परदेश जाकर कमाया, अपने गांवों में विकास करवाकर माटी का कर्ज चुकाया

Pali News - 1.अहिंसा: जीवदया के क्षेत्र में जिले में 100 गोशालाओं का निर्माण व संचालन में सहयोग, पशु चिकित्सालयों के साथ ही श्वान...

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 09:30 AM IST
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1.अहिंसा: जीवदया के क्षेत्र में जिले में 100 गोशालाओं का निर्माण व संचालन में सहयोग, पशु चिकित्सालयों के साथ ही श्वान व मूक पशुओं के लिए 24 घंटे सेवा प्रकल्प चलाए जा रहे हैं।

2. सत्य: सभी मनुष्य एक हैं यही सच है। गांव में रहने वाले भी अपने हैं। इसी सोच के तहत उनके उपचार के लिए अस्पतालों के भवन बनवाए। सार्वजनिक कार्यों के लिए धर्मशाला भवन बनवाए।

3. अपरिग्रह: अहिंसा और अपरिग्रह जीवन का आधार है। इसी के अनुरूप कमाई का बड़ा हिस्सा ऐसे सामाजिक व रचनात्मक गतिविधियों में खर्च कर रहे हैं।

4. अचौर्य (अस्तेय): अस्तेय का व्यापक अर्थ मन, वचन और कर्म से किसी दूसरे की सम्पत्ति को चुराने की इच्छा न करना। यानी खुद पैरों पर खड़ा होने के बाद दूसरों को भी रोजगारोन्मुखी शिक्षा के माध्यम से अपने बराबर लाने में सहयोग कर रहे हैं।

5. ब्रह्मचर्य: वैदिक वर्णाश्रम का पहला आश्रम भी है। भावी पीढ़ी को शिक्षा के क्षेत्र में उन्नत करने के लिए लगातार स्कूलों का निर्माण करवा रहे हैं।

न खुद यहां रहते, न ही परिवार, अपने गांव के लोगों की सुविधा के लिए बनवाए स्कूल, हॉस्पिटल और धर्मशालाएं

भास्कर संवाददाता | पाली

जिले की लगभग 25 लाख की आबादी में से सिर्फ 2 लाख के करीब है जैन समाज। यानी दस फीसदी से भी कम। लेकिन इस समाज ने समूचे जिले में पीड़ित मानवता की सेवा, शिक्षा तथा जीवदया के क्षेत्र में 50 फीसदी से ज्यादा भागीदारी निभाई है। भगवान महावीर स्वामी के अहिंसा परमोधर्म के संदेश को जीवन की कार्यशैली के रूप में धारण करने वाले अधिकांश जैन परिवार कमाने के लिए रहते तो परदेस में हैं, मगर अपनी माटी का नाम ऊंचा करने के लिए हमेशा कुछ ना कुछ देने में तत्पर रहते हैं। जिले में शायद ही कोई ग्राम पंचायत ऐसी होगी, जहां पर इस समाज के भामाशाहों ने गांव के विकास या इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए कुछ दिया नहीं हो। सरकारी भवनों, सार्वजनिक स्थलों तथा प्रमुख चौराहों पर चमकते शिलालेख खुद यह बयां कर रहे हैं।

जिले को आगे बढ़ाने में जैन समाज की बड़ी भागीदारी, पाली जैसी कहीं नहीं

200 गांवों में अस्पतालों का निर्माण या जीर्णोद्वार में भागीदारी

300 गांवों में स्कूल, कई तो ऐसे ट्रस्ट जहां निशुल्क शिक्षा में हिस्सेदारी

200 से ज्यादा गोशालाओं का संचालन, नंदीशाला व अमर बकरा पालन

20 लाख से ज्यादा पेड़- खीमावत ट्रस्ट व अन्य भामाशाहों ने जिलेभर में लगाए

02 लाख से ज्यादा को रोजगार- स्थानीय व परदेश के प्रतिष्ठानों में, अपने जिले के लोगों को प्राथमिकता

माटी से गहरा जुड़ाव : परदेस में बड़े उद्यमी व व्यवसायी, लेकिन आज भी अपने गांव आकर ही करते हैं बच्चों की शादी व अन्य मांगलिक आयोजन

जैन धर्म के पंचशील सिद्धांत : समाज ने सेवा से ऐसे जोड़ा

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