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मौजीराम हर साल बारात लेकर जाते हैं और खाली हाथ लौटते हैं

एक वर्ष पहले
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बूसी में होली की अनूठी परंपरा

कस्बे के विख्यात भगवान शिव के अवतारी मौजीराम व पार्वती के स्वरूप मौजनी देवी का ऐतिहासिक विवाह महोत्सव मंगलवार की शाम को धूमधाम के साथ सम्पन हुआ। जिसमें प्रदेश एवं कस्बे सहित आसपास के गांवों के ग्रामीणों ने भाग लिया। मौजीराम हर साल बारात लेकर जाते हैं और खाली हाथ लौटते हैं। गांव में हर साल धुलंडी पर बारात निकलती है। गांव में यह परम्परा सालों से चली आ रही है। गांव में हर साल धुलंडी के दिन मौजीराम और मौजनी देवी का विवाह किया जाता है। इसके लिए बाकायदा बारात निकाली जाती है। मान्यता है कि पिछले करीब सैकड़ों साल से ऐसा चलता आ रहा है। होली के दूसरे दिन धुलंडी के दिन रियासत काल से मनाए जाने वाले अनूठे विवाह महोत्सव में शाम 8 बजे ओड़वारियों के वास में स्थित मौजीराम की पूजा अर्चना कर बारात रवाना हुई, जो गाजे-बाजे के साथ सोनारों के वास में पहुंची। यहां मौजीराम को आभूषण पहनाकर यहां से स्थानीय रावले पर पहुंची। यहां मौजीराम का स्वागत ठाट पाट के साथ किया गया तथा रावले के बाहर मौजीराम को बिठाकर कवियों द्वारा बनाए गए छतीस कौम के कथा का वाचन एवं महिमा का बखान किया गया। इसके बाद बारात गाजे बाजे के साथ ब्रह्मपुरी में स्थित मौजनी देवी के घर पहुंची। यहां बकायदा हिंदू रिति रिवाज के साथ बारात का स्वागत,दूल्हे का सांभेला में महिलाओं के द्वारा के वड़बेड़ा व जलामन आरती, तिलक तथा मिलनी कर ठाट पाट के साथ स्वागत कर अग्नि के सम्मुख फेरे के साथ मौजीराम व मौजनी देवी के विवाह की रस्म निभाई गई। महाप्रसादी के बाद बारात वापस मुख्य मार्गों से होते हुए यथास्थान पर पहुंची। यहां आरती के साथ ही मौजीराम को मंदिर में बैठाकर विवाह महोत्सव का समापन हुआ।

बूसी. मौजीराम व माैजनीदेवी के विवाह महोत्सव में उमड़े ग्रामीण।
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