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सभी देव गाेमाता के उपासक, उसकी अपेक्षा करके कृपा की अास भी नहीं रखें : संत गाेपालाचार्य सरस्वती

Pali News - अणुव्रत नगर मैदान में चल रहे गाे कृपा कथा महाेत्सव व 31 कुंडीय यज्ञ कार्यक्रम के दाैरान प्रवचन सभा काे संबाेधित...

Dec 06, 2019, 10:32 AM IST
Pali News - rajasthan news worshipers of all the gods do not expect grace but keep it sant gepalacharya saraswati
अणुव्रत नगर मैदान में चल रहे गाे कृपा कथा महाेत्सव व 31 कुंडीय यज्ञ कार्यक्रम के दाैरान प्रवचन सभा काे संबाेधित करते हुए गाेवत्स संत जगदीश गाेपालाचार्य सरस्वती ने वहां माैजूद हर श्रद्धालु काे अपने घर में गाय रखने का अाह्वान किया। उन्हाेंने कहा कि धार्मिक के साथ यदि गाय के अाैषधीय महत्व काे भी समझना हाेगा। राम, कृष्ण सहित सभी देव गाे उपासक व रक्षक ही थे। गाय की उपेक्षा करके यदि हम इन देवाें से शांति की अास करें ताे ये कभी संभव नहीं हाेगा। गाय में सभी देवी-देवताअाें का वास है। गाय के पूजन, उसकी सेवा करने से साैभाग्य अाैर सुरक्षित जीवन की प्राप्ति हाे सकती है। अतिथि रूप में माैजूद विधायक ज्ञानचंद पारख, सभापति रेखा भाटी अाैर पार्षद राकेश भाटी काे भी उन्हाेंने शहर काे बेसहारा गाेवंश से मुक्त करने की भाेळावण दी। उन्हाेंने कहा कि इससे न केवल दुर्घटनाएं हाे रही हैं, बल्कि पाॅलीथिन खाकर कई गायें मर भी रही हैं। समापन पर गाे अारती की गई। महावीर अाइसक्रीम के भावेश साहू द्वारा प्रसाद के रूप में अाइसक्रीम वितरित की गई। अायाेजन समिति के अाेमप्रकाश राठाैड़, पवन पांडे व देवीसिंह राजपुराेहित ने बताया कि इस माैके कमलकिशाेर गाेयल, गिरधारीसिंह राजपुराेहित, बजरंगलाल हुरकट, विष्णुदत्त शर्मा, मनोहरसिंह पुनायता, पंडित सत्यनारायण शास्त्री, मेघराज भूतड़ा, खींमसिंह बारवा, गोविन्द सिंह चारण, दीपेश भाट अादि उपस्थित थे।

धर्म-समाज

अणुव्रत नगर में धर्मसभा में संत ने गाय के धार्मिक के साथ अाैषधीय महत्व बताए

पाली. अणुव्रत नगर में आयोजित गो कथा में प्रवचन सुनतीं महिलाएं। फोटो| भास्कर

रामायण की इन दाे चाैपाइयाें से बताए गाय के सम्मान अाैर तिरस्कार के प्रभाव

भूकंप कहे गाई की गाथा, कांपे धरा त्रास अति जाता।

जा दिन धरा धेनु न हाेई, रसा रसातल ता छन हाेई।

भावार्थ : भूकंप गाय की गाथा ही गा रहा है। जब गाेमाता काे बहुत कष्ट हाेता है तभी पृथ्वी कांपती है। जिस दिन धरती पर गाय नहीं हाेगी, उसी दिन ये रसातल में चली जाएगी।

सुखी धेनु सत जुगहि बसाई, दुखी काल कलि दियाे बनाई।

मृत भइ संस्कृति जीवित कीजाे, सत सद गुरदच्छिन साेइ दिज्याे।

भावार्थ : जब गाेमाता सुखी हाेती है ताे धरती पर सतयुग अा जाता है। जहां गाेमाता दुखी हाेती है वहां कलियुग अा जाता है। मरी हुई संस्कृति काे जीवित करना ही सच्ची गुरु दक्षिणा है।

एेसा धार्मिक अायाेजन शहर में पहली बार



अाेमप्रकाश

गिरधारीसिंह

अजीत शर्मा

देवीसिंह










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