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रणथंभौर: चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन आज लेंगे बैठक

2 वर्ष पहले
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जयपुर | बीजेपी सरकार में शुरू की गई विवादित फुलडे-हाफडे सफारी को बंद करने के लिए आज वन विभाग में बैठक होनी है। मसला रणथंभौर में बेतहाशा टूरिज्म और उससे जनित कारोबार के बीच बाघों के संरक्षण से जुड़ा है। चूंकि पूरा टूरिज्म बाघों पर ही निर्भर है, ऐसे में पहले उनका संरक्षण, निजता, जंगल के कायदों का पालन कराने की प्राथमिकता का है। प्रदेश से लेकर देशभर के बाघ एक्सपर्ट और सरकार में बड़े ओहदों पर रहे अधिकारियों ने एकसुर में दिनभर चलने वाली गाड़ियों को बंद करने की हिमायत की है। हालांकि इस फैसले को लागू कराकर पोषित करते आ रहे गिनती के चार-पांच बड़े होटल मालिक और उनके साथ खड़े लोगों ने जैसे-तैसे इसे लागू करने की कोशिशें भी शुरू कर दी है। रणथंभौर सहित सरकार से जुड़े बड़े अधिकारियों तक सिफारिशें पहुंची है। अब अगर बीजेपी सरकार के फैसले को लागू रखने या बचाव की कोई गली निकाली जाती है तो इसके पीछे सिर्फ यही एक कारण होगा, अन्यथा कांग्रेस सरकार के मौजूदा अधिकारी पहले ही एक्सपर्ट और पूर्व अधिकारियों की राय पर जंगल को जू की तरह दिनभर बाघ दर्शन के फैसले बदलने की बात कह चुके।

बाघ संरक्षण को परे रख टूरिज्म लॉबी के लिए शुरू हुई दिनभर की सफारी पर फैसले की घड़ी

बाघों की सुरक्षा पर अमीरों के शौक भारी, शह देने के लिए गली निकालने की तैयारी

दिनभर की सफारी के लिए 5 गाड़ी जाती है। 365 दिन इसकी बुकिंग के लिए खुले रहते हैं। गिनती के 5-6 बड़े होटलों से ही इस विवादित सफारी की बुकिंग रहती आई है। इस फैसले के पीछे कुछ अधिकारियों को हित भी पोषित होते हैं। अब रणथंभौर सहित कुछ अन्य बड़े अधिकारियों के साथ इस फैसले के लिए गली निकालने की बातें चर्चा में है। कुछ समय से गुपचुप हुई उनकी बैठकों की बातें वायरल है। एेसे में फैसले को बरकरार रखने के रास्ते भी सुझाए गए हैं। मसलन एक नंबर से छह नंबर जोन के अलग 10 नंबर या करौली तक सफारी मंजूरी दी जाए। या फिर बुकिंग को 90 दिन तक कर लिया जाए, ताकि जैसे-तैसे इसकी आड़ में हित साधे जा सकें।

पूर्व मंत्री से लेकर वाइल्ड लाइफ विशेषज्ञ और अधिकारी जता चुके इसका विरोध

विरोध के तर्क: मसला बाघ और जंगल सुरक्षा का है। जबकि फुल डे-हाफ डे सफारी उनसे जनित कारोबार को शह देती है। बाघों को दिनभर व्यवधान से खतरा है, दिनभर जानी वाली गाडिय़ां उनकी निजता का हनन कर रही है। जंगल को जू की तरह ट्रीट नहीं करना चाहिए।

विरोध करने वालों में:

राजनेता: पूर्व वनमंत्री बीना काक, एक्सपर्ट: हर्षवर्धन, मिनी संपतराम, नल्ला मुत्थु, दिनेश दुर्रानी

अफसर: राजेश गोपाल, यूएम सहाय, वी डी शर्मा, सुनयन शर्मा, कारोबार से जुड़े: गाइड और गाड़ी एसोसिएशन आदि

दिनभर की सफारी सहित रणथंभौर के टूरिज्म से जुड़े मसलों पर बैठक है। फुलडे-हाफ डे सफारी पर पहले से कुछ आपत्तियां हैं। फिलहाल इसे जारी रखने की किसी तरह की सिफारिश जैसी बात नहीं है। सभी पक्षों के साथ ही निर्णय लिया जाएगा। -अरिंदम तोमर, चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन

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