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सुषमां को अंतिम सैल्यूट! बेटी ने निभाईं रस्में, इलेक्ट्रिक शवदाहगृह में संस्कार

2 वर्ष पहले
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अंतिम यात्रा के दौरान मोदी, अाडवाणी और नायडू की आंखों से आंसू छलक पड़े

भास्कर न्यूज | नई दिल्ली

बेबाक वक्ता सुषमा स्वराज बुधवार को पंचतत्व में विलीन हो गईं। विदेश मंत्री रहीं भाजपा नेता सुषमा जाते-जाते भी सामाजिक बदलाव का बड़ा संदेश दे गईं। उनका अंतिम संस्कार इलेक्ट्रिक शवदाहगृह में हुआ। रस्में बेटी बांसुरी ने निभाईं, जो एडवोकेट हैं। अंतिम संस्कार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लालकृष्ण आडवाणी, उपराष्ट्रपति वैंकया नायडू की आंखों में आंसू थे। सुषमा ने मंगलवार रात आखिरी सांस ली थी।

काम में इतनी बारीकी कि बैठकाें के लिए खाने का मैन्यू भी खुद बनातीं, फिर निगरानी करती थीं

मैं सुषमाजी को 1977 से जानता हूं। उनकी याद्दाश्त इतनी जबरदस्त थी कि आप उन्हें एनसाइक्लोपीडिया कह सकते थे। हर काम बारीकी से करती थी। विदेश से आने वाले डेलीगेशन के हर एक व्यक्ति के लिए वह मैन्यू तक खुद तैयार करती थीं। खुद खाना बनाने वाली टीम को ब्रीफ करती थीं। उनकी ऐसी ही बातें मुझे बहुत पसंद थीं। मैं जब विदेश मंत्रालय में उनके साथ था तो कई बार उनके फैसले सुनकर चौंक जाता था। जैसे एलीट माने जाने वाले विदेश मंत्रालय का ज्यादातर काम हिंदी में करना। वह फाइल पर नोटिंग हिंदी में लिखती थीं। विभागीय पत्राचार भी हिंदी में करती थीं। उन्हें देखकर बड़े अफसर भी हिंदी में काम करने लगे। जब कोई विदेश मंत्रालय को ट्वीट कर समस्या बताता तो सुषमा तत्काल जवाब देती थीं।



उनकी इसी आदत की वजह से विदेश मंत्रालय आम लोगों की पहुंच में आ गया। उन्होंने विदेश मंत्री रहते हुए ऐसे 80 हजार से ज्यादा लोगों की मदद की थी।

रिटायर्ड जनरल वीके सिंह

सुषमा स्वराज के साथ 5 साल विदेश राज्यमंत्री रहे हैं। अभी सड़क एवं परिवहन राज्यमंत्री हैं।

आिखरी विदाई देते पति स्वराज कौशल और बेटी बांसुरी स्वराज।

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आडवाणी को मोदी- राजनाथ ने संभाला

लालकृष्ण आडवाणी श्रद्धांजलि देकर जाने लगे तो भावुक हो गए। उनके कदम ठीक से नहीं उठ पा रहे थे। तभी प्रधानमंत्री मोदी ने उनका हाथ थामा। फिर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने भी उन्हें सहारा दिया।

देश ने प्रखर वक्ता खो दिया : गहलोत

सीएम अशोक गहलोत भी बुधवार को दिल्ली में सुषमा स्वराज के अंतिम दर्शन करने पहुंचे। उन्होंने कहा कि सुषमा ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर अपनी अलग छवि बनाई। देश ने एक प्रखर वक्ता, कुशल प्रशासक खो दिया है।

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