बिना अहंकार बताएं अपनी योग्यता

Pali News - कहते हैं जो अपनी तारीफ करता है, मैं ऐसा कर सकता हूं-वैसा कर सकता हूं, मेरे लिए कोई काम मुश्किल नहीं..., ये सारे उद्घोष...

Bhaskar News Network

Jun 18, 2019, 09:55 AM IST
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कहते हैं जो अपनी तारीफ करता है, मैं ऐसा कर सकता हूं-वैसा कर सकता हूं, मेरे लिए कोई काम मुश्किल नहीं..., ये सारे उद्घोष कहीं न कहीं अहंकार की झलक देते हैं। लेकिन, हनुमानजी एक नई बात सिखाते हैं कि जब वातावरण में निराशा हो तो ऐसे संवाद अहंकार नहीं, आत्मविश्वास बनकर सामने आते हैं। मनुष्य को अपने बल का ज्ञान होना चाहिए, लेकिन उससे अधिक समझ इस बात की होना चाहिए कि किन स्थितियों में उस बल को प्रदर्शित करें, उसका बखान करें। सुषेण ने हनुमानजी से कहा था औषधि आप ले आएं। हनुमानजी तैयार हो गए...। तुलसीदासजी ने लिखा- ‘राम चरन सरसिज उर राखी। चला प्रभंजनसुत बल भाषी।। रामजी के चरण कमलों को हृदय में रखकर पवनपुत्र अपना बल बखानकर (मैं अभी ले आता हूं, ऐसा कहकर) चले। इसे पढ़कर लगता है हनुमानजी ने अपने बल का बखान किया, लेकिन इसके पहले एक बात और आई है कि उन्होंने रामजी के चरण अपने हृदय में रखे। सीधा अर्थ है विनम्रता के साथ परमात्मा को हृदय में रखकर अपनी बात कही। जीवन में कभी ऐसा अवसर आए कि अपनी प्रशंसा करना हो, अपनी योग्यता प्रदर्शित करना हो तो उससे पहले हृदय में परमात्मा को उतारें। जो अपने भीतर की यात्रा करता है, वह जब बाहर के काम करता है तो उसमें अहंकार नहीं होता। अपनी योग्यता बताने में पीछे न हटें, पर सहारा अहंकार का नहीं, आत्मविश्वास की आवश्यकता का लें..।

 

पं. िवजयशंकर मेहता

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