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हम कब यह समझेंगे कि औरत की मर्जी के खिलाफ हर संबंध दुष्कर्म है

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 10:25 AM IST

Pali News - हम औरतें रोज सुबह उठती हैं और मनाती हैं कि आज किसी पुरुष के असंवेदनशील चेहरे का सामना न हो। जब से समझ आई, चेतना आई,...

Rajasthan News - rajasthan news when will we understand that every relation against the will of the woman is a crime
हम औरतें रोज सुबह उठती हैं और मनाती हैं कि आज किसी पुरुष के असंवेदनशील चेहरे का सामना न हो। जब से समझ आई, चेतना आई, भेदभाव को पहचानने की नज़र आई, तब से यही होता आ रहा है। उम्मीद है कि जाती नहीं और नई रोशनी है कि आती नहीं। अलीगढ़ में हुई ढाई साल की बच्ची की बर्बर हत्या के बाद उस दिन भी सुबह अखबार खोलते हुए यही सोचा होगा कि अब इस पर कोई बकवास न करे। लेकिन हुआ यही कि एक नेता ने मुंह खोला और भर-भरकर मूर्खता और असंवेदनशीलता को उड़ेलकर रख दिया। यूपी सरकार में जल संसाधन, वन और पर्यावरण मंत्री, स्वतंत्र प्रभार उपेंद्र तिवारी दुष्कर्म को दुष्कर्म कहकर संतुष्ट नहीं थे। वो तो यह मानने को भी राजी नहीं थे कि हर दुष्कर्म, दुष्कर्म ही होता है। जैसे स्कूल में टीचर जी हर चीज के प्रकार बताया करते थे, तिवारी जी ने पत्रकारों को दुष्कर्म के प्रकार और प्रकृति समझाना शुरू कर दिया। वे बोले, ‘दुष्कर्म का नेचर होता है, अब जैसे कोई नाबालिग लड़की है, उसके साथ दुष्कर्म हुआ है तो उसको तो हम दुष्कर्म मानेंगे, लेकिन कहीं-कहीं यह भी सुनने में आता है कि कोई विवाहित महिला है, उम्र 30-35 साल या इससे ज्यादा है उनके साथ दुष्कर्म हुआ है।’

यानी उम्र 30 के ऊपर है, मेरिटल स्टेटस शादीशुदा है तो उसके साथ दुष्कर्म नहीं हो सकता। हो भी गया तो उसे दुष्कर्म नहीं माना जाएगा। बच्ची के साथ हो, नाबालिग के साथ हो, अविवाहित के साथ हो तो वो दुष्कर्म है, उम्रदराज के साथ हो, बालिग के साथ हो, विवाहित के साथ हो तो दुष्कर्म नहीं है। क्या अचम्भा होगा इस बात पर कि इस देश में मेरिटल रेप को दुष्कर्म मानने में अभी शायद सौ साल लगेंगे। राजस्थान में जब भंवरी देवी के साथ दुष्कर्म हुआ तो लोअर कोर्ट के जज ने कहा कि कोई चाचा अपने भतीजे के सामने ऐसी हरकत नहीं कर सकता। ये हमारे संस्कारों में नहीं। लिहाजा हम नहीं मानते कि दुष्कर्म हुआ है। पाकिस्तान में मुख्तारन माई का वो केस, जिसमें कोर्ट ने कहा कि बाप-भाई ऐसा नहीं कर सकते। ऐसा नहीं कि तिवारी जी के इस बयान की आलोचना नहीं हुई, लेकिन इस बयान के निहितार्थ और छिपे हुए अर्थ को किसी ने डीकोड करने की कोशिश नहीं की। औरतें बोली नहीं इस पर क्योंकि आमतौर पर वे बोलती ही नहीं, लेकिन हमें यकीन है कि वह समझ तो गई थीं। समझ गई थीं, इसलिए ये बात उन्हें ज्यादा डरावनी भी लगी। दुष्कर्म को बालिग-नाबालिग, विवाहित-अविवाहित के सांचे में बांटने का गहरा निहितार्थ औरत को वर्जिन और नॉन वर्जिन के सांचे में बांटना है। अनछुई कुंवारी, सेक्स के अनुभव से वंचित लड़की के साथ जबर्दस्ती हो तो वो दुष्कर्म है, लेकिन विवाहित स्त्री तो अनुभवी स्त्री है। उसके साथ कोई उसकी मर्जी के खिलाफ जबर्दस्ती करे तो ये इतना बड़ा अपराध नहीं।

सोचकर देखिए, यह दुष्कर्म के अर्थ से कहीं ज्यादा डरावना है। स्त्री का पूरा जीवन, उसकी इज्जत, सुख-दुख,आदर-निरादर,प्रेम-सम्मान सब उसके शरीर में। यह सोच इतनी गहरी कि दुष्कर्म को भी श्रेणियों में बांट देती है। कितने बरस लगेंगे पितृसत्ता को ये बात समझाने में कि औरत की मर्जी के खिलाफ बनाया गया हर संबंध रेप है, हर संबंध गलत है। हर गलत, गलत ही होता है। यह कोई आम नहीं कि कैटेगरी में बांट दो तुम।

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