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गुजरात के स्कूलों ने पैरेंट्स को लिखा- दिवाली की छुटि्टयों में बच्चों को धूल में जी भर नंगे पांव खेलने दें ताकि वे मजबूत बनें

Pali News - देशभर के स्कूलों में दिवाली की छुटि्टयां आज से शुरू हो जाएंगी। दिवाली के उपलक्ष्य में गुजरात में तीन सप्ताह की...

Oct 25, 2019, 06:56 AM IST
Bar News - rajasthan news schools in gujarat wrote to parents let the children play barefoot in the dust during the diwali holidays so that they become strong
देशभर के स्कूलों में दिवाली की छुटि्टयां आज से शुरू हो जाएंगी। दिवाली के उपलक्ष्य में गुजरात में तीन सप्ताह की छुटि्टयां होती हैं। लेकिन इस बार गुजरात में बच्चों को मजबूत इंसान बनाने के उद्देश्य से किताबी ज्ञान से हटकर कुछ अलग रचनात्मक होमवर्क दिया जा रहा है। कई स्कूल तो अभिभावकों को पत्र लिख रहे हैं कि बच्चों को उनके पैतृक गांव में धूल में नंगे पैर खेलने दें, गिरने दें ताकि बच्चे जीवन में गिर कर उठ खड़े होने का गुर सीख सकें। कुछ स्कूल विद्यार्थियों को क्रिएटिव होमवर्क भी दे रहे हैं। इसमें बच्चों से कहा जा रहा है कि वह अस्पताल, ग्राम पंचायत, वृद्धाश्रम, पुलिस थाने जाकर देखें कि वहां काम के दौरान किस तरह की परेशानी आ रही है। वहीं कुछ स्कूल होमवर्क में बच्चों से निबंध लिखवा रहे हैं कि- आपके पैरेंट्स जो काम कर रहे हैं, उसमें उन्हें आनंद आ रहा है या नहीं।

सूरत के एक स्कूल ने विद्यार्थियों के माता-पिता को पत्र लिखा है। इसमें नैतिक आधार को बल देने वाली सीखें याद दिलाई गई हैं। पत्र में कहा गया है- ‘यह पत्र आपके बच्चों की शिकायत के लिए नहीं बल्कि उनके विकास और श्रेष्ठ जीवन निर्माण के बारे में कुछ सुझाव के लिए है। जब स्कूल खुले होते हैं, तब बच्चे लगातार पढ़ाई-लिखाई में व्यस्त होते हैं। छुटि्टयों का वक्त ही ऐसा होता है जिसे बच्चे और अभिभावक साथ-साथ बिताते हैं। माता-पिता को बच्चों के साथ समय बिताना चाहिए, यह उनका कर्तव्य है। बच्चे पूरे साल एकाग्रता के साथ पढ़ते ही हैं इसलिए छुटि्टयों के दौरान इन्हें दिल खोल कर खेलने-कूदने दें। आपका बच्चा क्या करता है इसकी बजाय आप यह जानने की कोशिश करें कि आप खुद क्या कर सकते हैं? यह बच्चों को भी बताएं। बच्चे की अच्छी बातों की सराहना करें और उन्हें प्रोत्साहित करें। पक्षियों की चहचहाहट के बिना जैसे सुबह और शाम सूनी लगती है, उसी तरह बच्चों की उछलकूद के बिना छुटि्टयों में घर सूना लगता है। इसलिए बच्चों के शौक-विचारों के बारे में जानें, उनमें नए विचार पैदा करें, उनकी जिज्ञासा बढ़ाने के लिए वह जो सवाल पूछें, उनके जवाब देें।

निबंध लिखवाकर माता-पिता के कामकाज के बारे में पूछा जा रहा

शिक्षक बोले- होमवर्क यानी कॉपी में लिखकर लौटा देना ही नहीं होता

स्वामीनारायण एच. विद्यालय के अध्यापक केतन व्यास ने बताया कि होमवर्क दिए जाने पर विद्यार्थी सिर्फ लिख कर लौटा देते हैं। इसलिए लिखने की जगह प्रैक्टिकल ज्ञान दिया जाए तो विद्यार्थियों को मजा आएगा। इसलिए हमने कोई होमवर्क नहीं दिया है। हमारी कोशिश है कि बच्चे छुटि्टयों में पौधे लगाए, स्वच्छता, बिजली-पानी की बचत सीखे, परिवार का प्यार और बड़ों का आशीर्वाद पाए।

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