गाेकृपा कथा में शक्कर का बहिष्कार, गुड़ से बने व्यंजन का ही भाेग अाैर प्रसादी

Pali News - 31वर्षीय गाे पर्यावरण चेतना पद यात्रा की शुरुअात के दाैरान ही इसके प्रेरक संत गाेपालचार्य सरस्वती ने पूरी...

Dec 04, 2019, 11:25 AM IST
Pali News - rajasthan news boycott of sugar in gakripa story jaggery dish and prasadi
31वर्षीय गाे पर्यावरण चेतना पद यात्रा की शुरुअात के दाैरान ही इसके प्रेरक संत गाेपालचार्य सरस्वती ने पूरी पदयात्रा व कार्यक्रमाें में शक्कर के बहिष्कार का संकल्प लिया था। पाली में अणुव्रत नगर मैदान में अायाेजित हाे रहे महाेत्सव में भी व्यंजन गुड़ से ही बनाकर गाेमाता काे भाेग लगाया जा रहा है अाैर प्रसादी श्रद्धालुअाें में वितरित की जा रही है। मंगलवार काे अधिकांश लाेगाें ने गुड़ से बनी बूंदी भी पहली बार ग्रहण की। संस्था से जुड़े अाेमप्रकाश बताते हैं कि सात साल पहले गुड़ की बूंदी बनाने के लिए हलवाइयाें ने भी मना कर दिया, लेकिन संत ने खड़े हाेकर इसे बनवाया। संत ने कहा कि शक्कर शरीर के लिए नाशक अाैर गुड़ पाेषक है। उन्हाेंने कथा में माैजूद लाेगाें से भी शक्कर की बजाय गुड़ का सेवन अधिक करने का अाह्वान किया। इधर, यज्ञाचार्य पं. सत्यनारायण शास्त्री जयपुर के सानिध्य में 31 कुंडीय यज्ञ में गाे संरक्षण के लिए यजमानाें ने अाहुतियां दी। 31 वर्षीय पदयात्रा संकल्प की बुधवार काे 7वीं वर्षगांठ है। इसकाे लेकर भजन संध्या हाेगी, जिसमें माेइनुदीन मनचला सहित कई ख्यातनाम भजन गायक प्रस्तुतियां देंगे।

संत बाेले - शिखा शरीर का एंटीना, महिलाअाें ने नहीं पुरुषाें ने काटकर अपनी ही बुद्धि कम की, स्वास्थ्य के नजरिये से सिर पर चाेटी रखना फायदेमंद, मस्तिष्क के तापक्रम काे भी रखती है नियंत्रित

अणुव्रत नगर मैदान में चल रही गाे कृपा कथा महाेत्सव के दाैरान संत गाेपालाचार्य महाराज ने कहा कि शिखा (चाेटी) शरीर में एंटीना का काम करती है। लेकिन अब पुरुषाें ने इसे रखना ही बंद कर दिया है। महिलाअाें ने चाेटी नहीं काटी, लेकिन पुरुष इसे काट अपनी बुद्धि कम कर गए। उन्हाेंने जब कथा में शिखा वालाें काे हाथ उठाने काे कहा ताे नाममात्र के हाथ खड़े हुए। उन्हाेंने कहा कि पाश्चात्य संस्कृति हावी हाेती है तभी गायें सड़काें पर घूमती दिखाई देती है। उन्हाेंने कहा कि स्वास्थ्य के नजरिये से सिर पर चाेटी रखना फायदेमंद है। जहां शिखा रखी जाती है उसके नीचे के भाग में सुषुम्ना नाड़ी है जाे मस्तिष्क के अन्य भाग से सबसे संवेदनशील हाेती है तथा वातावरण से विद्युत चुंबकीय तरंगें का दिमाग से अच्छे से अादान प्रदान करती है। शिखा मस्तिष्क के तापक्रम काे भी नियंत्रित रखती है।

पाली. अणुव्रत नगर मैदान में चल रहे गोकृपा महाेत्सव के दौरान पांडाल में माैजूद महिलाएं।

कथा के दौरान पुंगनुरू गाय का पूजन करते संत।

नाै माताअाें में से सर्वाधिक महत्व गाे माता का

संत ने कहा कि नौ माता होती है प्रथम गाे माता अर्थात गाे माता से ही मां शब्द का प्राकट्य हुआ है। अतः संपूर्ण चराचर जगत की माता कहलाती है। संगठन के अाेमप्रकाश व मीडिया प्रभारी पवन पांडे ने बताया कि देवानंद सरस्वती, श्रवणदास महाराज, सत्यगोपाल महाराज, नंदगोपाल सरस्वती, हीरापुरी महाराज, अभय गिरी महाराज, बड़ा रामद्वारा महंत सुरजनदास महाराज, कमल गोयल, पुखराज राठी, किशनसिंह धुरासनी, गिरधारीसिंह राजपुराेहित, देवीसिंह, गोविन्द चारण, बालकृष्ण वैष्णव, खीमसिंह, दीपेश भाट, राजेश पाटिल, भागचंद भाट, लखन साहू, नितेश, कैलाश पुरी, सुरेश माली आदि उपस्थित थे।

Pali News - rajasthan news boycott of sugar in gakripa story jaggery dish and prasadi
X
Pali News - rajasthan news boycott of sugar in gakripa story jaggery dish and prasadi
Pali News - rajasthan news boycott of sugar in gakripa story jaggery dish and prasadi
COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना