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सड़क निर्माण वाले माेहल्ले का नाम नहीं, मकान मालिकों के नाम लिख निकाल दिए 9.8 लाख के टेंडर

2 वर्ष पहले
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नगर परिषद ने बारिश में गड्ढों को भरने और कंकरीट की सड़कें बनवाने को लेकर एक-एक माह की 9.8 लाख की निविदाएं ताे निकाल दी, लेकिन यह सड़कें शहर में कहां बनेगी, इसकी अाधी-अधूरी जानकारी ही निविदा में बताई है।

हैरत की बात यह है कि निविदाओं में कुछ काम ऐसे हैं, जिसमें यह भी नहीं लिखा कि काम किस मोहल्ले या वार्ड में होना है। सिर्फ लोगों के नाम के प्लॉट व मकान का हवाला ही दिया गया है। एेसे में यह निर्माण शहर में कहां हाेगा, कहना मुश्किल है। हर बारिश में नगर परिषद की निर्माण शाखा में इस प्रकार के घपले सामने आए हैं। पूर्व में भी कई निविदाओं में त्रुटियां सामने आने पर निविदाएं रद्द की गई, लेकिन हर बार ऐसी ही गलतियां कर चहेते ठेकेदारों के नाम टेंडर भी जारी कर दिए जाते हैं। बिना काम के बिल पास होने के साथ ठेकेदारों व अधिकारियों की चांदी भी हो रही है।

बारिश में मिट्टी की सड़कें टिकेगी ही नहीं, फिर भी निकाल रहे निविदा

नगर परिषद की ओर से हाल ही में निकाली गई निविदा में करीब 5 जगह पर डब्ल्यूबीएम सड़क बनाने का प्रस्ताव लिया है। बारिश के समय जहां भी डब्ल्यूबीएम सड़क व झींकरा डलवाया जा रहा है। वहां कीचड़ फैलने से वाहन व आमजन का निकलना भी मुश्किल हो रहा है। नगर परिषद ने 4.94 लाख में रामनगर व अन्य जगहों पर डब्ल्यूबीएम सड़क, 4.94 लाख में सदगुरु नगर व अन्य स्थानों पर डब्ल्यूबीएम सड़क व 4.80 लाख में सरस्वती स्कूल के पास डब्ल्यूबीएम सड़क निर्माण कार्य करवाने जा रही है, लेकिन शहर में बारिश के चलते कई गली मोहल्लों में सड़क पर व सड़क के किनारे पानी जमा होने से कीचड़ फैल रहा है।

ऑनलाइन टेंडर के लिए 5 लाख का नियम, इसलिए कम राशि का निकाल रहे

नियम के अनुसार 5 लाख या इससे अधिक की राशि का टेंडर निकालने पर उसे ऑनलाइन जारी करना पड़ता है। नगर परिषद अल्पकालीन निविदाओं में 4.90 से 4.98 लाख रुपए तक ही कार्यों के अलग-अलग टुकड़ों में निविदाएं निकाल रही है। बताया जाता है कि इसमें से कई कार्य पहले ही ठेकेदारों द्वारा कर लिए जाते हैं। बाद में निविदाओं में आपसी मिलीभगत से चहेते ठेकेदार के नाम निविदाएं खोल दी जाती है।

निविदाएं निर्माण शाखा से निकलती है, जानकारी नहीं

नगर परिषद के विकास कार्यों की निविदाएं निर्माण शाखा से निकलती है। निविदाओं में त्रुटियां है, इसकी मुझे जानकारी नहीं है। इस संबंध में बात करेंगे। - आशुतोष आचार्य, आयुक्त नगर परिषद

टेंडर में मोहल्ले व गली का नाम होना चाहिए

शहर के विकास कार्यों के लिए निकलने वाली निविदाओं में मोहल्ले या वार्ड का नाम होता है। समय-समय पर अल्पकालीन निविदाएं निकलती है। अगर निविदाओं में मोहल्ले व वार्ड का नाम नहीं है तो यह गलत है। इसकी जांच करवाएंगे। वैसे कभी कभार खामियां हो जाती है। - महेंद्र बोहरा, चेयरमैन नगर परिषद

ये खामियां सामने आईं

कार्य : अच्छी मिट्टी आपूर्ति कार्य, लागत : 4.98 लाख रुपए, समय : 1 माह

- खामी : क्या मिट्टी खराब आती है, यह मिट्टी नगर परिषद में पड़ी रहेगी या अन्य कार्यों में काम लेंगे, इसका कोई जिक्र नहीं।

कार्य : बाबूलालजी मास्टर साहब के प्लॉट से होते हुए वजारामजी के मकान तक डब्ल्यूबीएम सड़क निर्माण, लागत : 4.92 लाख, समय : 1 माह

- खामी : इसमें न तो वार्ड का जिक्र है और न ही मोहल्ले या गली का नाम बताया गया है। ऐसे ही निविदा निकाली।

कार्य : वजारामजी के मकान से मैन रोड तक डब्ल्यूबीएम सड़क निर्माण, लागत 4.92 लाख, समय : 1 माह

- खामी : यह कार्य किस जगह होगा इसका हवाला नहीं दिया गया है। यह जगह शहर में कहां है इसकी भी जानकारी नहीं है।

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