सांपा गेर में महिलाओं ने पुरुषों पर बरसाई लाठियां
काणा गांव की सांपा गेर की अलग ही पहचान है। शनिवार को रंगपंचमी के दिन आयोजित सांपा गेर में गांव की महिलाओं ने लकड़ी से जमकर लोगों की पिटाई करते हुए इस अनोखी गेर का आनंद उठाया। गेर को देखने के लिए आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे। इससे पूर्व रंगपंचमी पर दिनभर रंगों की होली खेली गई तथा दोपहर में गांव में महिलाओं ने गीले आकडे के पौधे की लकड़ी काटकर अपने घरों में छिपाकर रख दी। शाम चार बजे गांव के लोग भगवान शिवजी के मंदिर के बाहर खड़े हो जाते हैं। यहां पर वह ढोल की ताल पर जमकर गेर नृत्य करते हुए गांव के चोहटे में जाते हैं। जहां गांव की महिलाएं उनका पहले से ही इंतजार कर रही थी।
रंगपंचमी पर खेलते हैं होली, शाम काे गेर नृत्य: काणा गांव में रंगपंचमी के दिन ग्रामीणों व महिलाओं द्वारा दिनभर होली खेली जाती है तथा शाम चार बजे महादेव मंदिर के बाहर ग्रामीणों द्वारा ढोल की ताल पर जमकर गेर नृत्य किया जाता है। उसके बाद महिलाओं की सांपा गेर गांव के मुख्य चौहटे में शुरू हो जाती है।
गेर के दौरान पचास फीट से अधिक दूरी पर दाेनाें तरफ खड़ी हाे जाती हैं महिलाएं
यहां महिलाएं हर किसी व्यक्ति की पिटाई नहीं करती है। महिलाएं उन्हीं व्यक्तियों की पिटाई करती है, जो इस गेर में भाग लेते हैं। पांच बजे गांव में सांपा गेर शुरू हो गई। गेर में पचास फीट से भी अधिक दूरी पर दोनों तरफ महिलाएं हाथों में गीली लकडिय़ां लेकर खड़ी हो जाती है। इस दूरी के अंतिम छोर पर नारियल की वाटकियां लटका दी जाती है। इन वाटकियों को लेने के लिए महिलाओं के बीच में से होकर गुजरना पड़ता है। जिनके हाथों में गीली लकडिय़ां है। उसके बावजूद गांव के नवयुवक लोग इन महिलाओं के हाथों मार खाने के लिए उतावले नजर रहे थे। पिटाई के बावजूद एक-एक नारियल की वाटकियों को लाने में सफल हो जाते हैं। इससे पूर्व इस गेर काे देखने के लिए शाम चार बजे ग्रामीणों का सैलाब उमड़ पड़ा।
काणा गांव में हाेली के पांच दिन बाद होती है गेर : तहसील क्षेत्र के काणा गांव में होली के 5 दिनों बाद अनोखी गेर का आयोजन किया जाता है। जिसे ग्रामीण सांपा गेर कहते हैं,जिसमें गांव की महिलाओं द्वारा गेर में भाग लेने वाले व्यक्तियों को लकड़ी से पिटाई की जाती है। यह अनोखी गेर इस काणा गांव की पहचान बन गई है।
गेर के दौरान युवक की पिटाई करती महिलाएं।