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पार्टी छोड़ने से पहले राहुल और सोनिया से मिलना चाहते थे सिंधिया, वक्त नहीं दिया गया

एक वर्ष पहले
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सिंधिया इकलौते शख्स जो कभी भी मेरे घर आ सकते थे: राहुल

कभी कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के बेहद करीबी रहे पूर्व मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा में चले गए। इसके कई कारण बताए जा रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट में दावा है कि सिंधिया ने पार्टी छोड़ने से पहले कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल से मिलने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें समय नहीं दिया गया। हालांकि, राहुल ने कहा कि सिंधिया इकलौते ऐसे शख्स थे, जो उनके घर कभी भी आ सकते थे। सिंधिया ने इस्तीफे की चिट्‌ठी ट्वीट की, पर किसी प्रमुख कांग्रेस नेता ने उन्हें वापस लाने की कोशिश नहीं की। उल्टा कांग्रेस ने निकाल दिया।

कांग्रेस नेता सिंधिया ने क्यों छोड़ी पार्टी

{भाजपा का अगला दांव पुड्‌डुचेरी: 33 सीटों की पुड्‌डुचेरी विधानसभा में भाजपा के 3 मनोनीत सदस्य हैं। वह एनडीए दलों एआईएनआरसी, एआईएडीएमके के जरिए कांग्रेस नेतृत्व सरकार को चुनौती दे सकती है।

सीटें: कांग्रेस: 15, डीएमके: 3, निर्दलीय: 1; एनडीए: 11

यशोधरा राजे सिंधिया

1994 से भाजपा में। मप्र सरकार में मंत्री भी रहीं।

{माधव राव ने मां विजया राजे की तरह जनसंघ से राजनीति शुरू की थी। बहनें वसुंधरा, यशोधरा शुरू से भाजपा में।

दुष्यंत सिंह

2004 से लगातार भाजपा सांसद। वसुधरा के बेेटे हैं।

वसुंधरा राजे सिंधिया

1984 से भाजपा में। राजस्थान की मुख्यमंत्री रहीं।

ज्योतिरादित्य सिंधिया

2001 से 10 मार्च 2020 तक कांग्रेस में। अब भाजपा में।

माधवराव सिंधिया

7 साल जनसंघ में। कांग्रेस में 19 साल। 2 साल अपनी पार्टी।

तीन मोड़, जो नए रास्ते पर सिंधिया को ले गए

{सीएम बनने की होड़: केंद्र में कांग्रेस कमजोर हुई तो 2018 में सिंधिया, कमलनाथ मध्यप्रदेश की राजनीति में सक्रिय हुए। कमलनाथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष, सिंधिया चुनाव अभियान प्रमुख बनाए गए। कांग्रेस चुनाव जीती तो कमलनाथ सीएम बने। सिंधिया भी सीएम बनना चाहते थे।

{प्रदेशाध्यक्ष पद: लोकसभा चुनाव से पहले सिंधिया प्रदेश अध्यक्ष बनना चाहते थे, लेकिन उन्हें पश्चिमी यूपी का प्रभारी बनाया गया। इधर वह गुना में हार गए।

{राज्यसभा सीट: सिंधिया राज्यसभा सीट चाहते थे। सूत्र कह रहे हैं कि कांग्रेस नेताओं ने इसमें बाधा डाली। जबकि भाजपा ने मंजूरी दे दी।

विजया राजे सिंधिया: कांग्रेस से 1957 में शुरुआत। 1967 में जनसंघ होकर अंत तक भाजपा में।
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