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सांसद-विधायक बाेले- समय है सुधर जाओ, वरना अंजाम बुरा हाेगा, उपायुक्त बोले- अच्छे भविष्य के लिए जो हुआ उसे भूलना होगा

Pali News - केंद्रीय नारकोटिक्स विभाग के तत्कालीन उप नारकोटिक्स आयुक्त डॉ. सहीराम मीणा के 1 लाख की रिश्वत लेते गिरफ्तार हाेने...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 10:30 AM IST
Rani News - rajasthan news mp mla balhe time is better otherwise the bad badge will happen the deputy commissioner said forget about what happened for a good future
केंद्रीय नारकोटिक्स विभाग के तत्कालीन उप नारकोटिक्स आयुक्त डॉ. सहीराम मीणा के 1 लाख की रिश्वत लेते गिरफ्तार हाेने के करीब 6 माह बाद शनिवार को विभाग की पहली बार बैठक बुलाई गई। नई अफीम नीति 2019-20 को लेकर सलाह देने के लिए बुलाई गई यह बैठक भ्रष्टाचार के मुद्दे पर ही केंद्रित हाे गई।

सांसद से लेकर विधायकों और किसान प्रतिनिधियों ने अधिकारियों की जमकर खिंचाई की अाैर बिना किसी अफसर का नाम लिए उनके काले कारनामे उजागर किया। नेताओं ने अपने सुझावाें में अधिकारियों को यह स्पष्ट संदेश दिया कि वक्त है सुधर जाओ, वरना अंजाम बुरा होगा। बैठक के अंत में उप नारकोटिक्स आयुक्त विकास जोशी ने कहा कि मैं सबकी बात सुनना-समझना चाहता हूं ताकि ऐसा समाधान निकाला जा सके, जो सभी को राहत दे। मेरा सभी से निवेदन है कि पहले जो हुआ, उसे हमको भूलना होगा तभी जाकर हम भविष्य को बेहतर बना सकेंगे।

बैठक में किसने क्या कहा

चित्तौड़गढ़ से भाजपा सांसद सीपी जोशी बोले- मैं पहले भी कहता था और आज भी कह रहा हूं कि गलत पैसा जिंदगी में किसी को सुखी नहीं बना सकता। आपने उदाहरण देख लिया होगा। एक अधिकारी गया अौर अपने साथ 6 को एपीओ करवाया। किसानों के हक का गलत पैसा लेना बंद कर दो वरना इसका बुरा परिणाम भुगतना पड़ेगा।

चितौड़गढ़-कपासन से भाजपा विधायक अर्जुन लाल जीनगर ने कहा-नारकोटिक्स विभाग ईमानदार नहीं हैं। बिना पैसा लिए कोई काम नहीं करता। आप भ्रष्टाचार की बात करते हो, बिना पैसे लिए तो कोई अधिकारी खेत नहीं नापता। सबकुछ सब जानते हैं। विभाग को किसानों के हितों में नीतियां बनाकर धरातल पर उतारनी पड़ेंगी।

अटरू बारां से कांग्रेस विधायक पानाचंद मेघवाल बोले- दुनिया हाईटेक हो रही है, लेकिन महकमा आज भी सदियों पुरानी नीतियों को ढो रहा है। किसान के सामने नाप-तोल होना चाहिए।

बाद में उसे क्या पता चलेगा कि उसकी अफीम की जांच हुई या दूसरे की। इसी काम में मिलीभगत होती है और भ्रष्टाचार की बू आती है। मैं तो खुद किसान का बेटा हूं अौर महकमे का पीड़ित हूं। मेरे पिता का का पट्टा भी विभाग ने 1998 में काट दिया था, जो आज तक बहाल नहीं किया।





एक ही सैंपल से हो गुणवत्ता की जांच तो मिटेगी मिलीभगत

किसान की मार्फिन की जांच करने में मेरा सुझाव है कि एक ही सैंपल में गुणवत्ता की जांच हो, ताकि सबकुछ पारदर्शी तरीके से हो और मिलीभगत नहीं हो सके। विभाग किसान से एक सैंपल मंगवाएं, कुछ हिस्से की विभाग जांच करवाए। किसान के पास उसी का दूसरा सैंपल रहे, ताकि उसे शक होने पर वो उसकी जांच करवाए। ऐसा करने पर जांच में कहां गड़बड़ हुई, सब खुलकर आ जाएगा। - मदन दिलावर, भाजपा विधायक रामजगंमंडी



अफीम ताैल का मूल्य कब कम होगा?



अफीम ताैल का मूल्य बढ़ा है, वो जितना बढ़ना चाहिए वो पूरा नहीं बढ़ सका है। किसानों को अपनी फसल का दाम पूरा नहीं मिलता इसलिए कुछ किसान इधर-उधर के रास्ते अपना लेते हैं। विभाग ऐसा करेगा तो इसका फायदा विभाग और किसान दोनों को मिलेगा।

- चंद्रभान सिंह आक्या, चित्ताैड़गढ़ से भाजपा विधायक

मैं पूछता हूं अधिकारियों के घरों पर कैसे निकल रही है हिरोइन?



मेरी नजर में इस मीटिंग की सार्थकता तब होगी, जब किसानों को इसका पूरा फायदा मिले। किसान सुखी नहीं हैं। विभाग के अधिकारी सस्पेंड होते हैं और उनको बहाल कर दिया जाता हैं, लेकिन किसानों के पट्टाें को बहाल नहीं करते। विभागीय अधिकारी भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं। मैं पूछता हूं कि विभागीय अधिकारियों के घरों पर अफीम, हिरोइन कैसे मिल रही हैं? मुखिया और अधिकारियों की मिलीभगत के बिना क्या यह संभव है?



- एक पूर्व विधायक





ये प्रमुख मांगें उठी



1. धारा 8/29 को खत्म किया जाए। इसकी वजह से कई किसान बर्बाद हो चुके और परेशान हैं। यह धारा न्याय संगत नहीं है।



2. 1997-98 के पट्टों को आज तक बहाल नहीं किया गया, जबकि 1998-99 के पट्टों को बहाल कर दिया गया‌। यह नीति समझ से परे है। इसका निस्तारण किया जाए।



3. खेत को नापने की कोई तय नीति बनाई जाए। अधिकारी मनमर्जी से खेत नापते हैं और अलग-अलग नीति पर नापा जा रहा है।



4. मीटिंग में किसानों को बोलने का पूरा मौका दिया जाए। इसके लिए लॉटरी सिस्टम करो या मीटिंग काे दो से चार दिन चलाओ।



5. विभाग पूरे प्रदेश में एक औसत मानता है, जो प्रेक्टिकल नहीं और किसान विरोधी नीति है। हर जिले की अलग जलवायु, अलग जमीन है।

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