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टोल प्लाजा पर पुलिस व आरटीओ की नाकाबंदी थी, फिर भी दोनों बसें बेरोकटोक वहां से निकली, 5 किमी दूरी पर ही भिड़ गई

3 वर्ष पहले
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सांडेराव थाना क्षेत्र के केनपुरा सरहद में फ्लाईओवर की ढलान पर बुधवार सुबह 6.10 बजे निजी ट्रेवल्स की दो बसों की भिड़ंत महज एक हादसा नहीं, बल्कि बस चालकों की लापरवाही का नतीजा था। यह बात खुद यात्रियों ने बताई कि दोनों बस के चालक सवारियां भरने की होड़ में आबूरोड से तेज रफ्तार में आगे-पीछे बस चला रहे थे।

सिरोही के ढाबे पर उनमें इसी बात को लेकर झगड़ा भी हुआ, लेकिन इसके बावजूद सवारियां भरने की होड़ दोनों चालकों के बीच होती रही, जिससे दोनों बसें आगे-पीछे टकरा गई। इस हादसे में 8 लोगों की मौत और 28 लोग घायल हो गए। इस हादसे में बस चालक तो प्रत्यक्ष तौर पर जिम्मेदार है, लेकिन अप्रत्यक्ष तौर पर पुलिस व परिवहन विभाग भी इसलिए जिम्मेदार है, क्योंकि सिरोही जिले से लेकर पाली जिले की सीमा तक यदि पेट्रोलिंग करने वाली टीमें ओवर स्पीड में बस चलाने से चालकों को रोकते या टोकते तो संभवत: 8 जिंदगी बचाई जा सकती थी। हादसे के दूसरे दिन भी आरटीओ विभाग तो यह भी नहीं बता पाया कि दोनों बस के रूट परमिट कहां से कहां तक के लिए थे। उनका पंजीयन किसके नाम से है तथा परमिट की शर्तों का उल्लंघन कर बस में जगह-जगह से सवारियां कैसे बैठाई जा रही थी। पुलिस भी दूसरे दिन यह पता नहीं लगा पाई कि बस हादसे के बाद दोनों के चालक व अन्य स्टाफ भाग कर कहां गए और वे लोग कौन थे। कहीं ऐसा तो नहीं कि ट्रेवल्स एजेंसी बीमा क्लेम से बचने के लिए पुलिस में दर्ज मामले में असली चालक के बजाय किसी ओर चालक का नाम बताना चाहती है।

पुलिस व परिवहन विभाग निभाते जिम्मेदारी तो टल सकता था हादसा
परिवहन विभाग की लापरवाही
1. दूसरे दिन भी विभाग यह जानकारी नहीं जुटा पाया कि दोनों बसों में सवार 8 लोगों की मौत हुई और 28 लोग घायल हुए। इन दोनों बसों के परमिट किस रूट का था और वे तय परमिट से नहीं गुजरी। परमिट का उल्लंघन कर चालकों ने जगह-जगह से सवारियां कैसे बैठाई।

2. भारी वाहनों से वसूली के लिए एक उड़न दस्ता बिरामी टोल प्लाजा पर दिन-रात तैनात रहता है, लेकिन उनकी नजर भी तेज रफ्तार में निकली इन बसों पर क्यों नहीं पड़ी। आरटीओ जेपी बैरवा ने तो दूसरे दिन भी इन सवालों का जवाब देने के बजाय मोबाइल नो रिप्लाई कर दिया।

हद ही हो गई... दूसरे दिन पुलिस के पास घायलों की सूचना भी नहीं थी
केनपुरा बस हादसे में 8 लोगों के शव पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिए। मगर 28 लोग घायल हुए थे, जिनमें पांच लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई थी। मगर 23 लोग बुधवार शाम तक पाली, रानी व जोधपुर में भर्ती थे। दूसरे दिन गुरुवार रात तक कितने घायल अस्पताल में भर्ती थे और कितनों को छुट्टी दे दी गई। इस बारे में भी कोई जानकारी सांडेराव एसएचओ धौलाराम के पास नहीं थी।

भास्कर संवाददाता | पाली

सांडेराव थाना क्षेत्र के केनपुरा सरहद में फ्लाईओवर की ढलान पर बुधवार सुबह 6.10 बजे निजी ट्रेवल्स की दो बसों की भिड़ंत महज एक हादसा नहीं, बल्कि बस चालकों की लापरवाही का नतीजा था। यह बात खुद यात्रियों ने बताई कि दोनों बस के चालक सवारियां भरने की होड़ में आबूरोड से तेज रफ्तार में आगे-पीछे बस चला रहे थे।

सिरोही के ढाबे पर उनमें इसी बात को लेकर झगड़ा भी हुआ, लेकिन इसके बावजूद सवारियां भरने की होड़ दोनों चालकों के बीच होती रही, जिससे दोनों बसें आगे-पीछे टकरा गई। इस हादसे में 8 लोगों की मौत और 28 लोग घायल हो गए। इस हादसे में बस चालक तो प्रत्यक्ष तौर पर जिम्मेदार है, लेकिन अप्रत्यक्ष तौर पर पुलिस व परिवहन विभाग भी इसलिए जिम्मेदार है, क्योंकि सिरोही जिले से लेकर पाली जिले की सीमा तक यदि पेट्रोलिंग करने वाली टीमें ओवर स्पीड में बस चलाने से चालकों को रोकते या टोकते तो संभवत: 8 जिंदगी बचाई जा सकती थी। हादसे के दूसरे दिन भी आरटीओ विभाग तो यह भी नहीं बता पाया कि दोनों बस के रूट परमिट कहां से कहां तक के लिए थे। उनका पंजीयन किसके नाम से है तथा परमिट की शर्तों का उल्लंघन कर बस में जगह-जगह से सवारियां कैसे बैठाई जा रही थी। पुलिस भी दूसरे दिन यह पता नहीं लगा पाई कि बस हादसे के बाद दोनों के चालक व अन्य स्टाफ भाग कर कहां गए और वे लोग कौन थे। कहीं ऐसा तो नहीं कि ट्रेवल्स एजेंसी बीमा क्लेम से बचने के लिए पुलिस में दर्ज मामले में असली चालक के बजाय किसी ओर चालक का नाम बताना चाहती है।

पुलिस विभाग की यह रही चूक
1. बिरामी टोल प्लाजा पर सांडेराव थाने के अलावा हाईवे पेट्रोलिंग व फ्लाइंग दल भी तैनात रहता है, लेकिन पुलिस ने तेज रफ्तार बसों को रुकवा कर चालकों को पाबंद नहीं कराया। उस समय ड्यूटी पर कौन तैनात था, जिसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, क्योंकि वे कार्रवाई करते तो दोनों बस में सवार 8 लोगों की जान बच सकती थी।

2. जिन दो बस से हादसे हुए, वे किसी ट्रेवल्स कंपनी की थी। दुर्घटना के समय उन बस पर चालक कौन थे, जो हादसे के बाद फरार हो गए। क्या चालक दक्ष थे अथवा खलासी के हाथ में स्टेयरिंग थी, दूसरे दिन भी पुलिस इसका भी पता नहीं लगा पाई। जाहिर है कि ट्रेवल्स कंपनी अपने चालक बदल कर पुलिस के सामने पेश कर सकते हैं। सांडेराव एसएचओ धौलाराम का रटा-रटाया जवाब है कि जांच कर इसका पता लगाया जाएगा।

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