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मीठी गोलियों से नहीं बड़ी सर्जरी से सुधरेगा हैल्थ िसस्टम

Dainik Bhaskar

Feb 14, 2019, 05:46 AM IST

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Rajasthan News - rajasthan news health system will not improve with sweet tablets
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हिंदुस्तान ने आजादी के सात दशकों में स्वास्थ्य से जुड़ी कई योजनाएं व प्रस्ताव देखे हैं। लेकिन आर्थिक विकास के बावजूद स्वास्थ्य व्यवस्थाएं बीमार हैं। हालांकि स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार हुआ है, जैसे मेडिकल कॉलेजों की संख्या में बढ़ोतरी या फिर मुफ्त दवाओं की योजना। लेकिन इनसे सिर्फ स्वास्थ्य के मूल स्तंभ की मरम्म्त हो सकी क्योंकि सेवाओं की गुणवत्ता पर ध्यान ही नहीं दिया गया। ये सभी कदम अस्थायी गुणवत्ता, ऊंची कीमत, अनगिनत गलतियों का घातक मिश्रण हैं और एक तबके तक ही सीमित हैं। देखा गया है कि 70% जनसंख्या स्वास्थ्य विशेषज्ञों से वंचित रह जाती है क्योंकि 80% विशेषज्ञ शहरों में रहते हैं।

नेशनल फैमिली हैल्थ सर्वे-2 के मुताबिक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की सुविधा ग्रामीण इलाकों के महज 13% लोगों के पास है। 33 % ग्रामीणों के लिए स्वास्थ्य उप केंद्र और 9.6%के पास हॉस्पिटल की सुविधा है। एक तरफ राज्य द्वारा संचालित केंद्रों व हॉस्पिटल की खराब हालत की वजह से लोगों को प्राइवेट हॉस्पिटल के चक्कर काटने पड़ते हैं तो दूसरी तरफ आसान पहुंच, स्टाफ व सुविधाओं की गुणवत्ता व मॉनिटरिंग की कमजोरियों के कारण सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों का लाभ कम ही पेशेंट्स उठाते हैं। मुश्किल यह है कि घर, बिजली, स्कूल आदि सुविधाओं की कमी के चलते स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा स्टाफ ब्लॉक या निचले स्तरों पर काम करने से हिचकिचाता है।

स्टाफ की प्रोफेशनल स्किल या स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता की माॅनिटरिंग व आकलन का भी कोई तंत्र नहीं है। भ्रष्टाचार ने पूरे तंत्र को जकड़ रखा है। कम्युनिकेबल और नॉन-कम्युनिकेबल दोनों तरह की बीमारियों के संदर्भ में हालत गंभीर है। ज्यादातर संसाधन और समय प्रदेश की अतिआवश्यक समस्याओं जैसे मच्छरों द्वारा जनित बीमारियों व अन्य संक्रामक बीमारियों से उभरने में खर्च हो जाते हैं। बीमारियों की रोकथाम और बचाव के लिए पिछले सालों से सबक भी नहीं लिया जाता। संभवत: नेताओं -ब्यूरोक्रेट्स का ज्यादा हस्तक्षेप और सरकारी नौकरी में डॉक्टरों का घटता आत्म-सम्मान इनोवेटिव समाधान सोचने में बाधक बन रहे हैं। देश के मेडिकल एंड हैल्थ डायरेक्टरेट में तकनीकी कौशल की भारी कमी है। मिडिल लेवल हैल्थ सिस्टम के मैनेजर जैसे सीएमएचओ और बीएमएचओ अपने स्तर पर सुचारु रूप से काम नहीं कर पा रहे। इस सेक्टर में सुधार तभी संभव है जब इन सेवाओं के केंद्र में पेशेंट हो। इसके लिए प्रशासनिक तंत्र को फिर से संगठित करना होगा। प्राइमरी, सेकंडरी और टरशरी हैल्थकेयर सेंटर को आपसी सामंजस्य व अन्य सहायक विभाग जैसे पीएचईडी, साइंस एंड टेक्नोलॉजी के साथ मिलकर काम करना होगा।

बीमारियाें से बचाव और मुकाबला करने के लिए भारतीय चिकित्सीय पद्धतियों जैसे आयुर्वेद का अनुकूलतम इस्तेमाल करना होगा। कह सकते हैं कि स्वास्थ्य सेवाओं की सेहत दुरुस्त करने के लिए आज सर्जरी की जरूरत है मीठी गोलियों की नहीं।



स्वास्थ्य सेवाएं

डा. अशोक पनगड़िया

पद्मश्री, जाने-माने न्यूरोलॉजिस्ट और

मेडिकल रिसर्चर

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