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1990 में युकां के उपाध्यक्ष, 2003 में अध्यक्ष बने, 3 बार विधानसभा चुनाव हारे, अब राज्यसभा प्रत्याशी बने डांगी

एक वर्ष पहले
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पहली बार डॉ. शांतिलाल चुने गए थे राज्यसभा सांसद, अब डांगी के लिए बनाया रास्ता

सिराेही काे 55 साल बाद दूसरी बार राज्यसभा की दावेदारी मिली है। इससे पूर्व 1964 में डॉ. शांतिलाल कोठारी को राज्यसभा का टिकट मिला था और 1970 तक उन्होंने जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद वे विधायक भी रहे। पार्टी पदाधिकारियों के अनुसार डॉ. कोठारी इंदिरा गांधी के काफी नजदीकी थे। अब 55 साल बाद दूसरी बार सिरोही को मौका मिलेगा।

पिता 1962 से 90 तक देसूरी से विधायक रहे, मंत्री भी थे

नीरज डांगी के भाई दिवाकर डांगी के अनुसार साल 1962 से 1990 तक उनके पिता दिनेशराय डांगी देसूरी से विधायक रहे हैं। इस दौरान वे एक बार निर्विरोध निर्वाचित होने के साथ ही तीन बार मंत्री भी रहे। उनके निधन के बाद साल 2004 में नीरज डांगी ने पहली बार यहां से विधानसभा चुनाव लड़ा था। डांगी की प|ी प्रीति ने बताया कि नीरज खुद सिविल इंजीनियर के साथ व्यवसायी है।

राहुल, मीरा कुमार, सीएम गहलोत और कुमारी शैलजा के खास, 3 चुनाव हारे, फिर भी दिया मौका

ऐसा माना जाता है कि नीरज डांगी राहुल गांधी और कुमारी शैलजा के साथ ही सीएम अशोक गहलोत के भी काफी करीबी हैं। उन्हाेंने 2004 में देसूरी से पहली बार विधायक का चुनाव लड़ा था। उस समय वे युवक कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष थे, लेकिन अपनी चचेरी बहन लक्ष्मी बारूपाल से चुनाव हार गए। इसके 2008 में दूसरी बार सीएम गहलोत ने उन्हें रेवदर से उतारा। राहुल गांधी से नजदीकियों का इससे साफ पता चलता है कि साल 2008 के विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी ने आबूरोड में मूंगथला के समीप उनके समर्थन में एक जनसभा को संबोधित किया था, लेकिन यहां भी वे चुनाव हार गए। 2018 के विधानसभा चुनावों में राहुल गांधी ने यह तय कर दिया था कि दो बार से अधिक चुनाव लड़ने वालों को मौका नहीं मिलेगा। फिर भी सीएम गहलोत और राहुल गांधी के करीबी हाेने पर उन्हें फिर से रेवदर से टिकट दिया, लेकिन यहां भी उनको तीसरी बार हार मिली।

सिरोही/आबूरोड| राजस्थान युवक कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष व प्रदेश कांग्रेस के महासचिव नीरज डांगी राज्यसभा में कांग्रेस के उम्मीदवार होंगे। उनके नाम पर गुरुवार को केंद्रीय नेतृत्व ने मोहर लगा दी। इस दौड़ में प्रदेश के कई नेता भी कतार में थे, लेकिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अटूट विश्वास और कुशल वक्ता होने पर डांगी पर भरोसा जताया। लंबी जद्दोजहद के बाद कद्दावर नेता केसी वेणुगोपाल के साथ ही उनके नाम को हरी झंडी दे दी गई। जानकारी के अनुसार 26 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर कई नेताओं की निगाह इस सीट पर टिकी हुई थी। केंद्र में राजनीति करने वाले नेता भी दोनों सीटों के लिए अपना नाम आगे बढ़ा रहे थे। गुरुवार दोपहर अचानक ही नीरज डांगी का नाम सामने अाया अाैर शाम होते-होते उनके नाम की घोषणा कर दी गई। इससे पहले केसी वेणुगोपाल के नाम पर ही चर्चा हाेती रही, मगर देर शाम डांगी के नाम पर भी सहमति बन गई।
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