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सीईटीपी के 3 पूर्व अध्यक्ष, निदेशकों व उद्यमियों की फैक्ट्रियों के सैंपल फेल

एक वर्ष पहले
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देश पर राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल की 60 अधिकारियों की टीम द्वारा शहर की फैक्ट्रियों के किए गए निरीक्षण की रिपोर्ट की दूसरी रिपोर्ट आने के बाद 52 बड़े प्रोसेस हाउसों को नोटिस जारी कर कहा कि क्याें न उनके खिलाफ 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया जाए। यह सभी 52 फैक्ट्रियां लामेला तकनीक से जुड़े होने का दावा करने वाली है। चौंकाने वाली बात तो यह है कि सीईटीपी फाउंडेशन के तीन पूर्व अध्यक्ष, पूर्व उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष तथा कई निदेशक समेत प्रमुख औद्योगिक घराने ही अपने यहां पानी को निर्धारित मानक पर ट्रीट नहीं कर सीधा ही ट्रीटमेंट प्लांट में छोड़ रहे थे। प्रदूषण बोर्ड ने इन फैक्ट्रियों में जाकर नोटिस तामील करवाकर 13 मार्च तक जवाब देने के आदेश दिए हैं। नोटिस में साफ कहा गया है कि उनके खिलाफ नियमों का उल्लंघन का दोषी मानते हुए 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया जा सकता है।

जानकारी के अनुसार एनजीटी ने प्रदूषण नियंत्रण मंडल को शहर की सभी फैक्ट्रियों में सघन निरीक्षण करने के आदेश दिए थे। इसके बाद प्रदेशभर से पहुंचे 60 अधिकारियों की 30 टीमों ने 3 दिन यानी 6, 7 तथा 8 जनवरी को पाली में ही पड़ाव डालकर सभी 569 फैक्ट्रियों का निरीक्षण किया था। इसकी पूर्व में एक रिपोर्ट आ चुकी है।

इनकी फैक्ट्रियों में दिखावे के तौर पर लगा था लामेला

सुरेश गुप्ता, पूर्व अध्यक्ष व वर्तमान कोषाध्यक्ष, सीईटीपी

अनिल मेहता, पूर्व अध्यक्ष व वर्तमान निदेशक, सीईटीपी

प्रवीण कोठारी, पूर्व अध्यक्ष, सीईटीपी फाउंडेशन

प्रकाश गुंदेचा, निदेशक, सीईटीपी फाउंडेशन

सोहनलाल बालड़, पूर्व उपाध्यक्ष, सीईटीपी फाउंडेशन

शांतिलाल गुलेच्छा, अध्यक्ष, औद्योगिक क्षेत्र 1-2 संगठन

नवीन मेहता, पूर्व निदेशक, सीईटीपी फाउंडेशन

रवि मोहन भूतड़ा, पूर्व निदेशक, सीईटीपी फाउंडेशन

रहूफ खान, पूर्व निदेशक, सीईटीपी फाउंडेशन

सतीश कुमार मूंदड़ा, पूर्व निदेशक, सीईटीपी फाउंडेशन

विमलचंद, पूर्व निदेशक, सीईटीपी फाउंडेशन

पीयूष गोगड़, प्रमुख उद्यमी

भंवरलाल नाहटा, प्रमुख उद्यमी

महेंद्र बोहरा, इनके परिवार की फैक्ट्री

सुनील कवाड़, प्रमुख उद्यमी

प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने दिया नोटिस, 13 तक जवाब मांगा

राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने शुक्रवार देर शाम को लामेला तकनीक से जुड़ी कुल 97 में से 52 फैक्ट्रियों के नाम पर नोटिस जारी कर कर उनसे 13 मार्च तक बोर्ड के समक्ष जवाब देने को कहा है। नोटिस में साफ तौर पर कहा गया है कि वे लामेला तकनीक से निर्धारित मानक पर पानी को ट्रीट नहीं कर रहे हैं।

यह प्रदूषण नियंत्रण मंडल के निरीक्षण करने के बाद की कार्रवाई है। प्रदूषण नियंत्रण सभी की प्राथमिकता में शामिल होना चाहिए। बड़े प्रोसेस हाउस संचालित करने वालों को तो कम से कम अपने मानक निर्धारित रखने चाहिए।
- दिनेशचंद जैन, कलेक्टर

बोर्ड ने 52 फैक्ट्रियों को नोटिस जारी किया है। उनसे कहा है कि क्यों न उन पर 10 लाख का जुर्माना लगाया जाए। इनमें निरीक्षण के दौरान पानी को निर्धारित मानक पर ट्रीट नहीं करना मिला था। नोटिस में 13 मार्च का जवाब मांगा है।
-अमित शर्मा, आरओ, प्रदूषण नियंत्रण मंडल

इन फैक्ट्रियों के नाम जारी हुए नोटिस, हाथोंहाथ साइन कराए

संगम प्राेसेस, अानंद डिजाइनिंग कंपनी, श्री प्रिंट्स प्रथम व द्वितीय यूनिट, गणधर गाैतम फेब टैक्स प्राइवेट लिमिटेड, धनलक्ष्मी मिल्स, उषा प्राेसेस, मणिधारी टैक्सटाइल प्रा.लि., शांति टैक्सटाइल इंडस्ट्री, कवाड़ फ्रेबिक्स, पीपी प्राेसेस, ज्याेति फ्रेबिक्स, श्रीकांत प्राेसेसर्स प्राइवेट लिमिटेड, माेहित इंडस्ट्री, ब्लू-चिप फ्रेबिक्स प्राइवेट लिमिटेड, पूजा फेब. टैक्स प्राइवेट लिमिटेड, श्री पदमावती डाइंग, शुभम ब्लीचिंग, नरेश टैक्सटाइल, महावीर प्राेसेस, गणेश टैक्सटाइल, अग्रवाल टैक्सटाइल इडंस्ट्रीज, साेनू टैक्सटाइल, श्रीराजाराम प्रिंट्स प्राइवेट लिमिटेड, एमडी प्राेसेस हाउस, नवीन मेहता, रुपाली हेड प्राेसेस, नाहटा फ्रेबिक्स लिमिटेड, जेके प्रिंटर्स, पंकज कुमार मूंदड़ा एंड कंपनी, एमजी ग्रुप, माइको मिल्स, मानवी मिल्स, विनाेद इडंस्ट्रीज, बालाजी प्राेसेस, कलावती फ्रेबिक्स प्राइवेट लिमिटेड, ख्वाजा डाइंग कंपनी, विजय अानंद टैक्सटाइल, फैशन फेब्रिक्स, मेहता ग्रुप अाॅफ इंडस्ट्रीज, प्रीमियर इडंस्ट्रीज, श्रीराजाराम मिल्स, श्रीभैरव फिनिशिंग वर्क्स, जय जगदंबा प्राेसेस, डीके प्राेसेस प्राइवेट लिमिटेड, भारत विजय इंडस्ट्रीज, राजस्थान इंडस्ट्रीज, साेनू डाइंग एंड प्रिंटिंग वर्क्स, छीपा याकूब- इब्राहीम, छीपा शब्बीर इकबाल, प्रकाश प्रिंटर्स इंडिया व पदमावती डाइंग।

कलेक्टर कह चुके... बड़े मठाधीश खुद की फैक्ट्रियां बचाने सीईटीपी में आते हैं

5

पानी को न्यूट्रल करने लाइम का उपयोग ही नहीं, पॉली तथा एसिड के जरीकेन भी खाली मिले, इससे लामेला तकनीक मात्र दिखावे भर की ही।

4

पानी का पीएच मेंटेन नहीं होने से ट्रीटमेंट प्लांट की क्वालिटी पर असर, इससे निर्धारित मानक पर पानी ट्रीट नहीं हो पाता।

3

टीएसएस की मात्रा भी ज्यादा, इससे बांध व नदी में खराबे के साथ ही खेतों में भी जमीन की नस्ल बर्बाद होती है।


2

पानी में कॉपर मिला, इससे जमीन में खराबा होने के साथ ही फसलों पर भी असर पड़ता है। जनजीवन पर भी विपरीत असर होता है।


1

रंगीन पानी में ही हैवी मेटल पाया गया, यह नदी-नालों के पानी में घुलता नहीं, इसके रसायन से जमीन की उर्वरा खत्म होती है।
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