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टेक्सटाइल में इंजीनियरिंग करने वाले धैर्यसुंदर विजय महाराज 700 किमी दूर इंदाैर से विहार कर चातुर्मास करने पहुंचे पाली

2 वर्ष पहले
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पाली | जैन संत के शहर में चातुर्मासिंक मंगल प्रवेश पर निकाला वरघाेड़ा।

चातुर्मास करने वाले इन गुरु भगवंतों ने विजयर| सुंदर सूरि महाराज से ली दीक्षा

1. धैर्यसुंदर विजय महाराज

उम्र - 45 साल

शिक्षा - टैक्सटाइल इंजीनियरिंग

जन्म स्थान - मुंबई

संदेश - हमेशा प्रभु की निश्रा में तप करें। सब का कल्याण अपने आप होगा।

2. मुनि निर्मोह सुंदर विजय

उम्र - 40 साल

शिक्षा - 10 वी

दीक्षा ग्रहण - 19 साल की उम्र

संदेश - क्षण भर आनंद देने वाले संसार के भोग पदार्थों से बचकर धर्म का आनंद लें, मोक्ष मिलेगा।

3. मुनि हर्ष सुंदर विजय

उम्र - 31 साल

शिक्षा - बीटेक

दीक्षा ग्रहण-24 साल की उम्र

संदेश - धर्म में संप्रदाय न लाएं। सभी साधु- संतों का सम्मान करें, तभी सद्भावना आएगी।

4. मुनि परम सुंदर विजय

उम्र - 28 साल

शिक्षा - बीबीए

दीक्षा - 21 साल की उम्र

संदेश - अहिंसा परमोधर्म का अनुसरण करें। जीवदया मानव कल्याण का मार्ग है।

दाेनाें भाई पाली में अाैर दाेनाें बहनें इंदौर में कर रही चातुर्मास

संत सुंदर विजय महाराज व मुनिराज निर्मोह सुंदर विजय पाली में सेठ नवलचंद सुप्रतचंद जैन श्वेतांबर तपागच्छ देव की पेढ़ी की अाेर से गुजराती कटला में चातुर्मास करेंगे। चातुर्मास काे लेकर रविवार काे जैन संत धैर्य सुन्दर विजय महाराज, मुनिराज निर्मोह सुन्दर विजय एवं साध्वी तीर्थ निधि का समुद्र विहार से चातुर्मासिक मंगल प्रवेश हुअा। कार्यक्रम काे लेकर सेठ नवलचंद सुप्रतचंद जैन श्वेतांबर तपागच्छ देव की पेढ़ी ट्रस्ट की अाेर से जैन संताें का वरघोडा निकाला गया।

चातुर्मास ही प्रभु के साथ संबंध बनाने का एक अनुपम अवसर : धैर्यसुंदर विजय महाराज

इसके बाद धैर्यसुंदर विजय महाराज ने कहा कि जिन शासन की यह एक पावन परंपरा है कि बारिश के दिनाें में मुनि भगवंत चातुर्मास करते हैं। जीवाें की अहिंसा का बेहतर पालन एक स्थान पर रूकने से हाेता है। चातुर्मास आराधना जरूरी ही नहीं, बल्कि अनिवार्य भी है। चातुर्मास में हम सभी जिनवाणी श्रमण कर प्रभु को पा सकते हैं। उन्हाेंने कहा कि चातुर्मास ही प्रभु के साथ संबंध बनाने का एक अनुपम अवसर है।

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