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प्रशिक्षित श्रमिक के बजाय ट्रैक्टर चालक कोटैंक की सफाई करने उतारा, दम घुटने से अचेत

एक वर्ष पहले
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शहर की फैक्ट्रियों के लिए स्थापित ट्रीटमेंट प्लांट-6 में इक्वेलाइजेशन टैंक में जमा औद्योगिक अपशिष्ट की सफाई करने के लिए शनिवार को ट्रैक्टर चालक को ही उतार दिया। केमिकलयुक्त स्लज के कारण टैंक में उतरते ही उसका दम घुटने लगा। उसे तत्काल बाहर निकाला गया। हालत खराब होने पर उसे शहर के निजी अस्पताल में उपचार के लिए ले गए। अब उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार पाली निवासी रघुवीरसिंह ट्रैक्टर चालक है। शनिवार को औद्योगिक अपशिष्ट को बाहर निकालने के लिए सीईटीपी फाउंडेशन से जुड़े पदाधिकारियों ने उसे टैंक में उतार दिया। कुछ देर में ही उसकी तबीयत बिगड़ गई। उसे सांस लेने में परेशानी होने पर वहां मौजूद अन्य लोगों ने उसे बाहर निकाला। इसके बाद श्रमिक को निजी अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया। इस मामले में रीको कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुनील चौहान ने कहा कि पूर्व में दो हादसे होने के बाद भी अकुशल श्रमिकों को टैंक में सफाई के लिए उतारा जा रहा है।

पूर्व में 2 हादसे, 1 में 9 व दूसरे में 2 श्रमिक मरे थे, फिर भी लापरवाही

ट्रीटमेंट प्लांटों के टैंकों की सफाई करते वक्त पूर्व में दो हादसे हो चुके हैं। पहला हादसा ट्रीटमेंट प्लांट-1 में हुआ था। यहां पर टैंकों में केमिकलयुक्त अपशिष्ट को बाहर निकालते वक्त वर्ष 1996 में एक-एक कर 9 श्रमिकों की मौत हो गई थी। यह सभी श्रमिक सफाई कर्मचारी ही थे। इसके बाद वर्ष 2011 में भी टैंकों की सफाई के दौरान दो श्रमिक सुरेश कुमार तथा प्रेमसिंह रावत की मौत हो गई थी। इसके बाद भी शनिवार को सीईटीपी पदाधिकारियों ने बिना तकनीकी विशेषज्ञों की मौजूदगी में ही ट्रैक्टर चालक रघुवीरसिंह को टैंक में उतार दिया। इसको लेकर कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों में गुस्सा है।

अस्पताल में भर्ती कर्मचारी।
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