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रणजी ट्रॉफी: सौराष्ट्र का 69 साल में पहला खिताब

एक वर्ष पहले
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बंगाल की टीम 14 बार फाइनल में पहुंची, सिर्फ दो बार फाइनल जीता

सौराष्ट्र ने पहली बार रणजी ट्रॉफी का खिताब जीत लिया है। बंगाल के खिलाफ टीम को पहली पारी में बढ़त के आधार पर जीत मिली। मैच के अंतिम और पांचवें दिन बंगाल ने पहली पारी में 6 विकेट पर 354 रन से आगे खेलना शुरू किया। टीम 381 रन बनाकर आउट हो गई। सौराष्ट्र ने पहली पारी में 425 रन बनाए थे। खेल खत्म होने पर सौराष्ट्र ने दूसरी पारी में 4 विकेट पर 105 रन बना लिए थे। सौराष्ट्र की टीम 1950-51 सीजन में पहली बार रणजी में उतरी थी। टीम ने 69 साल में पहली बार खिताब जीता। अंतिम दिन तेज गेंदबाज और कप्तान जयदेव उनादकट ने अनुस्तूप मजूमदार (63) को आउट किया। इसी ओवर में उनादकट ने आकाशदीप (0) को रन आउट कर टीम की वापसी कराई। अनुस्तूप ने अर्णव (40*) के साथ 7वें विकेट के लिए 98 रन की साझेदारी की। महेश कुमार (5) और पोरेल (1) के आउट होते ही पारी सिमट गई। सौराष्ट्र को पहली पारी के आधार पर 44 रन की बढ़त मिली।

बंगाल का फाइनल रिकॉर्ड सबसे खराब

बंगाल की टीम अब तक 14 बार फाइनल में पहुंची और सिर्फ दो बार खिताब जीत सकी। यानी सिर्फ 14 फीसदी। यह रणजी फाइनल में किसी टीम का सबसे खराब प्रदर्शन है। बंगाल ने अंतिम बार खिताब 1989-90 में जीता था।

उनादकट ने सबसे ज्यादा 67 विकेट लिए

जयदेव उनादकट ने सबसे ज्यादा 67 विकेट लिए। 7 बार 5 विकेट जबकि 3 बार 10 विकेट लिए। एक सीजन में सबसे ज्यादा विकेट लेने के मामले में उनादकट दूसरे पर हैं।

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