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प्रस्ताव न वर्कऑर्डर, आचार संहिता में कटवाए चेक, कागजों में मारे 45 लाख के मच्छर-दीमक

Pali News - सर्दी की सीजन में अव्वल तो मच्छर पनपते ही नहीं। सरकारी भवनों के निर्माण के साथ ही दीमक नाशक दवाई का स्प्रे होता...

Feb 15, 2020, 10:41 AM IST
Pali News - rajasthan news proposal no work order check cut in code of conduct 45 million mosquito termites killed on paper

सर्दी की सीजन में अव्वल तो मच्छर पनपते ही नहीं। सरकारी भवनों के निर्माण के साथ ही दीमक नाशक दवाई का स्प्रे होता है, लेकिन मारवाड़ जंक्शन पंचायत समिति क्षेत्र की सरकारी बिल्डिंगों में अधिकारियों को अचानक मच्छर-दीमक मारने की याद आ गई। जिला परिषद की नवंबर में हुई बैठक में मौसमी बीमारियों फैलने की आशंका को देखकर कीटनाशक व पेस्ट कंट्रोल छिड़काव करने के बहाने बिना ग्राम पंचायतों के प्रस्ताव गुपचुप तरीके से एक एजेंसी से कागजों में ही करीब 45 लाख रुपए की कीटनाशक दवाई का छिड़काव करवा दिया। सरपंचों की चुनाव प्रक्रिया के दौरान यह दवा कहां और किस सरकारी भवन में छिड़की गई। इस बारे में ग्रामीणों के साथ ही जनप्रतिनिधियों तक को पता नहीं है। कुछ गांवों में इक्का-दुक्का बिल्डिंगों में छिड़काव जरूर किया गया। चौंकाने वाली बात तो यह है कि संबंधित एजेंसी को प्रत्येक ग्राम पंचायत से 65 से 90 हजार रुपए का खर्च बताते हुए चेक भी जारी कर दिया। नियमानुसार चेक सरपंचों के हस्ताक्षर से ही जारी होना चाहिए, जबकि बीडीओ ने खुद ही काउंटर साइन कर दिए।

जानकारी के अनुसार पंचायत समिति की कुल 48 ग्राम पंचायतों की सरकारी बिल्डिंगों में कीटनाशक दवाई का छिड़काव करने के लिए अधिकारियों ने अपने स्तर पर ही अजमेर की एक कंपनी को 28 रुपए प्रति स्कवायर मीटर के हिसाब से ठेका दे दिया। ठेका भी तब दिया जब सरपंच चुनाव को लेकर आचार संहिता लगी थी। इस दौरान कहां पर छिड़काव किया गया, किसी को पता नहीं। चुनाव के बाद विकास अधिकारी द्वारा भुगतान भी करवा दिया गया। मजेदार बात ताे यह है कि प्रत्येक ग्राम पंचायत से कीटनाशक दवाई छिड़काव करने का भुगतान उठ गया। पुराने तथा नए सरपंचों को इसकी जानकारी तक नहीं है। चेक भी आनन-फानन में आचार संहिता के दौरान ही काटे गए।

पूरी प्रक्रिया ही संदेह में क्योंकि...

1 कई चेक पुरानी तारीखों में काटे, एक फरवरी को राशि जमा हुई, हर पंचायत का खर्च 60 से 90 हजार आया, इस दौरान चुनावी प्रक्रिया जारी थी।

2 ग्राम पंचायत से चेक पर सरपंचों के ही दस्तखत होने चाहिए, मगर बीडीओ ने ही चेक पर काउंटर साइन किए, इससे बैंक से उठ गई राशि।

प्रधान को पता नहीं, अब एसीबी में की शिकायत

दवा छिड़काव के नाम पर 45 लाख से अधिक का भुगतान करने का मामला सामने आने पर अधिकांश पुराने तथा नए सरपंच सकते में आ गए हैं। पूर्व प्रधान सुमेरसिंह कुंपावत ने मामला गबन का मानते हुए एसीबी में शिकायत की है। कई जनप्रतिनिधियों ने संपर्क पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है।

पंचायतों के खाते में राशि आते ही कंपनी को मिली

मारवाड़ जंक्शन में 48 ग्राम पंचायतें हैं। यहां पर दवाई छिड़काव की जिम्मेदारी अजमेर की कंपनी को सौंपी गई। कंपनी ने मारवाड़ जंक्शन ग्राम पंचायत को भी 90 हजार का बिल थमाया है। मुख्यालय पर भी अधिकांश सरकारी भवनों पर दवा छिड़काव ही नहीं हुआ। इसके बाद भी बिल थमा दिया।

बीडीओ का बड़ा गड़बड़झाला : चेक पर कर दिए काउंटर साइन

3 गुपचुप हुए टेंडर, इसकी जानकारी पुराने या नए सरपंचों को भी नहीं दी, दवा कहां पर छिड़की, इसका ग्रामीणों तक को भी पता नहीं।

4 चेक जारी करने से पहले नए सरपंचों के निर्वाचन का इंतजार भी नहीं किया, ग्राम सेवकों को अपने दफ्तर में बुलाकर चेक जारी करवाए गए।




जिला परिषद की साधारण सभा में अनुमोदन के बाद ही सरकारी बिल्डिंगों में पेस्ट कंट्रोल कराया है। किसी तरह की अनियमितता नहीं बरती गई। कुछ पंचायतों से चेक जारी हुए हैं। कुछ के अभी नहीं हुए हैं। -किशनसिंह राठौड़, बीडीओ

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