कुएं और बोरवेल से पानी लेने वाली इकाइयों को सीज करने के आदेश

Pali News - केंद्रीय भू-जल बोर्ड की अनुमति के बगैर कुओं तथा बोरवेल से पानी का उपयोग करने वाले शहर के प्रतिष्ठानों पर गाज गिरने...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 10:15 AM IST
Pali News - rajasthan news order to seize units taking water from wells and bore well
केंद्रीय भू-जल बोर्ड की अनुमति के बगैर कुओं तथा बोरवेल से पानी का उपयोग करने वाले शहर के प्रतिष्ठानों पर गाज गिरने वाली है। केंद्रीय भू-जल बोर्ड ने ऐसे 725 प्रतिष्ठानों की सूची कलेक्टर काे भेजी है। इसमें टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज समेत हाेटल, ग्रेनाइट इकाई, अस्पताल, हाेटल, माइंस समेत कई इंस्टीट्यूट शामिल हैं। कलेक्टर ने तहसीलदार की अगुवाई में टीम का गठन करके भौतिक सत्यापन के आदेश दिए हैं। यह टीम सोमवार से सर्वे करेगी। अगर किसी भी इकाई में कुएं या बोरवेल से पानी का उपयोग हाेना पाया गया ताे, उसे तत्काल बंद करवा दिया जाएगा। शनिवार को इस आदेश से उद्यमियों में हड़कंप का माहौल रहा। कुल 600 फैक्ट्रियों में से मात्र 3 के पास ही ऐसी अनुमति है। शेष टैंकरों से ही पानी मंगवाकर प्रोडक्शन कर रही है।

भू-जल बोर्ड के आदेश के मायने : प्रदूषण को लेकर केंद्रीय भू-जल बोर्ड आरोपों के दायरे में आ रहा था। बोर्ड की सख्ती से यह फायदा होगा कि बिना अनुमति भू-जल का उपयोग बंद करने से एक तो बांडी नदी में फैक्ट्रियों का पानी नहीं जाएगा। दूसरा सिटी सीवेज का पानी ट्रीट होने के बाद इन फैक्ट्रियों में उपयोग किया जा सकेगा।

सबसे ज्यादा असर : कपड़ा इंडस्ट्रीज बंद हाेने के कगार पर

इस आदेश का सबसे ज्यादा असर कपड़ा इंडस्ट्रीज पर पड़ सकता है। कुल 600 में से 3 के पास ही भू-जल बोर्ड की अनुमति है। शेष फैक्ट्रियों में पानी शहर समेत आसपास के कुओं से लाकर सप्लाई किया जाता है। कुछ फैक्ट्रियों में बोरवेल तथा कुएं हैं, मगर उनके पास अनुमति नहीं हैं।

एसटीपी से 3 एमएलडी ही पानी मिलेगा, फैक्ट्रियों को चाहिए 12 एमएलडी, कैसे होगी मांग पूरी

नगरपरिषद का ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता 7.50 एमएलडी है। वर्तमान में इसमें शहर का पानी 3 एमएलडी ही आ रहा है। इस पानी को फैक्ट्रियों में सप्लाई करने के बाद भी आधी से ज्यादा फैक्ट्री संचालकों को पानी नहीं मिल पाएगा। बताया जाता है कि फैक्ट्रियों को रोजाना 12 एमएलडी पानी चाहिए।

बड़ा सवाल

आदेश के बाद एक दिन में ही 50 से अधिक आवेदन

कलेक्टर के आदेश जारी होते ही शनिवार को उद्यमियों ने सिटी सीवेज का पानी लेने के लिए आवेदन देने की प्रक्रिया शुरू कर दी। दिनभर में 50 से अधिक आवेदन मिले। पूर्व में यह पानी निशुल्क दिया जा रहा था, मगर अब उद्यमियों को इसका भुगतान करना होगा। नगरपरिषद आयुक्त आशुतोष आचार्य ने बताया कि कलेक्टर के आदेश पर 5 हजार लीटर के लिए 50 रुपए तथा 20 हजार लीटर के लिए 200 रुपए तय किए गए हैं।

अब एक ही रास्ता : पानी का करना हाेगा दोबारा उपयोग

टेक्सटाइल उद्योगों को बंद होने से बचाने के लिए अब एक ही रास्ता बचा है कि जेडएलडी तकनीक या एमवीआर की तरफ बढ़ना होगा। उनके यहां उपयोग में लिए जा रहे पानी का दोबारा उपयोग करना हाेगा। सिटी सीवेज के पानी को ट्रीट करने के बाद कपड़ा प्रोसेसिंग में उपयोग करना होगा, जिससे यह पानी भी नदी मेंं जाने से रुकेगा।



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