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इस बार पाली जिले काे मिल सकती है 12 से ज्यादा नई ग्राम पंचायतें अाैर एक पंचायत समिति

एक वर्ष पहले
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राज्य सरकार ने नगर निकायाें के बाद अब पंचायतीराज संस्थाअाें के पुनर्गठन व परिसीमन के अादेश जारी कर दिए। 2014 में भाजपा की सरकार ने 1991 के बाद पंचायतीराज संस्थाअाें का पुनर्गठन कराया था। इसमें पाली जिले काे एक नई ग्राम पंचायत बासाेर मिली थी। इस बार राज्य सरकार की अाेर से नियमाें में राहत भी दी गई है। एेसे में पाली में इस बार कई नई ग्राम पंचायताें का गठन हाे सकता है। वर्तमान मंे जिले में 321 ग्राम पंचायते हैं। एेसे मंे नई ग्राम पंचायतें बनाने से लेकर सीमांकन या पुनर्गठन काे लेकर भी इस बार अादेश जारी किए गए हैं। जिले में 59 ग्राम पंचायताें का टूटना तय है। इन ग्राम पंचायताें के अधीन अाने वाले गांवाें में से नई ग्राम पंचायताें का गठन हाेगा। अन्य ग्राम पंचायताें मंे शामिल हाेगी। जनवरी-फरवरी 2020 में पंचायतीराज संस्थाअाें के चुनाव प्रस्तावित है। एेसे में सितंबर तक इसकी पूरी प्रक्रिया भी हाे जाएगी।

227 ग्राम पंचायतें एेसी है जिनकी जनसंख्या 4 हजार से भी कम है : जिले मंे 321 ग्र्राम पंचायताें मंे से 227 ग्राम पंचायते एेसी है। जिनकी जनंसख्या 4 हजार से कम है। एेसे में इन ग्राम पंचायताें में अन्य गांवाें काे जाेडा जा सकता है। या फिर हटाया जा सकता है। 2014 में 5 नई ग्राम पंचायताें व 9 के पुनर्गठन के प्रस्ताव भेजे थे। इसमें एक ही नई ग्राम पंचायत गठित हुई थी।

किसी गांव की जनसंख्या 4 हजार है ताे नई पंचायत के लिए भेजा जाएगा प्रस्ताव : राजस्थान में पंचायतीराज संस्थाओं का पुनर्गठन 2014 में किया गया था। इससे पहले 1991 में किया गया था, जिसमें 1981 की जनगणना को आधार बनाया गया था। इसके तहत ग्राम पंचायत के लिए कम से कम दो हजार और अधिकतम पांच हजार की जनसंख्या को आधार माना गया था। साथ ही पंचायत मुख्यालय से अंतिम छोर के गांव की दूरी आठ किमी तय की गई थी। एक पंचायत में अधिकतम 15 वार्ड तय किए गए थे।

2014 में यह था परिसीमन का अांकडा इसलिए, सिर्फ एक ही पंचायत बनी: 2014 में भाजपा सरकार ने परिसीमन कराया। इस पर न्यूनतम 5 हजार की जनसंख्या रखी गई। वही अधिकतक 7 हजार 500 की जनसंख्या काे अाधार माना गया।

नई ग्राम पंचायताें के प्रस्ताव के लिए यह चार शर्तें जरूरी

पहली पुनर्गठन, पुन:सीमांकन, नवसृजन के प्रस्ताव तैयार करने के लिए न्यूनतम जनसंख्या 4 हजार व अधिकतम 6 हजार 500 रखी जाएगी।

पंचायत समिति के लिए यह शर्तें अावश्यक

पहली : 40 या अधिक ग्राम पंचायताें की संख्या, 2 लाख से अधिक अाबादी ताे पुनर्गठन, पंचायत समिति में न्यूनतम 25 ग्राम पंचायतें।

दूसरी : काेई भी ग्राम पंचायत दाे पंचायत समितियाें के अधीन विभाजित नहीं हाेगा, यानी, ग्राम पंचायत 1 ही पंचायत समिति में हाेगी।

तीसरी : पंचायत समिति में वार्डाे की संख्या न्यूनतम 15 हाेगी

दूसरी : किसी ग्राम के निवासियाें की मांग व प्रशासनिक दृष्टि से एेसे ग्रामाें काे वर्तमान ग्राम पंचायत से दूसरी ग्राम पंचायत में शामिल किया जा सकता है, परंतु उस गांव की दूरी दूसरी नई ग्राम पंचायत के मुख्यालय से 8 किमी से अधिक नही हाे।

तीसरी : राज्य के अनुसूचित व मरुस्थलीय क्षेत्राें के लिए दूरी का निर्धारण करने के लिए कलेक्टर प्रशासनिक व व्यवहारिक दृष्टिकाेण से स्वयं निर्णय ले सकेंगे।

यह कार्यक्रम

कलेक्टर द्वारा नई ग्राम पंचायताें व समितियाें के प्रस्ताव व प्रकाशन : 15 जून से 14 जुलाई तक

अापतियाें के लिए समय : 15 जुलाई से 13 अगस्त, अाॅपतियाें की सुनवाई 23 अगस्त तक

अापतियाें के बाद प्रस्ताव भिजवाने : 24 अगस्त से 2 सितंबर तक

चौथी : किसी भी राजस्व ग्राम काे विभाजित कर दाे पंचायताें में नहीं रखा जाएगा। संपूर्ण राजस्व गांव एक ही पंचायत में रहेगा।

35 गांवाें की जनसंख्या 4 हजार से अधिक व 6500 से कम, इसमें ज्यादातर यथावत रहेगी

गुंदाेज 5157, गुडा एंदला 4023, हेमावास 4012, खैरवा 5500, खीमेल 4272, लुणावा 5724, बिसलपुर 5520, भाटूंद 5178, काेयलावाव 5009, अाउवा 4122, बांता 4602, मांडा 4038, राणावास 4308, बाबरा 4124, देवली कलां 6434, कानूजा 4121, झूंठा 4086, बांकली 5858, चाणाैद 5644, दुजाना 5799, बलवाना 4697, खिवांदी 5535, बलाना 4325, भारुंदा 4070, नाैवी 4260, कुडकी 4132, निंबाेल 5431, बलाडा 6214, राबडियावास 5380, अटबडा 5939, सांडिया 4136, बिजाेवा 5759, चांचाेडी 4212, खिंवाडा 5799, रानी गांव 4705।

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