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केंद्र सरकार की स्वीकृति मिलते ही शुरू होगा मारवाड़-मेवाड़ का पहला राष्ट्रीय उद्यान कुंभलगढ़, पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

Pali News - पाली, राजसमंद व उदयपुर जिले की 508.60 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की सीमा में पसरे कुंभलगढ़ व टॉडगढ़ रावली क्षेत्र अभयारण्य...

Bhaskar News Network

Feb 14, 2019, 05:25 AM IST
Pali News - rajasthan news central government39s approval will start soon after the promotion of marwar mewar39s first national park kumbhalgarh tourism
पाली, राजसमंद व उदयपुर जिले की 508.60 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की सीमा में पसरे कुंभलगढ़ व टॉडगढ़ रावली क्षेत्र अभयारण्य को मिलाकर बनने वाले कुंभलगढ़ राष्ट्रीय उद्यान को कांग्रेस की गहलोत सरकार की कैबिनेट ने वर्ष 2011 में मंजूरी दे दी थी। इसके बाद पाली व राजसमंद कलेक्टर ने कुंभलगढ़़ नेशनल पार्क की परीधि में आने वाले बांध के संदर्भ में जल संसाधन विभाग को इस क्षेत्र से गुजरने वाले नेशनल हाईवे के संदर्भ में सार्वजनिक निर्माण विभाग, प्रमुख पर्यटक स्थल परशुराम महादेव व रणकपुर जैन मंदिर सहित करीब 34 मंदिर कुंभलगढ़ नेशनल पार्क की परिधि में आते हैं। इन मंदिरों के ट्रस्ट मंडलों को नोटिस देकर पाली व राजसमंद के कलेक्टर द्वारा इनकी आपत्तियां सुन ली गई थी। इसके बाद भी दोनों जिला प्रशासन ने अपना फैसला नहीं सुनाया। इस वजह से कुंभलगढ़ नेशनल पार्क का मामला आज भी वही अटका हुआ है। पाली व राजसमंद कलेक्टर द्वारा आपत्तियों पर निर्णय लेने के बाद ही राज्य सरकार गजट नोटिफिकेशन जारी कर सकेगा। कुंभलगढ़ राष्ट्रीय उद्यान में शाकाहारी, मांसाहारी जंगली जानवरों सहित पक्षियों की संख्या भी बढ़कर 24 हजार के करीब हो जाएगी। कुंभलगढ़ फोर्ट के बाद अब कुंभलगढ नेशनल पार्क, रणकपुर जैन मंदिर, भगवान परशुराम महादेव का मंदिर भी पर्यटकों को अपनी और आकर्षित करेगा। इससे पर्यटन व उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। पर्यटकों के आवागमन से होटल व्यवसाय, ऊंट सफारी, हॉर्स सफारी, जंगल सफारी से रोजगार के साधन बढ़ेंगे। वहीं सरकार को राजस्व प्राप्त होगा।

36 मंदिर, 3 नेशनल हाईवे गुजरेंगे राष्ट्रीय उद्यान के मध्य से, बड़ी संख्या में जंगली जानवर है इस अभयारण्य में

बढ़ जाएगी जंगली जानवरों की संख्या

मारवाड़ व मेवाड़ संभाग के कुंभलगढ़ राष्ट्रीय उद्यान को मंजूरी मिली तो जंगली जानवरों की संख्या 22 हजार तक पहुंच जाएगी। वन विभाग के सूत्रों के अनुसार कुंभलगढ़ वन्य जीव अभयारण्य क्षेत्र में वर्ष 2011 में जंगली जानवरों की तादाद 16 हजार 12 है। वहीं टॉडगढ़ रावली में 5 हजार 550 है। कुंभलगढ़ राष्ट्रीय उद्यान में अब पैंथरों की संख्या 106, भालू 216, जरख 146, सियार 556, जंगली बिल्ली 76, नेवला 355, भेडिय़ा 64, लोमड़ी 146, सांभर 312, चिंकारा 11, नीलगाय 2501, जंगली सूअर 566, सेही 118, खरगोश 226,लंगूर 8 हजार 767, मोर 3 हजार 931 सहित जमीन पर रेंगने वाले जानवर मौजूद है।

भास्कर न्यूज | सादड़ी

पाली, राजसमंद व उदयपुर जिले की 508.60 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की सीमा में पसरे कुंभलगढ़ व टॉडगढ़ रावली क्षेत्र अभयारण्य को मिलाकर बनने वाले कुंभलगढ़ राष्ट्रीय उद्यान को कांग्रेस की गहलोत सरकार की कैबिनेट ने वर्ष 2011 में मंजूरी दे दी थी। इसके बाद पाली व राजसमंद कलेक्टर ने कुंभलगढ़़ नेशनल पार्क की परीधि में आने वाले बांध के संदर्भ में जल संसाधन विभाग को इस क्षेत्र से गुजरने वाले नेशनल हाईवे के संदर्भ में सार्वजनिक निर्माण विभाग, प्रमुख पर्यटक स्थल परशुराम महादेव व रणकपुर जैन मंदिर सहित करीब 34 मंदिर कुंभलगढ़ नेशनल पार्क की परिधि में आते हैं। इन मंदिरों के ट्रस्ट मंडलों को नोटिस देकर पाली व राजसमंद के कलेक्टर द्वारा इनकी आपत्तियां सुन ली गई थी। इसके बाद भी दोनों जिला प्रशासन ने अपना फैसला नहीं सुनाया। इस वजह से कुंभलगढ़ नेशनल पार्क का मामला आज भी वही अटका हुआ है। पाली व राजसमंद कलेक्टर द्वारा आपत्तियों पर निर्णय लेने के बाद ही राज्य सरकार गजट नोटिफिकेशन जारी कर सकेगा। कुंभलगढ़ राष्ट्रीय उद्यान में शाकाहारी, मांसाहारी जंगली जानवरों सहित पक्षियों की संख्या भी बढ़कर 24 हजार के करीब हो जाएगी। कुंभलगढ़ फोर्ट के बाद अब कुंभलगढ नेशनल पार्क, रणकपुर जैन मंदिर, भगवान परशुराम महादेव का मंदिर भी पर्यटकों को अपनी और आकर्षित करेगा। इससे पर्यटन व उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। पर्यटकों के आवागमन से होटल व्यवसाय, ऊंट सफारी, हॉर्स सफारी, जंगल सफारी से रोजगार के साधन बढ़ेंगे। वहीं सरकार को राजस्व प्राप्त होगा।

वन विभाग का तर्क : दुर्लभ प्रजाति की वनस्पति व जानवर है कुंभलगढ़ राष्ट्रीय उद्यान में

कुंभलगढ़ को राष्ट्रीय उद्यान घोषित करने के पक्ष में भेजे प्रस्ताव में तर्क देते हुए वन विभाग ने बताया कि कुंभलगढ़ व टॉडगढ़ रावली क्षेत्र में जैविक व वनस्पति की विविधता पाई जाती है। यहां हिमालय में पाई जाने वाली दुर्लभ वनस्पति भी मौजूद है। इस क्षेत्र में गूगल, भूटी धामण, पारण बेर, कडाया, जंगली केला, कपूरी व सालम मिश्री, ग्रीन मुनिया जैसी दुर्लभ वनस्पति के साथ ही यहां सागवान, ग्रे जंगल फाउल, अरावली रेड स्पर फाउल आदि यहां पाए जाते हैं।

2011 में कैबिनेट से मिली थी मंजूरी

कुंभलगढ़ राष्ट्रीय उद्यान को कैबिनेट की मंजूरी वर्ष 2011 में ही मिल गई थी। रणकपुर जैन मंदिर में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए पर्यटन विभाग व जिला प्रशासन ने गोडवाड़ महोत्सव व रणकपुर फेस्टिवल की शुरूआत की है।

सबसे अधिक हिस्सा पाली जिले का होगा

वर्ष 2011 में कुंभलगढ़़ राष्ट्रीय उद्यान को गहलोत कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद एक नजर इस पर डाले तो पाली, राजसमंद व उदयपुर जिले की सीमा में 508.60 वर्ग किलोमीटर की सीमा में फैले कुंभलगढ राष्ट्रीय उद्यान में पाली जिले का भू-भाग सबसे अधिक रहेगा। कुंभलगढ़ राष्ट्रीय उद्यान में उदयपुर का 82.52, राजसमंद का 167.28 तो पाली जिले का 258.78 वर्ग किलोमीटर का भू-भाग इस उद्यान में आएगा। वहीं कुंभलगढ़ का 401.51 तथा टॉडगढ़ रावली के 107 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को मिलाकर बनेगा कुंभलगढ़ का राष्ट्रीय उद्यान।

स्वीकृति मिलने की संभावना है


आपत्तियां पूर्व में ही सुन ली


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