाना और बालोतरा वाले को दौ सो से ढाई किलोमीटर दूरी जाना पड़ता है। इसलिए बात बालोतरा को जिला बना दें। उन्होंने अपनी मांग इस शेर के साथ पेश की “सोच को सुधारिये, सितारे बदल जाएंगे,

नजरिये को सुधारे, नजारे बदल जाएंगे। तुम्हें जरुरत नहीं कश्ती को बदलने की यारों, कश्ती के रुख को बदलें, किनारे बदल जाएंगे।” कुछ सदस्यों ने दाद भी दी।

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